महिला कैदियों को मथुरा जेल में ही क्यों दी जाती है फांसी? मुस्कान से पहले शबनम और रामश्री का आया था मामला
मेरठ के सौरभ राजपूत मर्डर केस में अगर मुस्कान रस्तोगी को फांसी पर लटकाया जाएगा तो यह सुविधा सिर्फ मथुरा जेल में है। यहां महिला कैदियों के लिए विशेष फांसी घर बना हुआ है।
मथुरा: मेरठ के बहुचर्चित नीला ड्रम मर्डर केस में अदालत ने मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुना दी है। इस फैसले के बाद एक बार फिर से मथुरा जेल की चर्चा होने लगी है। दरअसल पूरे उत्तर प्रदेश में सिर्फ मथुरा जेल में ही महिला कैदी को फांसी देने की व्यवस्था है। अंग्रेजों के जमाने से ही यहां महिलाओं के लिए फांसी घर बना हुआ है। अगर मुस्कान को फांसी पर लटकाया जाएगा तो उसे मेरठ से मथुरा जेल में ही लाना पड़ेगा।
मथुरा जेल में अंग्रेजों ने भले ही महिलाओं के लिए विशेष फांसी घर बनवाया हो, लेकिन आजादी के बाद से एक भी महिला को यहां फांसी की सजा नहीं दी गई है। मुस्कान से पहले अमरोहा की शबनम अली को फांसी की सजा सुनाई गई थी। उस समय भी मथुरा जेल सुर्खियों में आई थी। हालांकि शबनम का मामला अभी भी ऊपरी अदालत में विचाराधीन है। शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के सभी सदस्यों को कुल्हाड़ी से काट डाला था।
आज तक एक भी महिला को नहीं हुई फांसी
मथुरा जेल के रेकॉर्ड के अनुसार, 1998 में यहां एक मामले में दोषी करार दी गई महिला रामश्री को फांसी पर लटकाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। बाद में राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका स्वीकार कर ली थी जिससे रामश्री की सजा उम्रकैद में बदल गई थी। रेकॉर्ड के अनुसार, 1947 से लेकर आज तक महिला फांसी घर में किसी कैदी को नहीं लटकाया गया है।
1870 में हुआ था निर्माण
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मथुरा जेल में विशेष फांसी घर का निर्माण वर्ष 1870 में ब्रिटिश शासन काल के दौरान बनाया गया था। यहां फांसी घर के चारो तरफ एक ऊंची चारदीवारी है। बीच में एक तख्त है जहां पर फांसी पाने वाले को लटकाने की व्यवस्था है। फांसी घर का परिसर करीब 400 मीटर का है। आसपास की खाली जमीन पर सब्जियां उगाई जाती हैं।
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