खारे पानी में झींगा पालन पर सरकार सख्त: अब फार्मों का रजिस्ट्रेशन जरूरी
चूरू समेत 4 जिलों के लिए SOP-2026 जारी, बिना ट्रीटमेंट गंदा पानी छोड़ने पर कार्रवाई होगी
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : राजस्थान में खारे पानी से झींगा पालन तेजी से बढ़ रहा है। खासकर चूरू जिले में 200 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर निजी स्तर पर झींगा फार्म संचालित हो रहे हैं। इसी को देखते हुए मत्स्य विभाग ने पहली बार झींगा पालन फार्मों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP-2026) जारी की है। अब सभी फार्मों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
मत्स्य विभाग के अनुसार यह गाइडलाइन चूरू, बीकानेर, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में लागू होगी। चूरू जिले को पहले ही “सेलाइन वाटर एक्वाकल्चर क्लस्टर” घोषित किया जा चुका है। विभाग का कहना है कि अब तक झींगा फार्मों का सही डेटा उपलब्ध नहीं था, इसलिए नई व्यवस्था लागू की गई है।

500 रुपए शुल्क, जिला मत्स्य अधिकारी को आवेदन
नई व्यवस्था के तहत फार्म संचालकों को जिला मत्स्य अधिकारी के पास आवेदन करना होगा। पंजीकरण शुल्क 500 रुपए तय किया गया है। विभाग ने साफ किया है कि बिना रजिस्ट्रेशन झींगा पालन नहीं किया जा सकेगा।
सिर्फ दो प्रजातियों की अनुमति
गाइडलाइन में केवल पीनियस वैनामी और पीनियस मेनोडोन प्रजाति के झींगा पालन की अनुमति दी गई है। नई प्रजाति के लिए सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।
एंटीबायोटिक और केमिकल पर रोक
विभाग ने झींगा पालन में एंटीबायोटिक और प्रतिबंधित रसायनों के उपयोग पर रोक लगा दी है। साथ ही बिना उपचारित गंदे पानी को खेतों या जल स्रोतों में छोड़ना प्रतिबंधित रहेगा।
रिकॉर्ड रखना होगा जरूरी
फार्म संचालकों को झींगा बीज, दवाइयों, आहार और उत्पादन का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। निरीक्षण के दौरान विभागीय अधिकारियों को रिकॉर्ड दिखाना अनिवार्य रहेगा। नियमों की अनदेखी होने पर पंजीकरण रद्द किया जा सकेगा।
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