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नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बाढ़ से 160 मौतें, 1000 लापता:33 शव 150km दूर मिले; भूकंप नहीं, पहाड़ खिसकने से आया 5.2 तीव्रता जैसा झटका


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नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बाढ़ से 160 मौतें, 1000 लापता:33 शव 150km दूर मिले; भूकंप नहीं, पहाड़ खिसकने से आया 5.2 तीव्रता जैसा झटका

नेपाल बाढ़: चीन की लापरवाही का असर खुद उस तक जाने वाले रास्तों पर भी पड़ा है। बाढ़ के खौफनाक वेग ने नुवाकोट को चीन के बॉर्डर से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी अहम सड़क को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसके बह जाने से रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतें आ रही हैं।

नेपाल बाढ़ : नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ में 160 लोगों की मौत हो गई। नेपाल में 157 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई, जबकि 1000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ में 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर सड़कें और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए।

बाढ़ का पानी करीब 30 फीट तक ऊपर आ गया था। तेज बहाव में घर, गाड़ियां और सरकारी ढांचे बह गए। शुरुआत में माना जा रहा था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था, लेकिन अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक चीन की तरफ ल्हेंदे नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा था।

इसी लैंडस्लाइड से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ। इसके बाद ल्हेंदे नदी से पानी और मलबे का सैलाब भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंचा, जिससे बाढ़ आई। बहाव इतना तेज था कि लोगों और मलबे को करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक बहा ले गया, जहां अब तक 33 शव बरामद किए गए हैं।

राहतकर्मी खराब मौसम और टूटे रास्तों के बीच मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई श्रद्धालु भी बाढ़ की चपेट में आ गए। नेपाल में लापता लोगों में 466 विदेशी और 113 नेपाली शामिल हैं, जिनमें 133 भारतीय और 37 NRI भी हैं।

लैंडस्लाइड से 5.2 तीव्रता के भूकंप जितना झटका

बुधवार सुबह 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास, काठमांडू के उत्तर में तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था।

इसी दौरान पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ टूटकर नीचे गिरा और ल्हेंदे खोला नदी में जा गिरा। यह नदी भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है, जो चीन से निकलकर गहरी घाटियों से होते हुए नेपाल में प्रवेश करती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि पहाड़ से ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा हो सकता है। हालांकि, इस घटना की असली वजह का पता लगाने में अभी कई हफ्ते लग सकते हैं।

बाद में USGS ने साफ किया कि यह भूकंप नहीं था। दरअसल, पहाड़ से हुआ लैंडस्लाइड इतना शक्तिशाली था कि उससे 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर झटका पैदा हुआ। यानी पहले भूकंप नहीं आया था, बल्कि लैंडस्लाइड की वजह से भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ था।

भारत में कहां-कितना असर होगा

भारत में इसका असर मुख्य रूप से बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी छोटी-बड़ी नदियों में दिखने की आशंका है। नेपाल से करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव आने का अलर्ट है।

पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में खास सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर है।

नेपाल का पानी त्रिशूली नदी से होते हुए गंडक तक पहुंचेगा। इसके बाद बिहार के निचले इलाकों में पानी बढ़ सकता है। यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर में भी अलर्ट जारी किया गया है।

160 लोगों की मौत: नेपाल में बाढ़ से अब तक 157 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, तिब्बात में 3 लोग मारे गए हैं। 1000 से ज्यादा लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है।

13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान: बाढ़ से रसुवा और आसपास के इलाकों में 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें 8 चालू और 5 निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 748 मेगावाट है।

42 किमी सड़क तबाह: बेट्रावती से रसुवागढ़ी सीमा चौकी तक जाने वाली सड़क का करीब 42 किलोमीटर हिस्सा बाढ़ में क्षतिग्रस्त या बह गया है। इससे नेपाल और चीन सीमा के बीच सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

19 पुल बहे: बाढ़ में कम से कम 19 बड़े पुल बह गए हैं। कई स्थानीय झूला पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इससे प्रभावित इलाकों के कई गांवों और बस्तियों का सड़क संपर्क टूट गया है।

भारत: कम से कम 133 भारतीय नागरिक लापता हैं।

अमेरिका: कम से कम 47 अमेरिकी नागरिक लापता हैं।

रूस: नेपाल में रूसी दूतावास के मुताबिक, 4 नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा।

पुर्तगाल: नेपाल में पुर्तगाली दूतावास के मुताबिक, अब तक 2 पुर्तगाली नागरिकों के लापता होने की सूचना मिली है।

दक्षिण कोरिया: दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के मुताबिक, कम से कम 9 दक्षिण कोरियाई नागरिक लापता हैं।

इटली: इतालवी विदेश मंत्रालय के अनुसार, कम से कम 90 लोगों का पता नहीं चल पाया है।

यूक्रेन: यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने नेपाली अधिकारियों के हवाले से बताया कि कम से कम 53 यूक्रेनी नागरिक लापता हैं।

बेल्जियम: बेल्जियम के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में कम से कम 3 बेल्जियन यात्रियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

ऑस्ट्रेलिया: प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने बताया कि नेपाल में कम से कम 34 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक लापता हैं।

नेपाल के पहाड़ी जिले रसुवा में भोटेकोशी नदी में आए जबरदस्त अचानक बाढ़ से कम से कम 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। सैकड़ों लोग अभी गायब बताए जा रहे हैं। इस बाढ़ ने नदी के किनारे बसे इलाकों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाली सेना, आर्म्ड पुलिस फोर्स और नेपाल पुलिस को तैनात किया गया है और खोज और बचाव अभियान के लिए 14 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। नेपाल-चीन सीमा के पास तिमुरे में तैनात आर्म्ड पुलिस फोर्स के 9 जवान लापता बताए जा रहे हैं।इस भयानक प्राकृतिक आपदे के बाद नेपाल में चीन की मंशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चीन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चीन ने वक्त रहते नेपाल को तिब्बत से आने वाले इस बाढ़ की जानकारी नहीं दी।

आखिर चीन ने नेपाल से क्यों छिपाई बाढ़ की जानकारी?

नेपाल के फॉरेन अफेयर्स जर्नलिस्ट परशुराम काफ्ले ने लिखा है ‘नेपाल हमारे पड़ोसियों की सुरक्षा से जुड़ी जायज चिंताओं का समाधान करता रहा है। हालांकि दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि हमारे उत्तरी पड़ोसी ने हमें काफी नुकसान पहुंचाया है। इतनी बड़ी आपदा की पूर्व चेतावनी न मिलने के कारण हमें जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा।’ उनके इस पोस्ट का मतलब यही है कि चीन जिसने भारत और नेपाल से लगती सीमा की निगरानी के लिए कई सैटेलाइट तैनात कर रखे हैं और जिसके बाद इस बाढ़ को लेकर निश्चित तौर पर जानकारी रही होगी उसने नेपाल के लोगों को बाढ़ की चपेट में आकर मरने के लिए छोड़ दिया।

वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संबंधित अधिकारियों को तिब्बत में नेपाल-चीन सीमा पर बाढ़ के बाद तत्काल खोज, बचाव और राहत अभियान तेज करने का निर्देश दिया है जिससे दोनों तरफ के समुदाय प्रभावित हुए हैं। चाइना रेडियो इंटरनेशनल (सीआरआई) के अनुसार उन्होंने अधिकारियों से संभावित जोखिमों और खतरों की पहचान करने और उनका समाधान करने और बड़ी आपदाओं को रोकने और लोगों के जीवन और संपत्ति की रक्षा के लिए प्रभावी उपाय करने का भी आग्रह किया।

बाढ़ से नेपाल में तबाही का खौफनाक मंजर

बुधवार सुबह उत्तरी नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई। इस बाढ़ से रसुवा जिले में खासकर नदी के किनारे बसे इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका की डिप्टी चेयरपर्सन चमेली गुरुंग ने बताया कि लगभग एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं जिनमें स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, मैलुंग, सल्लेतार, शांतिबाज़ार, पैरेबेसी, खालती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बत्तार शामिल हैं।

रसुवा में मौत का तांडव- रसुवा जिले में बाढ़ की चपेट में आने से अब तक 7 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।

नुवाकोट में उजड़े गांव- नुवाकोट जिले के कई गांव पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। पानी का रफ्तार इतना तेज था कि घर ताश के पत्तों की तरह बह गए। बेबस परिवार अब मलबे और कीचड़ में अपने लापता परिजनों को तलाश रहे हैं।

भोटेकोशी उफान पर- भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने हालात को और बदतर कर दिया है। अभी भी कई इलाकों से संपर्क टूटा हुआ है और नुकसान का सही अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है।

42 किलोमीटर लंबा हाईवे बहा, नेपाल का चीन से कटा संपर्क

चीन की लापरवाही का असर खुद उस तक जाने वाले रास्तों पर भी पड़ा है। बाढ़ के खौफनाक वेग ने नुवाकोट को चीन के बॉर्डर से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी अहम सड़क को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसके बह जाने से न सिर्फ रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतें आ रही हैं बल्कि सीमा पार व्यापार और आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। नेपाल रोड डिपार्टमेंट के मुताबिक भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क को बहा दिया है।

डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर जनरल और प्रवक्ता शुभराज नेउपाने ने बताया है कि बाढ़ के पानी ने कई जगहों पर सड़क को बर्बाद कर दिया और कई कंक्रीट के पुल बहा दिए। यह सड़क भोटेकोशी नदी के किनारे-किनारे बनी है और बाढ़ के कारण बार-बार क्षतिग्रस्त होती रही है। पिछले साल भी बाढ़ ने कई जगहों पर सड़क के हिस्सों को बहा दिया था। नेपाल-चीन बॉर्डर इलाके से बहने वाली लेंडे नदी में आई बाढ़ ने मितरी पुल को भी बर्बाद कर दिया था।

काठमांडू पोस्ट ने बताया है कि फ्रेंडशिप ब्रिज (मितेरी पुल) नष्ट हो गया है। नेपाल और चीन सीमा को जोड़ने वाला मुख्य फ्रेंडशिप ब्रिज बाढ़ के तेज बहाव में पूरी तरह बह गया है। इसके अलावा इस मार्ग पर बने कई अन्य कंक्रीट के पुल भी नष्ट हो चुके हैं। रसुवागढ़ी सीमा चौकी और टिमुरे सीमा शुल्क कार्यालय क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। चीनी सामानों से लदे कई कंटेनर और गाड़ियां पानी में बह गई हैं जिससे दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात पूरी तरह से रुक गया है।

युद्धस्तर पर चलाए जा रहे हैं रेस्क्यू ऑपरेशन

नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) और सेना ने रेस्क्यू के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। निचले इलाकों को खाली करा लिया गया है और हेलीकॉप्टर्स के जरिए फंसे हुए लोगों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है। हालांकि खराब मौसम और टूटे हुए संपर्क मार्गों के कारण राहत दलों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

तिब्बत से नेपाल में घुसा बाढ़ का पानी- 3 तस्वीरें

तिब्बत-चीन सीमा पर ग्यिरोंग पोर्ट के इमिग्रेशन कॉम्प्लेक्स में लोग खतरे को देखकर भागते नजर आ रहे हैं।
तिब्बत-चीन सीमा पर ग्यिरोंग पोर्ट के इमिग्रेशन कॉम्प्लेक्स में लोग खतरे को देखकर भागते नजर आ रहे हैं।
अचानक आई बाढ़ के दौरान मिट्टी और पानी का तेज बहाव घुसता हुआ। पानी इमिग्रेशन कॉम्पलेक्स के ऊपर से आता हुआ दिख रहा है।
अचानक आई बाढ़ के दौरान मिट्टी और पानी का तेज बहाव घुसता हुआ। पानी इमिग्रेशन कॉम्पलेक्स के ऊपर से आता हुआ दिख रहा है।
बाढ़ का पानी इतनी तेज रफ्तार से आया कि लोगों को संभलने और सुरक्षित जगह पहुंचने तक का मौका नहीं मिला।
बाढ़ का पानी इतनी तेज रफ्तार से आया कि लोगों को संभलने और सुरक्षित जगह पहुंचने तक का मौका नहीं मिला।

जान बचाने की जद्दोजहद- 2 तस्वीरें

मलबे का तेज बहाव तेजी से नीचे की ओर बढ़ा। लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आए।
मलबे का तेज बहाव तेजी से नीचे की ओर बढ़ा। लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आए।
30 फीट ऊंची लहरें उठ रही थीं। लोग जान बचाने घर की तीसरी-चौथी मंजिल पर चढ़ गए।
30 फीट ऊंची लहरें उठ रही थीं। लोग जान बचाने घर की तीसरी-चौथी मंजिल पर चढ़ गए।
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी तबाही

नेपाल के खड्ग भंज्यांग इलाके की 23 अगस्त और 26 अगस्त 2026 की सैटेलाइट तस्वीरें, जिनमें बाढ़ से पहले और बाद का फर्क दिख रहा है।

भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री

नेपाल में राहत और बचाव अभियान के बीच भारत ने 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां भेजी हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारतीय वायुसेना का C-130J विमान राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंच गया है।

इसमें अस्थायी टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल हैं। जयशंकर ने कहा कि राहत अभियान के लिए भारत की ओर से और मदद जुटाई जा रही है।

भारत से इमरजेंसी सामान लेकर भारतीय वायुसेना का कार्गो विमान काठमांडू के त्रिभुवन एयरपोर्ट पहुंचा।
भारत से इमरजेंसी सामान लेकर भारतीय वायुसेना का कार्गो विमान काठमांडू के त्रिभुवन एयरपोर्ट पहुंचा।
यहां से इन सामग्रियों को नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान में किया जाएगा।
यहां से इन सामग्रियों को नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान में किया जाएगा।

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