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लापता अग्निवीर का शव नहीं मिला, अंतिम विदाई दी:मां ने रोते-रोते चढ़ाया पुष्पचक्र, पिता ने हाथ जोड़कर किया सैल्यूट; 14वीं राजपूताना राइफल्स ने दी सलामी


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लापता अग्निवीर का शव नहीं मिला, अंतिम विदाई दी:मां ने रोते-रोते चढ़ाया पुष्पचक्र, पिता ने हाथ जोड़कर किया सैल्यूट; 14वीं राजपूताना राइफल्स ने दी सलामी

लापता अग्निवीर का शव नहीं मिला, अंतिम विदाई दी:मां ने रोते-रोते चढ़ाया पुष्पचक्र, पिता ने हाथ जोड़कर किया सैल्यूट; 14वीं राजपूताना राइफल्स ने दी सलामी

सीकर : 7 महीने पहले उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बादल फटने से आई आपदा में सीकर के धोद इलाके के मांडोली गांव के अग्निवीर सैनिक हरित जाट का शव आज तक नहीं मिला, लेकिन शुक्रवार को उन्हें अंतिम विदाई दी गई। 14वीं राजपूताना राइफल्स की टुकड़ी ने सलामी दी। इससे पहले शाहपुरा से मांडोली तक करीब 5 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई।

हरित जाट दिसंबर 2024 में अग्निवीर पद पर भर्ती हुए थे। 5 अगस्त 2025 को जब उत्तरकाशी के धराली-हर्षिल क्षेत्र में बादल फटने से आपदा आई थी, उस समय हरित की ड्यूटी वहां पर थी।

इस दौरान पहाड़ खिसकने और मलबे की चपेट में आने से कई लोग लापता हो गए थे। लंबे सर्च ऑपरेशन के बावजूद हरित का आज तक शव नहीं मिला। ऐसे में नवंबर 2025 में उन्हें ‘अनुमानित मृत्यु’ घोषित कर दिया गया था।

सीकर में मांडोली गांव में स्थित हरित का मकान।
सीकर में मांडोली गांव में स्थित हरित का मकान।

शेर तो अकेले ही जाते हैं, तेरा बेटा शेर है मां

हरित की मां तारामणि ने बताया था- हरित छोटा बेटा था। मैं रोजाना उससे दो से तीन बार बात करती थी। जब उसने बताया था कि उसे उत्तराखंड भेजा जा रहा है, तो मैं डर गई थी। मैंने बेटे से पूछा था कि तुम्हारे साथ और लोग भी हैं क्या? तब हरित ने जवाब दिया था कि शेर तो अकेले ही जाते हैं, तेरा बेटा शेर है मां।

5 तारीख को ही आखिरी बार हरित की अपनी मां से बात हुई थी। तब उसने कहा था कि वह कोई एग्जाम देकर आया है। उसने दोबारा कॉल करने की बात कही थी, लेकिन वह बेटे का आखिरी कॉल था।

हरित के पिता विदेश में काम करते थे। लेकिन बेटे के लापता होने के बाद से वह घर पर ही है। परिवार में हरित इकलौता कमाने वाला लड़का था। परिवार की आर्थिक हालत भी ज्यादा ठीक नहीं है।

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