ग्रामीणों का आरोप, पुलिस ने ‘घास’ को बताया ‘गांजा’:निर्दोषों पर दर्ज किया केस, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट घुसने रोका तो पूर्व विधायक हुए नाराज
ग्रामीणों का आरोप, पुलिस ने 'घास' को बताया 'गांजा':निर्दोषों पर दर्ज किया केस, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट घुसने रोका तो पूर्व विधायक हुए नाराज
झुंझुनूं : झुंझुनूं के ग्राम ढाका की ढाणी (ग्राम पंचायत टोंक छिलरी) में पुलिस थाना गोठड़ा द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई का विरोध शुरू हो गया है। पुलिस जिसे गांजे की खेती मान रही है, ग्रामीण उसे स्वतः उगने वाली घास बता रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर बुधवार को पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और महिलाओं ने जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी जब ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से केवल 5 लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति दी, लेकिन चौधरी सभी ग्रामीणों के साथ अंदर जाने पर अड़ गए। नाराजगी कर वे समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में दाखिल हुए। जब पुलिस ने एसपी चैंबर के बाहर उन्हें रोका, तो पूर्व विधायक ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस अपनी गलत कार्यशैली से सरकार की बदनामी करवा रही है।

यह है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार 26 अप्रैल 2026 को गोठड़ा थानाधिकारी और पुलिस जाब्ते ने ढाका की ढाणी में छापेमारी की थी। पुलिस ने रास्तों की सींव, गोचर भूमि और खेतों के किनारे खड़े ‘संदिग्ध’ पौधों को काटकर कट्टों में भरा। उस वक्त ग्रामीणों के पूछने पर पुलिस ने इसे सामान्य जांच बताया था।
लेकिन, 29 अप्रैल 2026 को जब समाचार पत्रों में खबर आई कि पुलिस ने यहां गांजे की फसल पकड़ी है और 4 लोगों के खिलाफ NDPS एक्ट में मामला दर्ज किया है, तो पूरे गांव में हड़कंप मच गया।


पुलिस ने ग्रामीणों को मुजरिम बना दिया। पुलिस ने मामराज पुत्र नोरंगराम, सुभाष पुत्र माधाराम, रामकुमार, और किशोर पुत्र मूलाराम के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
यह गांजा नहीं, खरपतवार है
जिला कलेक्टर और एसपी को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जिन पौधों को पुलिस ‘गांजा’ बता रही है, वे पूरे क्षेत्र की गोचर भूमि, श्मशान और बंजर रास्तों पर प्राकृतिक रूप से उगे हुए हैं। वे इन पौधों से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं और इन्हें नष्ट करने के लिए पहले भी दवाइयों का छिड़काव कर चुके हैं। इन पौधों का कभी कोई वाणिज्यिक (Commercial) उपयोग नहीं किया गया। पुलिस ने जानबूझकर ग्रामीणों को बदनाम करने और नाजायज रूप से फंसाने के लिए यह कार्रवाई की है।
पूर्व विधायक और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरी कार्रवाई की उच्च स्तरीय जांच की जाए और दर्ज किए गए मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्दोष ग्रामीणों को राहत नहीं मिली, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
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