[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

क्या शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी की जमीन तैयार:दो साल बाद फिर दिखने लगी अवामी लीग, ऑफिस खुले, बड़े नेता जेल से बाहर


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
विदेश

क्या शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी की जमीन तैयार:दो साल बाद फिर दिखने लगी अवामी लीग, ऑफिस खुले, बड़े नेता जेल से बाहर

क्या शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी की जमीन तैयार:दो साल बाद फिर दिखने लगी अवामी लीग, ऑफिस खुले, बड़े नेता जेल से बाहर

बांग्लादेश : बांग्लादेश में अवामी लीग के एक पुराने ऑफिस के बाहर पार्टी का बैनर लगा है। कार्यकर्ता जुट रहे हैं। दीवार पर शेख मुजीबुर रहमान और शेख हसीना की फोटो फिर दिखाई देने लगी हैं। पार्टी के कार्यक्रमों में पुलिस का दखल पहले जैसा नहीं रहा। नेता स्थानीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। कहीं छोटे-छोटे जुलूस निकल रहे हैं, तो कहीं बंद पड़े ऑफिसों के ताले फिर खुल रहे हैं।

भीड़ बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन कुछ महीने पहले तक ये सब दिखना भी मुश्किल था।

5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के सत्ता से हटने और भारत आने के बाद अवामी लीग के बड़े नेता जेल भेज दिए गए। कार्यकर्ताओं की धरपकड़ हुई। भीड़ ने पार्टी ऑफिसों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। पाटी की गतिविधियां बैन कर दी गईं।

अब माहौल धीरे-धीरे बदल रहा है। इसी बीच शेख हसीना ने भी ऐलान कर दिया- ‘मैं साल के आखिर तक देश लौट आऊंगी। वापसी की तारीख बाद में बताई जाएगी, लेकिन मैं अपने लोगों के पास जरूर लौटूंगी। वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, मार भी सकते हैं… फिर भी मुझे जाना ही होगा।’

हमने बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों की इन छोटी-छोटी घटनाओं को एक साथ रखकर देखा।

दो सवाल थे… 1. ये अलग-अलग घटनाएं हैं या इन सबके बीच कोई कड़ी है? 2.क्या शेख हसीना की वापसी और अवामी लीग के लिए धीरे-धीरे जमीन तैयार की जा रही है?

इनके जवाब कुछ संकेतों में छिपे हैं…

पहला संकेत: बड़े नेता जेल से बाहर आने लगे

8 अप्रैल, 2026 की बात है। शेख हसीना सरकार में संसद की स्पीकर रहीं शिरीन शर्मिन चौधरी को अचानक गिरफ्तार कर लिया गया। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद से ही वे सार्वजनिक जीवन से दूर थीं। चार दिन बाद उन्हें जमानत मिल गई। दो महीने बाद 3 जून को नारायणगंज सिटी कॉरपोरेशन की पूर्व मेयर और अवामी लीग से जुड़ीं सेलिना हयात आइवी को भी जमानत मिल गई। वे करीब एक साल से जेल में थीं।

बांग्लादेश पुलिस और सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अवामी लीग के सत्ता से हटने के बाद 2026 तक 112 पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री और राज्य मंत्री गिरफ्तार किए गए। इनमें 12 महिला पूर्व सांसद भी शामिल हैं। इनमें से कम से कम 8 नेताओं को जमानत मिल चुकी है।

जिन नेताओं को जमानत मिली है, उनमें ज्यादातर पर 6 से 10 तक क्रिमिनल केस दर्ज हैं। कुछ नेताओं पर 50 से ज्यादा मामले हैं। इनमें साबेर हुसैन चौधरी भी हैं। वे शेख हसीना के सेक्रेटरी रह चुके हैं। पश्चिमी देशों के राजनयिकों के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं। वे दुनियाभर की संसदों के संगठन इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन यानी IPU के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

गिरफ्तार लोगों में 73% को जमानत पुलिस मुख्यालय की सितंबर 2025 की एक रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और जमानत का आंकड़ा सामने आया था। रिपोर्ट का नाम था- Information Regarding Arrests and Bail of Persons Involved with Fascism.

इसके मुताबिक, 5 अगस्त 2024 के बाद 13 महीनों में 44,472 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 32,371 लोगों को जमानत मिल गई, यानी करीब 73% गिरफ्तार लोगों को जमानत मिल चुकी थी। इनमें बड़ी संख्या अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं की थी।

मोहम्मद युनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान अवामी लीग के खिलाफ ऑपरेशन डेविल हंट चला था। BNP सरकार के पिछले सात महीनों में ऐसी कार्रवाई काफी कम हो गई है। यही वजह है कि बांग्लादेश में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या अवामी लीग को फिर से राजनीतिक जगह दी जा रही है।

जवाब में बांग्लादेश के डिप्टी अटॉर्नी जनरल बैरिस्टर सिहाबउद्दीन खान कहते हैं, सिर्फ किसी व्यक्ति की राजनीतिक पहचान के कारण उसके नागरिक और कानूनी अधिकार नहीं छीने जा सकते। आरोप की गंभीरता देखकर कानूनी प्रक्रिया चलनी चाहिए।’

सरकार भले इसे अवामी लीग के लिए रियायत नहीं, बल्कि कानूनी राज का हिस्सा बता रही है, लेकिन कहानी सिर्फ अदालत और जेल तक सीमित नहीं है। बांग्लादेश में पहले भी सरकार बदलते ही नेताओं की सजा माफ की गई हैं।

दूसरा संकेत: गांव की राजनीति से वापसी की तैयारी अवामी लीग फरवरी में हुए संसदीय चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकी। पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक थी। अब पार्टी के नेता अगले स्थानीय चुनाव को मौके की तरह देख रहे हैं। 2026 के आखिर में यूनियन परिषद चुनाव होने की संभावना है। सोर्स अक्टूबर के आसपास चुनाव होने की बात कह रहे हैं।

ये चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं लड़े जाते। यही अवामी लीग के लिए सबसे बड़ा रास्ता बन गया है। शेख हसीना के वक्त यूनियन परिषदें पार्टी के जमीनी संगठन का बड़ा आधार थीं। सरकार गिरने के बाद अंतरिम प्रशासन ने इन निकायों को चलाने के लिए प्रशासक नियुक्त किए।

अब आरोप लग रहे हैं कि ये प्रशासक ठीक से काम नहीं कर रहे। इसलिए चुनाव की मांग बढ़ रही है। अवामी लीग के नेताओं का कहना है कि पार्टी सिंबल नहीं होने से हमारे कार्यकर्ता निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं।

जमालपुर के कमाल हुसैन यूनियन परिषद के चेयरमैन थे, लेकिन अवामी लीग से जुड़ाव की वजह से उनकी कुर्सी चली गई थी। कमाल फिर उसी कुर्सी के लिए तैयारी कर रहे हैं, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार बनकर।

कमाल अकेले नहीं हैं। हमने चटगांव के पटिया इलाके के एक संभावित उम्मीदवार से बात की। वे कहते हैं, ‘पार्टी सिंबल जरूरी नहीं है, इसलिए चुनाव में उतरने का रास्ता खुला है।’

अवामी लीग की केंद्रीय समिति के एक संगठन सचिव ने भी इसकी पुष्टि की। उनके मुताबिक, कार्यकर्ता अभी गांवों में चुपचाप काम कर रहे हैं। समय आने पर खुलकर सामने आएंगे।

चुनाव आयुक्त अब्दुर रहमानेल मसूद ने भी कहा है कि जो व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए योग्य है, वह चुनाव लड़ सकता है।

प्रधानमंत्री के सूचना एवं प्रसारण सलाहकार जाहेद उर रहमान ने कहा है कि अवामी लीग से जुड़े लोग निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर स्थानीय चुनाव लड़ सकते हैं। अवामी लीग के संयुक्त महासचिव ए.एफ.एम. बहाउद्दीन नसीम का दावा है कि शेख हसीना ने खुद पार्टी कार्यकर्ताओं को स्थानीय चुनाव में उतरने की सलाह दी है।

तीसरा संकेत: 300 सीटों पर संगठन खड़ा कर रहीं शेख हसीना जेल से नेता निकल रहे हैं। कार्यकर्ता फिर गांवों में घूम रहे हैं। लोकल चुनाव की तैयारी हो रही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल था कि ये सब अपने-आप हो रहा है या पीछे से कोई संगठन चला रहा है?

अवामी लीग के नेताओं ने हमें बताया कि शेख हसीना सभी 300 संसदीय सीटों में संगठन पर नजर रख रही हैं। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, शेख हसीना ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए नेताओं से संपर्क में हैं।

बात सिर्फ कुछ बड़े नेताओं तक सीमित नहीं है। वे उपजिला स्तर तक के नेताओं से भी वर्चुअल बैठकें कर रही हैं। इन बैठकों में स्थानीय नेताओं की समस्याएं सुनी जाती हैं। संगठन की स्थिति पूछी जाती है। कमेटियों को दोबारा बनाने पर बात होती है। और सबसे अहम शेख हसीना की वापसी की तैयारी पर चर्चा होती है।

चटगांव नॉर्थ जिले के रंगुनिया थाना छात्र लीग के पूर्व महासचिव शिमुल गुप्ता भी ऐसी ऑनलाइन बैठकों में शामिल रहे हैं। वे कहते हैं कि शेख हसीना के लौटने के ऐलान के बाद कार्यकर्ताओं में जोश भर गया है। केंद्रीय नेतृत्व से लेकर वार्ड स्तर तक संगठन को फिर से जोड़ने का काम चल रहा है।

5 अगस्त को शेख हसीना की ऑनलाइन स्पीच के बाद बांग्लादेश में अवामी लीग के कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाले थे। ये जुलूस ढाका में निकाला गया।
5 अगस्त को शेख हसीना की ऑनलाइन स्पीच के बाद बांग्लादेश में अवामी लीग के कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाले थे। ये जुलूस ढाका में निकाला गया।

ढाका जिला युवा लीग के सदस्य जकारिया दीपु बताते हैं कि 5 अगस्त से शेख हसीना टेलीग्राम ग्रुप के जरिए थाना, उपजिला और वार्ड स्तर के नेताओं से संपर्क में हैं। उनका दावा है कि शेख हसीना लौटकर सरेंडर करेंगी। उनके साथ पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी ऐसा करेंगे।

आशुलिया थाना अवामी लीग के अध्यक्ष फारूक हुसैन तुहिन भी कहते हैं कि जमीनी स्तर से केंद्रीय नेतृत्व तक वापसी की तैयारी की जा रही है, यानी पार्टी की गतिविधियां अब सिर्फ ऑनलाइन नहीं हैं।

चौथा संकेत: बंद ऑफिसों के दरवाजे फिर खुल रहे 5 अगस्त 2024 के बाद अवामी लीग की सार्वजनिक मौजूदगी लगभग खत्म हो गई थी। अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। पंचगढ़ के चकलाहाट में जिस ऑफिस पर कभी ताला लगा था, वहां अब बैनर लगा है। अंदर कुर्सियां लगाई जा रही हैं। अलग-अलग जिलों और शहरों में कम से कम 50 ऑफिस दोबारा खुल चुके हैं। कहीं सिर्फ बैनर लगाकर मैसेज दिया गया कि पार्टी अभी खत्म नहीं हुई है।

मगुरा जिले में अवामी लीग का ऑफिस फिर खुल गया है। बांग्लादेश क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और पूर्व सांसद शाकिब अल हसन का घर मगुरा में ही है, जिस पर शेख हसीना की स्पीच के बाद हमला हुआ था।
मगुरा जिले में अवामी लीग का ऑफिस फिर खुल गया है। बांग्लादेश क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और पूर्व सांसद शाकिब अल हसन का घर मगुरा में ही है, जिस पर शेख हसीना की स्पीच के बाद हमला हुआ था।
ये वीडियो राजबाड़ी जिले के गोलंदा का है। गालंदा उपजिला है, जो अवामी लीग का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां कार्यकर्ताओं ने ऑफिस में शेख हसीना और मुजीबुर रहमान की फोटो लगा दी हैं।
ये वीडियो राजबाड़ी जिले के गोलंदा का है। गालंदा उपजिला है, जो अवामी लीग का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां कार्यकर्ताओं ने ऑफिस में शेख हसीना और मुजीबुर रहमान की फोटो लगा दी हैं।

हालांकि, ढाका में अवामी लीग का केंद्रीय मुख्यालय और मेन ऑफिस अब भी बंद पड़े हैं। 5 अगस्त 2024 की आगजनी के बाद वहां सन्नाटा है।

ढाका में अवामी लीग का हेडऑफिस, सरकार विरोधी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने यहां आग लगा दी थी। तभी से ये बंद है।
ढाका में अवामी लीग का हेडऑफिस, सरकार विरोधी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने यहां आग लगा दी थी। तभी से ये बंद है।

सरकार चला रही BNP बोली- हसीना को लौटना है तो सरेंडर करना होगा

शेख हसीना के दिसंबर में लौटने के ऐलान पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी के ट्रेनिंग अफेयर्स के सेक्रेटरी ABM मुशर्रफ हुसैन कहते हैं, ‘अगर शेख हसीना वाकई लौटना चाहती हैं, तो उन्हें बांग्लादेश में सरेंडर करना होगा। इसके बाद खुद को निर्दोष साबित करना होगा।’

शेख हसीना लौटीं, तो क्या एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार होंगी

हालात भले बदल रहे हैं, लेकिन शेख हसीना के लिए वापसी इतनी आसान नहीं है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीति नहीं, कानून है। उनके खिलाफ देश भर में 663 केस दर्ज हैं। उन्हें मौत की सजा भी सुनाई जा चुकी है। यानी वापसी की कोशिश उनके लिए जेल का दरवाजा खोल सकती है।

बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट अहसानुल करीम के मुताबिक, शेख हसीना के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका हैं, इसलिए एजेंसियां को उन्हें एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार करना होगा।

छात्र नेताओं का असर घटा, अब रैलियों में भीड़ नहीं आती

2024 के आंदोलन के बाद चार छात्र नेताओं को अंतरिम सरकार में मंत्री स्तर का दर्जा देकर सलाहकार बनाया गया। बाद में इन्हीं नेताओं ने नेशनल सिटिजंस पार्टी यानी NCP बनाई। नाहिद इस्लाम इनमें सबसे बड़ा चेहरा हैं।

शुरुआत में उनकी रैलियों में बड़ी भीड़ जुटती थी। जमात-ए-इस्लामी का समर्थन भी था, लेकिन आम चुनाव में NCP सिर्फ छह सीटें जीत सकी। पिछले सात महीनों में छात्र नेताओं का असर कम हुआ है। जमात के समर्थन के बिना उनकी रैलियों में भीड़ कम हुई।

दूसरी तरफ अवामी लीग पूरी तरह गायब नहीं हुई। पार्टी सीक्रेट मीटिंग, ऑनलाइन डिस्कशन और जुलूसों के जरिए मौजूदगी बनाए हुए है।

एक्सपर्ट बोले- हसीना की वापसी की जमीन अभी तैयार नहीं

हालांकि, जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी में राजनीति विभाग के प्रोफेसर डॉ. नुरुल हुदा साकिब मानते हैं कि अभी माहौल शेख हसीना की वापसी के अनुकूल नहीं है। वे कहते हैं कि BNP कभी शेख हसीना की वापसी नहीं चाहेगी। उनका वापसी का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है, लेकिन उनकी पार्टी ने रास्ते को दोबारा तलाशना शुरू जरूर कर दिया है।

Related Articles