स्मारक बने अतिक्रमण का ठिकाना!, प्रशासन की चुप्पी पर बरसा गुस्सा
शहीद स्मारक अतिक्रमण की गिरफ्त में, ज्ञापनों के बावजूद हालात जस के तस-आखिर कब जागेगा प्रशासन?
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : रविंद्र पारीक
नवलगढ़ : आजादी से पहले से नवलगढ़ में प्रभात फेरी निकालने की परंपरा चली आ रही है। आज भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शहर में दो प्रमुख प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं। पहली प्रभात फेरी नाहर सिंह पार्क से और दूसरी मिन्तर चौक से रवाना होती है। लेकिन देशभक्ति के इस आयोजन के बीच शहर के ऐतिहासिक स्मारकों की बदहाली का मुद्दा एक बार फिर सामने आ गया।
लोह पुरुष केसर देव मिन्तर के पौत्र एडवोकेट तरुण मिन्तर ने मिन्तर चौक स्थित स्मारक की दुर्दशा और आसपास बढ़ते अतिक्रमण को लेकर स्थानीय प्रशासन पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिन स्मारकों से शहर का इतिहास और स्वतंत्रता संघर्ष जुड़ा है, उनकी देखरेख और सम्मान की जिम्मेदारी प्रशासन की है, लेकिन जमीनी हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं।

अतिक्रमण की गिरफ्त में ऐतिहासिक स्मारक
नवलगढ़ में लोह पुरुष केसर देव मिन्तर स्मारक, नाहर सिंह शेखावत स्मारक, घूमचक्कर स्थित शहीद विजयपाल सिंह ढाका स्मारक और रोडवेज बस डिपो स्थित शहीद भगत सिंह स्मारक अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार इन स्मारकों के आसपास अतिक्रमण को लेकर नगर पालिका और एसडीएम को कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन लंबे समय बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया है।
अतिक्रमण हटाओ अभियान पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाता है, लेकिन यह अभियान स्मारकों तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ता नजर आता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ऐतिहासिक स्मारकों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए ठोस कार्रवाई कब होगी?
स्मारकों की अनदेखी को लेकर आम लोगों में भी नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि वे प्रशासन को बार-बार ज्ञापन दे सकते हैं, लेकिन कार्रवाई करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

कचरे के ढेर भी बन रहे परेशानी
मुख्य बाजार स्थित मिन्तर चौक और नाहर सिंह पार्क के आसपास कचरे के ढेर भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय रेहड़ी-ठेले वालों की ओर से भी कचरा डाले जाने की शिकायतें सामने आती हैं। हालांकि नगर पालिका सुबह शाम कचरा उठाती है, लेकिन स्थायी समाधान अब भी नजर नहीं आ रहा।
स्वतंत्रता दिवस पर जब शहर देश के वीरों और स्वतंत्रता सेनानियों को याद करता है, उसी समय उनके नाम से जुड़े स्मारकों की यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है-ज्ञापन और आश्वासनों के बाद भी अगर हालात नहीं बदल रहे, तो प्रशासन इन ऐतिहासिक स्मारकों की सुध आखिर कब लेगा?
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19






Total views : 2316947


