कर्ज लेकर दुबई गए शेखावाटी के युवा, अब वतन वापसी के लिए भी मांगे जा रहे 80 हजार रुपये!
16 घंटे काम कराने का आरोप, पासपोर्ट भी लिए; सुबह 4 बजे उठकर रात 8-9 बजे तक ड्यूटी, 50 मंजिल चढ़ने-उतरने से युवक की तबीयत बिगड़ी
झुंझुनूं : बेहतर कमाई और परिवार का भविष्य संवारने के सपने लेकर दुबई पहुंचे शेखावाटी के कुछ युवाओं के लिए विदेश की नौकरी परेशानी का सबब बन गई है। युवाओं ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि भारत में उन्हें जिस कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था, दुबई पहुंचने के बाद वहां काम नहीं मिला। इसके बजाय उन्हें दूसरी सप्लाई कंपनी के हवाले कर दिया गया। युवाओं का कहना है कि उनके पासपोर्ट ले लिए गए हैं, लंबे समय तक काम कराया जा रहा है और वेतन मिलने की भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही।
युवाओं के मुताबिक, दुबई पहुंचने के लिए उन्होंने एजेंट को 50 हजार रुपये तक दिए। कुछ ने परिवार से पैसे लिए तो कुछ ने ब्याज पर कर्ज लिया। अब हालात ऐसे हैं कि उनके पास खाने-पीने तक के पैसे नहीं बचे हैं। उनका आरोप है कि भारत लौटने की बात करने पर एक व्यक्ति से करीब 3 हजार दिरहम यानी लगभग 80 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं।
सुबह 4 बजे उठना, रात 8-9 बजे तक काम
दुबई में फंसे युवाओं का कहना है कि भारत में उन्हें करीब 8 घंटे की ड्यूटी का भरोसा दिया गया था, लेकिन वहां सुबह करीब 4 बजे उठना पड़ता है। सुबह 5 से 5:30 बजे तक काम के लिए निकलने के बाद रात 8-9 बजे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। इस तरह काम के घंटे तय समय से काफी ज्यादा होने का आरोप है।
एक युवक ने वीडियो में अपनी परेशानी बताते हुए कहा, “मेरे से नहीं हो रहा है, चक्कर आते हैं। 50 मंजिल चढ़ना-उतरना पड़ता है।” युवाओं का आरोप है कि बीमार होने पर भी छुट्टी नहीं मिलती और काम की परिस्थितियां उनके लिए मुश्किल होती जा रही हैं।
MBM कंपनी का वादा, ड्यूटी दूसरी कंपनी में लगाने का आरोप
झुंझुनूं जिले के डाबड़ी धीरसिंह निवासी मेहबूब अली टाइल मेसन का काम करते हैं। मेहबूब के मुताबिक, उन्होंने झुंझुनूं के एजेंट सुरेश कुमार को 50 हजार रुपये दिए थे। उन्हें दुबई की MBM कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था। उनका इंटरव्यू भी इसी कंपनी के लिए हुआ और वीजा भी इसी कंपनी का दिया गया।
मेहबूब का आरोप है कि दुबई पहुंचने के बाद उन्हें MBM के बजाय ABC नाम की सप्लाई कंपनी में काम पर लगा दिया गया। उनका कहना है कि भारत में जिस कंपनी और काम के बारे में बताया गया था, वहां की वास्तविक स्थिति उससे अलग निकली। दुबई पहुंचते ही उनका पासपोर्ट भी ले लिया गया।
मेहबूब के अनुसार, उन्हें बताया गया है कि दो महीने बाद वेतन मिलेगा। ऐसे में बिना कमाई के रहने और खाने का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत लौटने की बात करने पर उनसे करीब 3 हजार दिरहम यानी लगभग 80 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं।

एजेंट ने कहा- दुबई भेजना मेरा काम था
झुंझुनूं निवासी मोहम्मद शोहेब अली ने भी एजेंट सुरेश को 50 हजार रुपये देकर दुबई जाने की बात कही है। शोहेब के मुताबिक, उन्हें भारत में एक कंपनी और नौकरी का भरोसा दिया गया था, लेकिन दुबई पहुंचने पर वह कंपनी नहीं मिली। शोहेब का आरोप है कि एजेंट से संपर्क करने पर उसने कहा कि उसका काम उन्हें दुबई भेजना था, वहां क्या हो रहा है, इसकी उसे जानकारी नहीं है। शोहेब के मुताबिक, उनके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं और जिस कंपनी के हवाले उन्हें किया गया है, वहां भी उनकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है।
रहने-खाने का संकट, कमरों से निकाले जाने का आरोप
युवाओं का कहना है कि रहने की व्यवस्था ठीक नहीं है और खाने के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं हैं। उनका आरोप है कि वेतन दो महीने बाद देने की बात कही जा रही है, जबकि रोजमर्रा के खर्च के लिए भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। युवाओं ने यह भी आरोप लगाया कि पासपोर्ट वापस मांगने पर उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं और उन्हें कमरों से बाहर निकाल दिया गया है या निकालने की धमकी दी जा रही है।
दुबई में फंसे कामगारों का विवरण इस प्रकार है—
- मेहबूब अली — टाइल मिस्त्री, निवासी डाबड़ी धीरसिंह, झुंझुनूं।
- सद्दान हुसैन — टाइल मिस्त्री, निवासी झुंझुनूं।
- शोहेब अली — श्रमिक, निवासी झुंझुनूं।
- अय्यान खान — चेजा मिस्त्री, निवासी लक्ष्मणगढ़, सीकर।
- कन्हैयालाल जांगिड़ — बढ़ई, निवासी चूरू।
- इस्लाम खान — स्टील फीटर, निवासी राजगढ़, चूरू।
- अमीर खान — स्टील फीटर, निवासी राजगढ़, चूरू।
6 युवक हाल ही में पहुंचे, पहले से 26 लोगों के फंसे होने का दावा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चूरू और झुंझुनूं के छह युवक 1 से 3 अक्टूबर के बीच दुबई पहुंचे थे। युवाओं का दावा है कि उनके अलावा करीब 26 अन्य लोग भी वहां लंबे समय से फंसे हुए हैं।
वीडियो के जरिए युवाओं ने अपनी परेशानी सामने रखते हुए मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि वे परिवार से दूर बेहतर कमाई की उम्मीद लेकर विदेश आए थे, लेकिन अब नौकरी, रहने-खाने और वतन वापसी को लेकर संकट में हैं। युवाओं की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित एजेंट व कंपनियों का पक्ष सामने आना बाकी है। मामले में युवाओं की सुरक्षित वापसी, पासपोर्ट की उपलब्धता और रोजगार से जुड़े वादों की जांच अहम होगी।
भारतीय दूतावास से मदद की गुहार लगाई है। हमारी मांग है कि हमें सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। – मोहम्मद शोहेब अली झुंझुनूं
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