असमय बारिश व ओलावृष्टि से फसलों की तबाही:झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, मुख्य सचिव को लिखा पत्र, विशेष गिरदावरी और मुआवजे’ के लिए दिए कड़े निर्देश
असमय बारिश व ओलावृष्टि से फसलों की तबाही:झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, मुख्य सचिव को लिखा पत्र, विशेष गिरदावरी और मुआवजे' के लिए दिए कड़े निर्देश
झुंझुनूं : राजस्थान में पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में खड़ी और कटी पड़ी फसलों के नुकसान को देखते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झुंझुनूं के अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है।
खास बात यह है कि अध्यक्ष मील ने राजकीय अवकाश के दिन भी किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव को एक विशेष पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया है। प्रशासनिक शिथिलता पर जताई चिंता: मुख्य सचिव से हस्तक्षेप की मांग
अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद धरातल पर किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि फसल खराबे की सूचना देने, सर्वे करने और दावों के निस्तारण में हो रही देरी न केवल किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंच रहा है।
यदि समय रहते प्रशासन और बीमा कंपनियां सक्रिय नहीं होती हैं, तो उपभोक्ता आयोगों पर मुकदमों का बोझ बढ़ेगा। इसका सीधा खामियाजा पीड़ित किसानों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाकर भुगतना पड़ता है।
आयोग द्वारा सुझाए गए प्रमुख कदम
पत्र में अध्यक्ष ने राज्य सरकार से कुछ ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है, ताकि किसानों को ‘उपभोक्ता’ के रूप में उनके अधिकार मिल सकें। पीएम फसल बीमा योजना के तहत नुकसान के 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। आयोग ने निर्देश दिया कि ग्राम स्तर तक इसका व्यापक प्रचार किया जाए ताकि कोई भी किसान जानकारी के अभाव में दावे से वंचित न रहे।
राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों के आपसी समन्वय से तत्काल ‘विशेष गिरदावरी’ और क्षति सर्वे शुरू करवाया जाए।सर्वे में पारदर्शिता लाने के लिए जियो-टैग्ड फोटो (Geo-tagged photos) और मोबाइल ऐप का उपयोग अनिवार्य करने पर जोर दिया गया है। प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त हों, जो मुआवजा मिलने तक पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग करें।
कटी फसल के नुकसान पर भी फोकस
अध्यक्ष मील ने पत्र में विशेष रूप से उल्लेख किया कि ओलावृष्टि और बारिश ने उन फसलों को भी नुकसान पहुँचाया है जो कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी थीं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ऐसी ‘पोस्ट-हार्वेस्ट’ क्षति को भी बीमा दायरे में प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और दावों का निस्तारण समयबद्ध तरीके से किया जाए।
जवाबदेही होगी तय: विभागों और बीमा कंपनियों को चेतावनी
आयोग ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासनिक देरी के कारण किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिलता है और मामले उपभोक्ता आयोग तक पहुँचते हैं, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और बीमा कंपनियों की होगी। अध्यक्ष ने मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि वे जिला कलेक्टर्स को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करें ताकि किसानों को त्वरित राहत मिल सके और न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक मुकदमों का भार न बढ़े।
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19






Total views : 2068892


