झुंझुनूं में रूफ वॉटरप्रूफिंग के नाम पर ठगी की आशंका! 25 साल की वारंटी का दावा, काम के बाद ठेकेदार गायब
रंगीन पैंपलेटों में ‘जापानी तकनीक’ और 100% लीकेज बंद करने के वादे; पहली बारिश में छतें टपकने पर ग्राहकों की शिकायतें, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
झुंझुनूं : मानसून के दौरान छतों से पानी टपकने की समस्या मकान मालिकों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। इसी समस्या के समाधान के नाम पर झुंझुनूं शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में रूफ वॉटरप्रूफिंग करने वाली कंपनियों और ठेकेदारों के विज्ञापन तेजी से नजर आने लगे हैं। पैंपलेटों में 20 से 25 साल की वारंटी, जापानी तकनीक, महज 48 घंटे में काम पूरा करने और 100 प्रतिशत लीकेज रोकने जैसे दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, कुछ ग्राहकों ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए काम की गुणवत्ता और बाद की सर्विस को लेकर शिकायतें की हैं।
25 साल की वारंटी, लेकिन भरोसे का आधार क्या?
वॉटरप्रूफिंग के प्रचार में लंबी वारंटी और गारंटी को प्रमुखता से दिखाया जाता है। ग्राहक भी छत की समस्या से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद में इन दावों पर भरोसा कर लेते हैं। लेकिन सवाल यह है कि वारंटी देने वाली कंपनी की पहचान, उसकी शर्तें और शिकायत होने पर सेवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी स्पष्ट है। विशेषज्ञता और गुणवत्ता की पुष्टि किए बिना केवल आकर्षक विज्ञापन देखकर काम करवाना ग्राहकों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। खासकर तब, जब वारंटी की शर्तें लिखित में न हों या कंपनी से संपर्क करने का कोई भरोसेमंद माध्यम उपलब्ध न हो।
48 घंटे में काम और 100 प्रतिशत लीकेज बंद करने के दावे
कुछ पैंपलेटों में ‘मात्र 48 घंटे में काम पूरा’, ‘100 प्रतिशत वॉटरप्रूफ प्रोटेक्शन’ और ‘लीकेज बंद, रूफ मजबूत’ जैसे दावे किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, छत की स्थिति, दरारों, पानी निकासी और इस्तेमाल होने वाली सामग्री के आधार पर काम की प्रकृति और समय अलग-अलग हो सकता है। ऐसे में ग्राहकों को केवल समयसीमा या शत-प्रतिशत सुरक्षा के दावे के आधार पर फैसला लेने के बजाय काम की तकनीकी जानकारी, सामग्री की गुणवत्ता और लिखित शर्तों की जांच करनी चाहिए।
काम के बाद सर्विस नहीं मिलने की शिकायत
कुछ ग्राहकों का आरोप है कि वॉटरप्रूफिंग का काम पूरा होने और भुगतान लेने के बाद ठेकेदार दोबारा जांच करने नहीं आते। बारिश के दौरान छत से फिर पानी टपकने पर संपर्क करने की कोशिश की जाती है, लेकिन फोन नहीं उठाने या बहाने बनाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
एक ग्राहक के अनुसार, उन्होंने पैंपलेट देखकर अपने मकान की छत पर वॉटरप्रूफिंग करवाई थी। ठेकेदार ने 25 साल की गारंटी देने का वादा किया, लेकिन पहली ही बारिश में छत दोबारा टपकने लगी। ग्राहक का कहना है कि शिकायत के बावजूद संबंधित लोगों ने न तो मौके पर आकर जांच की और न ही समस्या का समाधान किया। हालांकि, इन शिकायतों के संबंध में संबंधित कंपनियों या ठेकेदारों का पक्ष सामने आना बाकी है।
उपभोक्ता इन बातों का रखें ध्यान
- लिखित वारंटी लें: वारंटी की अवधि, शर्तें, किन परिस्थितियों में मरम्मत होगी और सर्विस कैसे मिलेगी, यह स्पष्ट करवाएं।
- कंपनी की पहचान जांचें: पूरा नाम, कार्यालय का पता, संपर्क नंबर और भुगतान की रसीद जरूर लें।
- सामग्री का विवरण पूछें: इस्तेमाल होने वाले केमिकल या अन्य सामग्री का नाम, गुणवत्ता और निर्माता की जानकारी लें।
- काम की शर्तें लिखवाएं: काम पूरा करने की समयसीमा, लागत और दोबारा लीकेज होने पर समाधान की जिम्मेदारी लिखित में तय करें।
- भुगतान का रिकॉर्ड रखें: संभव हो तो बैंक या डिजिटल माध्यम से भुगतान करें और बिल सुरक्षित रखें।
- शिकायत होने पर दस्तावेज संभालें: पैंपलेट, बिल, वारंटी कार्ड, बातचीत के संदेश और लीकेज की तस्वीरें सुरक्षित रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता आयोग या संबंधित विभाग में शिकायत की जा सके।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
वॉटरप्रूफिंग के नाम पर किए जा रहे लंबे वारंटी और शत-प्रतिशत सुरक्षा के दावों की सत्यता की जांच की मांग उठ रही है। ग्राहकों का कहना है कि यदि विज्ञापन में किए गए वादे पूरे नहीं होते और शिकायतों पर सुनवाई नहीं होती, तो ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अब सवाल यह है कि वारंटी और गुणवत्ता के बड़े-बड़े दावे करने वाले कारोबारियों की जवाबदेही कैसे तय होगी? उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए शिकायतों की निष्पक्ष जांच, भ्रामक विज्ञापनों पर नियमानुसार कार्रवाई और सेवा संबंधी शर्तों में पारदर्शिता जरूरी है।
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