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नीमकाथाना के मंढोली में जनसुनवाई में हंगामा:ग्रामीण बोले- गांव को विस्थापित करें या खनन बंद करें, प्रदूषण बढ़ेगा


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नीमकाथाना के मंढोली में जनसुनवाई में हंगामा:ग्रामीण बोले- गांव को विस्थापित करें या खनन बंद करें, प्रदूषण बढ़ेगा

नीमकाथाना के मंढोली में जनसुनवाई में हंगामा:ग्रामीण बोले- गांव को विस्थापित करें या खनन बंद करें, प्रदूषण बढ़ेगा

नीमकाथाना : नीमकाथाना के मंढोली गांव में प्रस्तावित खनन पट्टा-60 की पर्यावरण स्वीकृति को लेकर आयोजित जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। गांव के लोगों ने जनसुनवाई में पहुंचकर खनन परियोजना का जोरदार विरोध किया और प्रशासन से स्पष्ट कहा कि या तो गांव को विस्थापित किया जाए या फिर खनन पूरी तरह बंद किया जाए।

जनसुनवाई में एजेंसी द्वारा प्रोजेक्ट का प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया गया, लेकिन ग्रामीणों ने मौखिक और लिखित रूप से कई गंभीर आपत्तियां दर्ज करवाईं। ग्रामीणों का कहना था कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र चारों ओर से आबादी से घिरा हुआ है तथा आसपास मंदिर, तालाब और धार्मिक स्थल मौजूद हैं।

ग्राम पंचायत मंढोली के सरपंच मुरारी यादव ने प्रशासन पर गलत रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। उन्होंने बताया कि खनन शुरू होने से गांव में प्रदूषण और कंपन बढ़ेगा, जिससे जनजीवन प्रभावित होगा।

ग्रामीण सुरज्ञान सिंह मीणा ने कहा कि गांव के पहाड़ी क्षेत्र में पहले से खनन गतिविधियां चल रही हैं और लोगों को धूल, शोर और भारी वाहनों की आवाजाही से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार नया खनन शुरू करना चाहती है तो पहले गांव को दूसरी जगह बसाया जाए।

सामाजिक कार्यकर्ता मनीराम यादव ने जनसुनवाई में कहा कि प्रस्तावित खनन से वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण बढ़ेगा, जिसका सीधा असर कृषि और पशुपालन पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बालाजी मंदिर, बाबा रामदेव मंदिर, चिलाय माता मंदिर और हनुमान मंदिर सहित कई धार्मिक स्थल स्थित हैं, जिनकी धार्मिक आस्था प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया कि पूर्व में जारी खनन पट्टों में भी कई अनियमितताएं हुई हैं तथा गोचर भूमि का उपयोग रास्ते के रूप में किया गया। लोगों ने मांग की कि वर्तमान पट्टे की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और भविष्य में नए खनन पट्टे जारी नहीं किए जाएं।

जनसुनवाई के दौरान मौजूद अधिकारियों ने ग्रामीणों की आपत्तियां दर्ज कीं। एडीएम भगीरथ साख ने कहा कि सभी सुझाव और आपत्तियां सरकार को भेजी जाएंगी तथा अंतिम निर्णय राज्य सरकार स्तर पर लिया जाएगा। इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण विभाग की अधिकारी सविता सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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