उपभोक्ता आयोग के आदेश की पालना के लिए नगर परिषद और एसडीएम को अंतिम अवसर
राष्ट्रीय लोक अदालत में 12 सितंबर तक निस्तारण की डेडलाइन, पालना नहीं होने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी
झुंझुनूं : उपभोक्ता आयोग के आदेशों की पालना नहीं करने के मामले में नगर परिषद झुंझुनूं और उपखंड अधिकारी को अंतिम अवसर दिया गया है। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण और आयोग के आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए 12 सितंबर तक की समय-सीमा तय की है।
मामला मंड्रेला रोड स्थित मुख्यमंत्री जन सहभागिता आवास योजना के फ्लैट से जुड़ा है। नगर परिषद द्वारा समय पर फ्लैट तैयार कर उपभोक्ताओं को उपलब्ध नहीं कराने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने निर्णय दिए थे। नगर परिषद ने आयोग के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय तक अपील की, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली और आयोग का निर्णय बरकरार रहा।
आयोग के अनुसार, पीड़ित उपभोक्ताओं ने आवंटित फ्लैट के अपने विधिक अधिकार नगर परिषद के पक्ष में समर्पित करने संबंधी शपथ पत्र प्रस्तुत किए हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र उपभोक्ताओं को अवार्ड राशि का भुगतान किया जा रहा है। जिन फ्लैटों के अधिकार नगर परिषद के पक्ष में समर्पित किए गए हैं, उन्हें बेचने अथवा नीलाम करने का अधिकार भी नगर परिषद को दिया गया है।
गत 13 मार्च को जिला कलक्टर, अतिरिक्त जिला कलक्टर, नगर परिषद प्रशासक, तत्कालीन उपखंड अधिकारी, तहसीलदार सहित संबंधित अधिकारी आयोग के समक्ष उपस्थित हुए थे। अधिकारियों ने आयोग के आदेशों की समयबद्ध पालना का आश्वासन देते हुए इसके लिए समय मांगा था। आयोग ने सद्भावना एवं सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद आदेशों की पूर्ण पालना नहीं होने पर आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने अब 12 सितंबर तक अंतिम अवसर दिया है। इसके बाद उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
अधिनियम की धारा 72 के तहत दोषी पाए जाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना, तीन वर्ष तक का कारावास अथवा दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है।
आयोग ने राष्ट्रीय लोक अदालत को पीड़ित उपभोक्ताओं और संबंधित पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से विवादों का त्वरित समाधान करने का अवसर बताया है। आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील द्वारा पूर्व में भी लंबित मामलों में त्वरित सुनवाई कर राहत प्रदान करने के उदाहरण सामने आए हैं।
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