हर्षोल्लास के साथ मनाया गया आचार्य प्रवर का 53 वां दीक्षा दिवस समारोह
युवा दिवस पर गुरूदेव से आशीर्वाद ग्रहण करने पहुंचे राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : गजराज शर्मा
लाडनूं : आचार्य श्री महाश्रमण के 53वें दीक्षा दिवस को “युवा दिवस” के रूप में जैन विश्व भारती परिसर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ की साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा जी के 5वें मनोनयन दिवस का आयोजन भी गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में वासुदेव देवनानी ने भी पहुंचकर आचार्य श्री के दर्शन कर आशीर्वाद ग्रहण किया।
साधुत्व को बताया सर्वोच्च संपदा
अपने प्रवचन में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि साधुत्व की संपदा भौतिक संपदा से कहीं अधिक ऊंची होती है। उन्होंने कहा कि सच्चा साधु वही है जो धर्म को अपने जीवन में उतारकर मन को पूर्ण रूप से नियंत्रित कर लेता है। उन्होंने अपने दीक्षा दिवस का स्मरण करते हुए बताया कि आचार्य तुलसी की प्रेरणा से उन्हें साधु दीक्षा प्राप्त हुई थी, जो जीवन का दुर्लभ अवसर होता है।

साधना में सावधानी और अनुशासन पर जोर
आचार्य श्री ने साधु जीवन में अनुशासन, सावधानी और शुद्ध भाव से साधना करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्रिया पूर्ण जागरूकता और भावना के साथ होनी चाहिए, तभी आत्मकल्याण संभव है।
भक्ति व सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
कार्यक्रम में साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा जी ने भी उद्बोधन दिया। वहीं अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष पवन मांडोत और महामंत्री सौरभ पटावरी ने श्रद्धाभिव्यक्ति व्यक्त की। अहमदाबाद परिषद द्वारा संगीतमय प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर डॉ. संगीता बैद ने अपनी पुस्तक “Read, Reflect and Rise” का लोकार्पण भी गुरुदेव के सानिध्य में किया।
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