मंड्रेला में धूमधाम से मनाया गया गणगौर का पावन पर्व, गुमान पार्क में मेले के साथ हुआ विसर्जन
मंड्रेला में धूमधाम से मनाया गया गणगौर का पावन पर्व, गुमान पार्क में मेले के साथ हुआ विसर्जन
मंड्रेला : क़स्बे में शनिवार को गणगौर का पर्व श्रद्धा, आस्था और परंपराओं के साथ धूमधाम से मनाया गया। कस्बे की हृदय स्थली श्री गुमान पार्क में भव्य मेले का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में महिलाओं और नवविवाहिताओं ने पहुंचकर गणगौर माता का विधिवत् पूजन किया और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विसर्जन किया। मेले में उत्साह, रंग-बिरंगे परिधान और लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। इस वर्ष गणगौर पर्व कई मायनों में विशेष होने के साथ-साथ भावुक भी रहा।
क़स्बे के प्रसिद्ध दौलत महल में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार हर साल ईसर-गणगौर विराजमान किए जाते थे, लेकिन इस बार क़स्बे के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सरपंच जितेन्द्र सिंह शेखावत के निधन के चलते पहली बार यह परंपरा बदली। दौलत महल में विराजमान होने के स्थान पर इस बार गढ़ के बाहर स्थित गेस्ट हाउस में ईसर-गणगौर को विराजमान किया गया, जहां महिलाओं ने श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। वहीं, 36 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद श्योलाल सिंह जी – जगत सिंह जी के गढ़ (पाना कान सिंह जी गढ़) द्वारा गणगौर की शाही सवारी धूमधाम से निकालने की तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। पूरे क़स्बे में इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर जबरदस्त उत्साह था, लेकिन शोक की परिस्थिति के चलते सर्वसम्मति से शाही सवारी का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।
हालांकि, गढ़ में नवविवाहिताओं और महिलाओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए ईसर – गणगौर को विराजमान किया गया, जहां पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न हुई। महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाते हुए गणगौर माता से सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की। रिटायर्ड कर्नल हेम सिंह शेखावत ने कहा कि गणगौर हमारे क्षेत्र की आस्था और संस्कृति का प्रमुख पर्व है। इस बार परिस्थितियां भले ही अलग रहीं, लेकिन लोगों ने परंपराओं को जीवित रखते हुए बहुत ही मर्यादित और श्रद्धापूर्ण तरीके से पर्व मनाया, जो हमारी सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
बाल राम श्रेणी संस्थापक शंकर शरण पोलीवाल ने कहा कि गणगौर पर्व महिलाओं की आस्था से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है। शाही सवारी भले ही रद्द करनी पड़ी, लेकिन जिस तरह से पूरे क़स्बे ने एकजुट होकर शोक के बीच भी परंपराओं का सम्मान किया, वह सराहनीय है। आने वाले समय में इस आयोजन को और भव्य रूप में किया जाएगा।
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