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लोहार्गल की 24 कोसीय परिक्रमा में महिला श्रद्धालु की मौत:निमड़ी की कठिन घाटी में बिगड़ी तबीयत, पालकी आज खोरी कुंड पहुंचेगी


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लोहार्गल की 24 कोसीय परिक्रमा में महिला श्रद्धालु की मौत:निमड़ी की कठिन घाटी में बिगड़ी तबीयत, पालकी आज खोरी कुंड पहुंचेगी

लोहार्गल की 24 कोसीय परिक्रमा में महिला श्रद्धालु की मौत:निमड़ी की कठिन घाटी में बिगड़ी तबीयत, पालकी आज खोरी कुंड पहुंचेगी

चिराना : प्रसिद्ध तीर्थराज लोहार्गल की 24 कोसीय परिक्रमा अपने चौथे दिन चरम पर पहुंच गई है। ठाकुरजी की पालकी के साथ शुरू हुई यह परिक्रमा सैकड़ों संतों की टोली के साथ लगातार जारी है। सोमवार को पालकी खाकी अखाड़ा पहुंची थी। यहां से यह मंगलवार शाम तक खोरी कुंड रघुनाथगढ़ में पहुंचेगी।

लोहार्गल से परिक्रमा देने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चिराना में जगह-जगह भंडारे लगाए गए हैं। नाटाणी परिवार द्वारा गढ़ बालाजी सेवा समिति, लखदातार सेवा समिति, पितृकृपा सेवा समिति, बालाजी सेवा समिति और समाजसेवी गिरधारी लाल इंदोरिया द्वारा भंडारे का आयोजन किया जा रहा है।

सांवलोदा पिरोहितान निवासी प्रकाश ढाका और उत्तम जांगिड़ द्वारा प्लास्टिक मुक्त भंडारा चलाया जा रहा है। बजरंग दल गौरक्षक चिराना, सुंदर दास सेवा समिति घाटीहाला और मंगनी राम कुमावत सहित कई अन्य लोग भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके साथ ही, कई जगहों पर जलपान, नाश्ता, खाना, गन्ने का रस, नींबू पानी और पकौड़ी आदि की व्यवस्था भी की गई है।

इस परिक्रमा का सबसे कठिन हिस्सा निमड़ी की घाटी है। सोमवार को इसी दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर एक महिला श्रद्धालु की तबीयत खराब होने से मौत हो गई। इसके बाद वहां सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। परिक्रमा का अधिकांश भाग पहाड़ी मार्ग से होकर गुजरता है। चिराना, किरोड़ी, शाकम्बरी और टपकेश्वर जैसी दुर्गम पहाड़ी चढ़ाइयों के बाद निमड़ी की घाटी सबसे कठिन मानी जाती है। निमड़ी की घाटी पार करने के बाद पहाड़ी मार्ग कम हो जाता है और परिक्रमा रघुनाथगढ़ की ओर बढ़ती है।

सात दिनों की इस परिक्रमा में पहले तीन दिन परिक्रमा शुरू करने वालों के लिए होते हैं। बाकी दिनों में श्रद्धालु परिक्रमा पूरी कर लोहार्गल लौटते हैं। पांचवें दिन से परिक्रमार्थी वापस लोहार्गल की ओर आते दिखते हैं। अंतिम तीन दिनों में रघुनाथगढ़, डाब-पनोरा और रामपुरा जैसे स्थानों पर भंडारे लगाए जाते हैं।

परिक्रमा के अंतिम दो दिनों में श्रद्धालुओं की भीड़ लोहार्गल के आसपास के क्षेत्र में रहती है। परिक्रमा पूरी कर लौटने वाले श्रद्धालुओं के एक साथ लोहार्गल पहुंचने पर मेले जैसा माहौल बन जाता है, जिसमें करीब दस लाख श्रद्धालु जमा होते हैं। अमावस्या को स्थानीय लोहार्गल मेला भरता है। तीर्थराज लोहार्गल में अमावस्या के स्नान का विशेष महत्व होने के कारण इस दिन भारी भीड़ उमड़ती है।

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