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नवलगढ़ में रेल लाइन भूमि अधिग्रहण का विरोध:एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, उचित मुआवजे की रखी मांग


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नवलगढ़ में रेल लाइन भूमि अधिग्रहण का विरोध:एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, उचित मुआवजे की रखी मांग

नवलगढ़ में रेल लाइन भूमि अधिग्रहण का विरोध:एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, उचित मुआवजे की रखी मांग

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : शैलेंद्र पारीक

नवलगढ़ : नवलगढ़ के गोठड़ा स्थित श्री सीमेंट कंपनी तक प्रस्तावित रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में प्रभावित किसानों ने शुक्रवार को एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने उचित मुआवजे और कानूनी प्रक्रिया की पूर्ण पालना की मांग की। यह ज्ञापन विजेंद्र काजला के नेतृत्व में दिया गया।

किसानों का आरोप- वास्तविक बाजार मूल्य का निर्धारण किए बिना अधिग्रहण

किसानों ने बताया- प्रस्तावित रेल लाइन नवलगढ़, जोहड़ की ढाणी, दुर्जनपुरा, भजनगढ़, स्वरूपपुरा, भोज्याण, नीम की ढाणी, तुर्काणी और बसावा सहित कई क्षेत्रों से होकर कंपनी तक जाएगी। किसानों का आरोप है कि उनकी सहमति और वास्तविक बाजार मूल्य का उचित निर्धारण किए बिना भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। उन पर डीएलसी दर पर मुआवजा लेने का दबाव बनाया जा रहा है।

उचित मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन की व्यवस्था करने की मांग

ज्ञापन में किसानों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 के प्रावधानों के अनुसार उचित मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन की व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने प्रभावित परिवारों को जमीन के बदले जमीन और रोजगार उपलब्ध कराने की भी अपील की। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में बिना मुआवजा दिए ही भूमि रेलवे के नाम दर्ज कर दी गई है, जिसकी जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

किसान बोले-सिंचित और उपजाऊ जमीन होगी प्रभावित

किसानों ने चिंता व्यक्त की कि प्रस्तावित रेल लाइन से सिंचित और उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित होगी। उन्होंने खेती बचाने के लिए रेल लाइन को पिलर पर या भूमिगत बनाने का सुझाव दिया। साथ ही, उन्होंने रेलवे ट्रैक के साथ सड़क निर्माण की मांग की, ताकि ट्रैक के दोनों ओर बची भूमि तक किसानों की पहुंच बनी रहे।

किसानों ने दावा किया कि सीमेंट कंपनी गोठड़ा और उनके बीच पहले 26 लाख रुपए प्रति बीघा की दर से समझौता हुआ था, जिसकी प्रतियां उनके पास मौजूद हैं। किसानों ने इसी समझौते और वास्तविक बाजार मूल्य को ध्यान में रखकर मुआवजा तय करने की मांग की।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर किसानों के हितों की रक्षा करने की अपील की।

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