दादी के दरबार जाने वाले रास्ते पर गंदगी का ‘स्वागत’
भादव अमावस्या से पहले सफाई व्यवस्था पर सवाल, कचरे के ढेरों में पॉलीथिन खा रहा गोवंश
झुंझुनूं : विश्व प्रसिद्ध राणी सती मंदिर झुंझुनूं की पहचान है। 11 सितंबर को भादव अमावस्या के अवसर पर देशभर से श्रद्धालु और प्रवासी बड़ी संख्या में दादी के दरबार पहुंचेंगे। ऐसे में मंदिर की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग की बदहाल सफाई व्यवस्था शहर की छवि पर सवाल खड़े कर रही है।
मार्ग पर जगह-जगह कचरे के ढेर और दुर्गंध से राहगीर परेशान हैं। हालात यह हैं कि सड़क किनारे जमा कचरे में गोवंश प्रतिबंधित पॉलीथिन और अन्य कचरा खाने को मजबूर नजर आ रहा है। भादव अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने के साथ यह अव्यवस्था और गंभीर हो सकती है।
गौशाला के सामने ही कचरे में मुंह मार रहा गोवंश
विडंबना यह है कि इसी मार्ग पर गौशाला भी स्थित है। इसके बावजूद सड़क किनारे पड़े कचरे में गोवंश पॉलीथिन सहित अन्य कचरा खाता दिखाई देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि गोवंश संरक्षण के तमाम प्रयासों के बीच खुले में पड़े कचरे से पशुओं को बचाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
इसी रास्ते से गुजरती हैं शवयात्राएं
यह मार्ग केवल मंदिर तक ही नहीं जाता, बल्कि बिबानी मोक्षधाम की ओर जाने वाली शवयात्राएं भी इसी रास्ते से गुजरती हैं। दुर्गंध के कारण अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को नाक पर रुमाल रखकर गुजरना पड़ता है। धार्मिक आस्था और अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को जोड़ने वाले मार्ग की यह स्थिति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
स्वागत द्वार के पास ही गंदगी
मार्ग के दोनों छोर पर हाल ही में लगाए गए स्वागत द्वारों का विधायक राजेंद्र भाम्बू ने उद्घाटन किया था। लेकिन वर्तमान में स्वागत द्वारों के आसपास ही कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। जिस रास्ते से बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और प्रवासियों का स्वागत होना है, वहीं गंदगी शहर की पहली तस्वीर बन रही है।

करोड़ों की स्वच्छता व्यवस्था, फिर जिम्मेदार कौन?
स्वच्छता के लिए सरकार और नगर परिषद की ओर से संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। सफाई कर्मचारी भी तैनात हैं। इसके बावजूद शहर के इतने महत्वपूर्ण मार्ग पर कचरा जमा होना सफाई व्यवस्था के साथ-साथ मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी सवाल खड़ा करता है। सवाल यह है कि सफाई कर्मचारियों के काम की नियमित निगरानी कौन कर रहा है? यदि मॉनिटरिंग व्यवस्था प्रभावी है तो फिर सड़क किनारे जमा कचरे के ढेर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आ रहे?
जन्मभूमि बुलाती है, बदले में बदबू क्यों?
भादव अमावस्या पर झुंझुनूं लौटने वाले प्रवासी अपने शहर और दादी राणी सती के प्रति आस्था लेकर पहुंचेंगे। उनके लिए जन्मभूमि की मिट्टी भावनाओं से जुड़ी है। ऐसे में शहर में प्रवेश करते ही यदि गंदगी और दुर्गंध उनका स्वागत करे तो यह पूरे शहर के लिए चिंता का विषय है। प्रवासियों को जन्मभूमि की मिट्टी की खुशबू चाहिए, बदले में बदबू नहीं।
धार्मिक स्थलों से लेकर कॉलेज और स्टेडियम तक जुड़ा है क्षेत्र
यह क्षेत्र शहर की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसी क्षेत्र में सेठ मोतीलाल कॉलेज, राणी सती मंदिर, बिबानी मोक्षधाम, ईदगाह-कब्रिस्तान, मनसा माता मंदिर, गौशाला और बड़ा खेल स्टेडियम स्थित हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। ऐसे में भादव अमावस्या से पहले पूरे मार्ग की विशेष सफाई, कचरे का स्थायी निस्तारण और नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है। प्रशासन को इस क्षेत्र को विशेष निगरानी वाले क्षेत्र के रूप में लेते हुए व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं, विद्यार्थियों, खिलाड़ियों और आमजन को परेशानी न हो।
अब सवाल सिर्फ सफाई का नहीं, शहर की प्रतिष्ठा का है—क्या भादव अमावस्या से पहले प्रशासन इस मार्ग को चमका पाएगा या श्रद्धालुओं का स्वागत गंदगी और दुर्गंध ही करती रहेगी?
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