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शादी से पहले दूल्हा गणेशजी को देता है पहला निमंत्रण:पहाड़ी की चट्टान पर उभरी भगवान गणेश की प्रतिमा, नौकरी के बाद भेंट चढ़ाने की परंपरा


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शादी से पहले दूल्हा गणेशजी को देता है पहला निमंत्रण:पहाड़ी की चट्टान पर उभरी भगवान गणेश की प्रतिमा, नौकरी के बाद भेंट चढ़ाने की परंपरा

शादी से पहले दूल्हा गणेशजी को देता है पहला निमंत्रण:पहाड़ी की चट्टान पर उभरी भगवान गणेश की प्रतिमा, नौकरी के बाद भेंट चढ़ाने की परंपरा

गुढ़ागौड़जी : गुढ़ागौड़जी कस्बे में पहाड़ी की चट्टान पर उभरी भगवान गणेश की प्राचीन प्रतिमा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। खास बात यह है कि गणेश की यह प्रतिमा किसी अलग पत्थर से बनाकर स्थापित नहीं की गई, बल्कि पहाड़ की चट्टान में प्राकृतिक रूप से उभरे स्वरूप के रूप में इसकी पूजा होती आ रही है। प्रतिमा की खास बनावट और ऊंचाई के कारण आसपास के कई घरों की छतों से भी गणेशजी के दर्शन हो जाते हैं।

पहाड़ की चट्टान में प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई

मान्यता के अनुसार यह राजस्थान की पहली पहाड़ी पर बनी गणेश प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां गणेश की पूजा की परंपरा विक्रम संवत 1706 से चली आ रही है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि गणेशजी के दर्शन और पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

शादी का पहला कार्ड गणेशजी को

क्षेत्र के करीब 40 गांवों में इस मंदिर के प्रति विशेष आस्था है। यहां एक अनूठी परंपरा भी निभाई जाती है। शादी तय होने के बाद दूल्हा स्वयं यहां पहुंचकर सबसे पहले गणेशजी को विवाह का निमंत्रण देता है। इसके बाद शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन मंदिर में पहुंचकर गणेशजी की पूजा करते हैं और गढ़जोड़े की जात लगाते हैं। गणेश चतुर्थी से चतुर्दशी तक मंदिर में विशेष चहल-पहल रहती है।

पहाड़ी की चट्टान पर उभरी भगवान गणेश की प्रतिमा का पुजारी ने श्रृंगार किया।
पहाड़ी की चट्टान पर उभरी भगवान गणेश की प्रतिमा का पुजारी ने श्रृंगार किया।

मन्नत पूरी होने पर बनवाया मंदिर

स्थानीय पुजारी के अनुसार श्रद्धालुओं के साथ व्यापारियों और भामाशाहों की भी मंदिर के प्रति गहरी आस्था है। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपनी श्रद्धा के अनुसार भेंट चढ़ाते हैं। व्यापारियों और भामाशाहों के सहयोग से पहाड़ी पर मंदिर का निर्माण भी करवाया गया। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगातार विकास कार्य करवाए जा रहे हैं।

नौकरी लगने पर भेंट चढ़ाने की भी परंपरा

आसपास के गांवों के युवा नौकरी लगने के बाद अपनी इच्छा के अनुसार गणेशजी को भेंट चढ़ाने के लिए मंदिर पहुंचते हैं। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है और दूर-दराज से भी लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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