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गाडराटा में बाबा सुंदर दास का लक्खी मेला शुरू:मंदिर में ज्योत अर्पण होते ही श्रद्धालुओं ने धोक लगाई, राजस्थान-हरियाणा-यूपी से आते हैं भक्त


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गाडराटा में बाबा सुंदर दास का लक्खी मेला शुरू:मंदिर में ज्योत अर्पण होते ही श्रद्धालुओं ने धोक लगाई, राजस्थान-हरियाणा-यूपी से आते हैं भक्त

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम बनाया; सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी

खेतड़ी : खेतड़ी क्षेत्र के गाडराटा में बाबा सुंदर दास महाराज का प्रसिद्ध लक्खी मेला शुरू हो गया है। बाबा सुंदर दास मंदिर में जोत अर्पित किए जाने के साथ मेले का शुभारंभ हुआ। पहले दिन ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा के दर्शन कर धोक लगाई। मेले में राजस्थान के साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

बाबा के भक्त महिपाल सिंह ने बताया- बाबा सुंदर दास महाराज के मंदिर से लोगों की आस्था करीब 500 साल से जुड़ी हुई है। स्थानीय मान्यता के अनुसार बाबा सुंदर दास को सर्पदंश और पशुओं से जुड़ी बीमारियों से रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। आसपास के ग्रामीण पशु के बच्चे को जन्म देने के बाद पहला दूध और दही मंदिर में चढ़ाते हैं। पशुओं को बांधने के लिए इस्तेमाल होने वाली बेल (सांकल) या रस्सा भी मंदिर में लाकर बाबा के दरबार में धोक लगाई जाती है।

एकादशी से पूर्णिमा तक चलता है मेला

बाबा सुंदर दास का लक्खी मेला भाद्रपद शुक्ल एकादशी से शुरू होकर पूर्णिमा तक चलता है। पांच दिन तक चलने वाले मेले में श्रद्धालु जात-जडूले उतरवाने के लिए भी पहुंचते हैं। मेले के पहले तीन दिनों में मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहती है। सुंदरदास सेवा समिति की ओर से मेले को लेकर तैयारियां पूरी की गई हैं। मंदिर और मेला परिसर में साफ-सफाई करवाई गई है और दुकानों का संचालन भी शुरू हो गया है।

श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं और बाबा के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं।
श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं और बाबा के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं।

दुकानों और श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए व्यवस्था

मेले में दुकानदारों को दुकान लगाने के लिए 8 फीट जगह दी गई है। वहीं सड़क के दोनों तरफ करीब 20 फीट चौड़ा रास्ता रखा गया है, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनी रहे। मेले की व्यवस्था के लिए वालंटियर तैनात किए गए हैं। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से पूरे मेले की निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं को मंदिर में आसानी से दर्शन कराने के लिए बैरिकेडिंग भी की गई है।

पार्किंग, पानी और सफाई की भी व्यवस्था

प्रशासन ने मेला क्षेत्र में मेला मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किया है। मेला स्थल पर यातायात और पार्किंग के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए पानी के टैंकर लगाए गए हैं। सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए कचरा गाड़ियां भी तैनात की गई हैं। मेले में सुरक्षा को देखते हुए ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी। वन विभाग से सर्च लाइट मंगवाई गई है, जिससे रात के समय पहाड़ी क्षेत्रों पर नजर रखी जा सके।

मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। वहीं किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल स्टाफ और दो एंबुलेंस भी तैनात की गई हैं। इससे मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।

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