4 गुना ज्यादा नाइट्रेट व बैक्टीरिया मिला:स्कूलों में बच्चों के हलक तक पहुंच रहा बीमार करने वाला पानी
बैक्टीरिया युक्त पानी स्कूल और अस्पताल ही नहीं घरों तक पहुंच रहा; 9 सैंपल में कॉलीफार्म की पुष्टि हुई, स्कूलों में पेयजल की शुद्धता पर भास्कर की सबसे बड़ी पड़ताल, 3 जिलों के सैंपल टेस्ट कराए
सीकर : सरकारी स्कूलों में बच्चों को बैक्टीरिया युक्त गंदा पानी पीना पड़ रहा है। दैनिक भास्कर ने तीन जिलों के सरकारी स्कूलों में सप्लाई हो रहे पेयजल की शुद्धता को लेकर सबसे बड़ी पड़ताल की। सीकर, जयपुर, श्रीगंगानगर जिलों के 40 से ज्यादा स्कूलों से पानी के सैंपल लेकर पीएचईडी लैब से जांच करवाई। जांच में चिंताजनक हालात सामने आए।
टेस्ट रिपोर्ट में 100 एमएल पानी में 45 से 450 तक कॉलीफॉर्म ऑर्गेनिज्म (बैक्टीरिया का समूह) पाए गए। इस पानी से बच्चों में लीवर, पेट में संक्रमण, टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। जयपुर के स्कूलों से लिए गए सैंपल में बैक्टीरिया तो नहीं मिला, लेकिन इनमें नाइट्रेट तय मात्रा से अधिक मिला।
सीकर: 460 सीवेज बैक्टीरिया, दूजोद में 200 एमजी नाइट्रेट
कांवट (सीकर) के राजकीय सीसे स्कूल के पानी में 460 बैक्टीरिया मिले। महात्मा गांधी स्कूल में 43 व फतेहपुर के सुभाष सीनियर सेकंडरी स्कूल में 15 बैक्टीरिया मिले। दूजोद के बालिका स्कूल में नाइट्रेट की मात्रा 200 मिलीग्राम, सीकर के हिंदी विद्या भवन मिडिल स्कूल में 135 मिलीग्राम, हरदयाल सी.से. स्कूल में 90 मिलीग्राम सामने आई।
श्रीगंगानगर: टंकी की सफाई ही नहीं, 93 घातक बैक्टीरिया मिले
श्रीगंगानगर में रावला के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के 100 एमएल पानी में 460 व मटक चौक गर्ल्स स्कूल के 100 एमएल पानी की जांच में 93 बैक्टीरिया मिले। अन्य स्कूलों में भी हालात यही मिले। स्कूलों की टंकियों पर सफाई किए जाने की तारीख अंकित नहीं मिली। पानी की टंकी के पास गंदगी जमा मिली।
जयपुर : तय मात्रा से डेढ़ गुना पाई गई नाइट्रेट की मात्रा
जयपुर जिले के ग्रामीण इलाकों से आधा दर्जन स्कूलों से पानी के सैंपल लिए गए। नियमानुसार एक लीटर पानी में नाइट्रेट की मात्रा 45 मिलीग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ढोढसर के रामावि में नाइट्रेट 61 व हाड़ौता के महात्मा गांधी स्कूल में 48 मिलीग्राम मिला। इन स्कूलों से लिए सैंपल में बैक्टीरिया नहीं मिला।
पीडियाट्रिशियन डॉ. रामसिंह ने कहा मनुष्य और जानवरों के मल से फैलता है कॉलीफॉर्म कॉलीफॉर्म ऑर्गेनिज्म सूक्ष्म जीवाणुओं का समूह है। इसे साधारण तौर पर देख पाना मुमकिन नहीं हैं। ये मनुष्य और गर्म खून वाले जानवरों के पाचन तंत्र में पाए जाते हैं, जो मल के जरिए पानी में घुलते हैं। इससे लीवर, पेट में संक्रमण, टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बीमार लोगों पर इसका ज्यादा असर होता है। नाइट्रेट युक्त पानी के लगातार सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
जो स्कूल आप बता रहे हैं। वहां प्रिंसिपल से रिपोर्ट लेंगे। बच्चों को साफ पानी मिलना चाहिए। कहीं गड़बड़ी है तो ठीक करवाएंगे। उच्चाधिकारियों को भी अवगत करवाएंगे। -सुनील कुमार, डीईओ माध्यमिक जयपुर
रूटीन में टंकियों की सफाई की जाती है। कहीं बैक्टीरिया वाला पानी आ रहा है तो आप हमें बताएं। हम स्कूलों से रिपोर्ट मंगवाएंगे। शुद्ध पानी की व्यवस्था पहली प्राथमिकता है। -हरबंसलाल जानू, डीईओ माध्यमिक सीकर
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