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सरदार हरलाल सिंह की 44 वीं पुण्यतिथि पैतृक गांव हनुमानपुरा में मनाई गई


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सरदार हरलाल सिंह की 44 वीं पुण्यतिथि पैतृक गांव हनुमानपुरा में मनाई गई

सरदार हरलाल सिंह की 44 वीं पुण्यतिथि पैतृक गांव हनुमानपुरा में मनाई गई

झुंझुनूं : शेखावाटी के शेर कहे जाने वाले सरदार हरलाल सिंह की 44 वीं पुण्यतिथि शनिवार को उनके पैतृक गांव हनुमानपुरा स्थित स्मारक स्थल पर श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेश खादी वाला ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सरदारजी का योगदान सबसे अधिक महत्वपूर्ण रहा, जिसके कारण क्षेत्र के ग्रामीण लोग पढ़ाई कर आगे बढ़ पाए। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन के साथ-साथ समाज को जागरूक करने में भी सरदार हरलाल सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूर्व सरपंच हरफूल सिंह दूलड़ ने सरदार हरलाल सिंह के साथ रहने के दौरान अनेक स्मरणों की चर्चा करते हुए सामाजिक विकास में सरदार हरलाल सिंह के विशेष योगदान पर विस्तार से जानकारी दी।

राजस्थान अंबेडकर शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सुभाष सेवदा ने अपने संबोधन में कहा कि सरदारजी ने सभी जातियों को साथ लेकर चलने, छूआछूत व मृत्यु भोज जैसी कुरूतियां का त्याग भी वर्ष 1925 में करवा दिया था। इस तरह के महान लोग धरती पर सैकड़ों वर्षो में एक-दो ही पैदा होते है। इसके अलावा कार्यक्रम में पूर्व सरपंच फूलसिंह, प्रदीप, एडवोकेट विजयपाल दूलड़, शिशुपाल नारनोलिया, सुनील दूलड़, प्रशांत, मनोज, धर्मपाल, अशोक, सुबोध, सुरेश, रोहिताश, भूपेन्द्र, श्रीराम सहित अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, युवा एवं ग्रामीण जनों ने कार्यक्रम में भाग लेकर सरदार हरलाल सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए। अंत में मनीराम सेवदा ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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