इस्लामपुर में ईद मिलादुन्नबी पर एक रोजा जलसा संपन्न
हजरत मोहम्मद की शिक्षाएं किसी एक जाति और धर्म के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण मानव जाति के लिए है : मौलाना अनीस रजा; नबी सारे जहान के लिए रहमत बनाकर भेजे गए हैं : मौलाना हनीफ रिजवी
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद आरिफ चंदेल
इस्लामपुर : ईद मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर मदरसा फैजाने रजा में मंगलवार रात ईशा की नमाज के बाद एक रोजा अजीमुश्शान जलसा मुनक्कीद किया गया। जलसे के मेहमाने खुसूसी शेरानी आबाद (नागौर) से तशरीफ लाए मौलाना हनीफ खान रिजवी थे। जलसे का आगाज कारी आबिद आलम ने तिलावते कुरआन से किया। मदरसा के बच्चों की ओर से नबी की शान में एक से बढ़कर एक नात शरीफ और हमदो-सना पेश की गई। नातखां मोहम्मद अहमद ने “नबियों में सबसे आला रुतबा मेरे नबी का, कुरआन पढ़ रहा है खुत्बा मेरे नबी का..” नात पेश कर खूब दाद बटोरी। नातखां जाकिर हुसैन ने भी “मुनव्वर मेरी आंखों को समसुदुहहा कर दे…” नात पेश की।
शेरानी आबाद से तशरीफ लाए मौलाना हनीफ रिजवी ने अपनी तकरीर में कहा कि ईद मिलादुन्नबी हमारे लिए असल ईद है। हमें ईद मिलादुन्नबी के सदके में ही दोनों ईद मिली है। रब ने हमारे नबी को सरापा मौजजा बनाकर भेजा है। हुजूर सारे जहान के लिए रहमत बनाकर भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले अपने बच्चों को दीन की तालीम दिलाओ ताकि उन्हें हराम ओर हलाल में फर्क करना आ जाए उसके बाद दुनिया की हर तालीम दिलाओ। हमारा महजब दुनिया की तालीम हासिल करने के लिए मना नहीं करता है।
मदरसा मदीना तुलउलूम चूरू से तशरीफ लाए मौलाना अनीस रजा ने अपनी तकरीर में बताया कि नबी की मिलाद मनाना जायज है। नबी ने भी अपनी विलादत की खुशी में रोजा रखकर खुशी का इजहार किया था। जिक्रे मुस्तफा का नाम ही मिलाद है। उन्होंने कहा कि अल्लाह की दी हुई नेमतों पर खुशी का इजहार करो। नबी अल्लाह की दी हुई सबसे बड़ी नेमत है जिसके लिए हम सब को खुशियां मनाकर रब का शुक्रिया अदा करना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि नबी से मोहब्बत करो, उनके किरदार को अपनी जिंदगी में अपनाओ, अपने अखलाक को उम्दा बनाओ और नबी की सुन्नतों पर अमल करते हुए अपनी जिंदगी बसर करो।
उन्होंने कहा कि तकब्बुर नबी की सुन्नतों में से नहीं। इंसान को चाहे कितनी बड़ी नेमत मिल जाए मगर उन्हें कभी तकब्बुर नहीं करना चाहिए। इबादतों में दिखावा हरगिज ना करें कि अल्लाह को दिखावा पसंद नहीं। रसूल की जिंदगी हमारे लिए बेहतरीन नमूना है। नबी की मोहब्बत ईमान का हिस्सा है। हमें ऐसी तालीम हासिल करनी चाहिए कि हमारे किरदार से इस्लाम झलके। उन्होंने अपनी तकरीर में गरीबों, यतीमों ओर बेवा औरतों की ज्यादा से ज्यादा मदद करने की बात कही। उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद की शिक्षाएं किसी एक जाति और धर्म के लिए नहीं बल्कि उनकी शिक्षाएं पूरी मानव जाति के लिए हैं। हमें उनके बताएं रास्ते पर चलकर जिंदगी बसर करनी चाहिए। संचालन मौलाना अकबर अली ने किया। अंत में सलातो-सलाम पढ़कर तबर्रुक तकसीम किया गया।
बुधवार को कस्बे में ईद मिलादुन्नबी पूरी अकीदत के साथ मनाया गया। लोगों ने अपने-अपने घरों में विभिन्न पकवान बनाकर नियाज लगाई और तबर्रुक तकसीम किया। घरों व मस्जिदों पर विशेष सजावट की गई। मोहल्ला सौदागरान में बच्चों ने ईद मिलादुन्नबी शानो शौकत से मनाया ओर जुलूसे मोहम्मदी निकाला। बच्चों ने “मेरे नबी की है ये शान, बच्चा-बच्चा है कुर्बान” जैसे कलाम पेश किए। लोगों ने छोटे-छोटे बच्चों को तोहफे देकर उनका सम्मान किया।
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