क्या डेंगू ठीक कर सकता है बकरी का दूध? जानें असली सच
सोशल मीडिया पर प्लेटलेट्स बढ़ाने का दावा, लेकिन डेंगू के इलाज या प्लेटलेट्स बढ़ाने का पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं
बारिश के मौसम में डेंगू का खतरा बढ़ जाता है। इसी के साथ सोशल मीडिया पर कई घरेलू नुस्खे भी तेजी से वायरल होते हैं। इनमें बकरी का दूध पीने से डेंगू ठीक होने और प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ने का दावा भी शामिल है। हालांकि, इस दावे को लेकर लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
क्या बकरी का दूध डेंगू से बचाता है?
आजकल का सबसे प्रसिद्ध न्यूज़पेपर यानी व्हाट्सएप पर बहुत तरह के डॉक्टर्स आ गए है जो दावा करते हैं की बकरी का दूध इतना पौष्टिक होता है की वह डेंगू जैसी बीमारियों का भी इलाज कर सकता है। बिना सबूत या किसी मेडिकल जानकारी के ये कहना मुश्किल है। इसलिए ऐसे मामलों में एक्सपर्ट डॉक्टर्स की ही सलाह माननी चाहिए। आइए जानते हैं डॉ चंचल शर्मा (आयुर्वेदिक विशेषज्ञ) से की उनका इस बारे में क्या कहना है।
डॉ. चंचल शर्मा का आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: आयुर्वेद में बकरी के दूध को ‘छाग पय’ कहा गया है।
आइए इसका अर्थ आयुर्वेद के एक विख्यात श्लोक से समझते हैं:
छागं पयः स्यात् प्रथमं प्रयोगे गव्यं शृतं पञ्चगुणे जले वा।
सशर्करं माक्षिकसंप्रयुक्तं विदारिगन्धादिगणैः शृतं वा॥
चरक संहिता (चिकित्सास्थान, अध्याय 8 — ‘राजयक्ष्मा चिकित्सा’)
अर्थात: शरीर के रक्तपित्त और कमजोरी (जैसे टीबी/राजयक्ष्मा में) के इलाज के लिए बकरी का दूध पहली पसंद होनी चाहिए। अगर बकरी का दूध न मिले, तो गाय के दूध में उससे पाँच गुना पानी मिलाकर तब तक उबालना चाहिए जब तक कि पानी पूरी तरह सूख न जाए। इसके बाद इसमें मिश्री मिलाकर, या विदारीगंधादि गण समूह की ताकत बढ़ाने वाली जड़ी-बूटियों के साथ पकाकर मरीज को देना चाहिए।

बकरी के दूध के कुछ प्रमुख फायदे:
आसानी से पचने वाला: इसके फैट के कण गाय के दूध की तुलना में छोटे होते हैं, जिससे यह पेट के लिए हल्का होता है और जल्दी पच जाता है।
ब्लीडिंग की समस्या और खांसी में फ़ायदेमंद: यह ब्लीडिंग की समस्या (रक्तपित्त), पुरानी खांसी और TB (क्षय) जैसी कमज़ोरी वाली बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों के लिए टॉनिक का काम करता है।
इम्यूनिटी और ताक़त: इसमें मौजूद जिंक, सेलेनियम और ज़रूरी फैटी एसिड शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और एनर्जी देते हैं।
हड्डियों की मज़बूती: यह कैल्शियम, मैग्नीशियम और फ़ॉस्फोरस का अच्छा स्रोत है, जो हड्डियों की डेंसिटी बनाए रखने में मदद करते हैं।
रिसर्च क्या कहती है?
एक स्टडी से पता चला है कि बकरी का दूध प्लेटलेट काउंट नहीं बढ़ाता है। इसके उलट, कच्चा या बिना पाश्चराइज्ड किया हुआ बकरी का दूध पीने से मरीज़ों को ब्रुसेलोसिस हो सकता है, जो ब्रूसेला मेलिटेंसिस से होने वाला एक गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन है। एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि इससे डेंगू से ठीक होने में रुकावट भी आ सकती है।
आशा आयुर्वेदा अनुसार: बकरी के दूध में बहुत से पोषक तत्वों का मिश्रण होता है, ये शरीर में ऊर्जा वापस लौटाता है और शरीर को स्वस्थ रखता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ का मानना है की ये बुखार और खांसी जैसी बीमारियों में बहुत असरदार है। परंतु किसी भी बड़े मेडिकल शोध में यह साबित नहीं हुआ है कि बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ते हैं। किसी भी रोग का उपाय करने से पहले उसकी उत्पत्ति के बारे में अच्छे से जानें, सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास न करें, अपने विवेक से सोचें।
निष्कर्ष: बकरी का दूध पौष्टिक आहार हो सकता है, लेकिन इसे डेंगू की दवा या प्लेटलेट्स बढ़ाने का प्रमाणित उपाय मानना सही नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल दावों के बजाय चिकित्सकीय सलाह पर भरोसा करना बेहतर है।
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