जगन्नाथपुरी और 12 ज्योतिर्लिंग की थीम पर सजा खाटूश्याम मंदिर:रींगस से खाटू तक 17 किलोमीटर लंबा पैदल कॉरिडोर बनाया; जानिए-भक्तों के लिए क्या इंतजाम
जगन्नाथपुरी और 12 ज्योतिर्लिंग की थीम पर सजा खाटूश्याम मंदिर:रींगस से खाटू तक 17 किलोमीटर लंबा पैदल कॉरिडोर बनाया; जानिए-भक्तों के लिए क्या इंतजाम
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : अशोक सिंह शेखावत
खाटूश्यामजी : सीकर जिले में स्थित बाबा खाटूश्यामजी का वार्षिक फाल्गुन मेला आज से शुरू हो गया है। बाबा के दर्शनों के लिए सुबह से भक्तों की भीड़ लगी हुई है। राजस्थान समेत दूसरे राज्यों से भी भक्त दर्शनों के लिए आए हैं। मंदिर परिसर को इस बार जगन्नाथपुरी और 12 ज्योतिर्लिंग की थीम पर विशेष सजावट की गई है। मंदिर के सिंह द्वार पर ज्योतिर्लिंग सजे हुए हैं। इसके साथ ही मंदिर में जगन्नाथपुरी की तर्ज पर लाल और सफेद कपड़े से बांधे गए हैं।
रींगस से खाटू तक 17 किलोमीटर लंबा विशेष पैदल कॉरिडोर तैयार किया गया है। यह मार्ग पूरी तरह वाहनों से मुक्त रहेगा। पूरे रास्ते में पानी, लाइट, शौचालय और विश्राम स्थल की व्यवस्था रहेगी। श्रीश्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि इस बार केवल 8 दिन मेला भरेगा। मेले के दौरान 24 घंटे बाबा श्याम के पट खुले रहेंगे।

भक्तों के लिए की गई व्यवस्था
1- दर्शन के लिए लगेंगी 14 लाइन
इस बार भी 14 लाइन: भक्तों को पिछले साल की तरह ही इस बार भी 14 लाइन से होकर बाबा की चौखट तक पहुंचना होगा। रींगस से खाटू तक कारपेट बिछाया गया है। खाटू पहुंचने के बाद बाबा के दर्शन के लिए 8 किलोमीटर का जिगजैग पार करना होगा।
रींगस रोड से आने वाले भक्तों के लिए ये व्यवस्था : रींगस रोड से आ रहे भक्तों को नगरपालिका के नजदीक मुख्य प्रवेश द्वार से होकर आना होगा। यहां से वे चारण मैदान पहुंचेंगे। चारण मैदान में टीन शेड से कवर अस्थाई जिगजैग बनाया गया है। इस जिगजैग से होते हुए श्रद्धालु लखदातार मैदान में पहुंचेंगे।
दांतारामगढ़ रोड से आने वाले भक्तों के लिए : लाला मांगीराम धर्मशाला के पास से जिगजैग में प्रवेश कर लखदातार मेला ग्राउंड तक और उसके बाद यहां से भक्त 75 फीट के मुख्य मेला ग्राउंड की 14 सीधी लाइनों में प्रवेश करेंगे।
इस तरह रींगस रोड से बाबा के दर तक आने में करीब 5 घंटे से ज्यादा का समय लग जाएगा। भीड़ नहीं होने पर 4 लाइनों से ही दर्शनों के लिए भेजा जाएगा। रींगस से खाटू तक 17 किलोमीटर लंबा विशेष पैदल कॉरिडोर तैयार किया गया है। यह मार्ग पूरी तरह वाहनों से मुक्त रहेगा। पूरे रास्ते में पानी, लाइट, शौचालय और विश्राम स्थल की व्यवस्था रहेगी।
एग्जिट पॉइंट बनाए गए : मेला प्रभारी व एसडीएम मोनिका सामोर ने बताया- दर्शन की सीधी 11 लाइनों में प्रवेश करने वालों के लिए इस बार 2 एग्जिट पॉइंट बनाए गए हैं। सरकारी प्रोटोकॉल वाले वीआईपी को छोड़कर सभी के लिए VIP दर्शन व्यवस्था पूरी तरह बंद रहेगी।
दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए दर्शनों की अलग से व्यवस्था की गई है। मुख्य मंदिर से करीब 250 मीटर की दूरी पर लाला मांगेराम धर्मशाला के पास ही एक अलग लाइन बनाई गई है। व्हील चेयर पर दिव्यांगों को इसी लाइन से मंदिर तक दर्शन करवाने के लिए ले जा सकेंगे। इसके अलावा भीड़ नियंत्रित करने की विशेष परिस्थितियों के लिए 16 आपातकालीन गेट तैयार किए गए हैं।
छोटे और बड़े वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग : श्रद्धालुओं के लिए मंदिर तक का रास्ता वन-वे रहेगा। सीकर-रींगस रोड पर मंढा मोड के आस-पास छोटे वाहनों के लिए 4 बड़ी और 2 छोटी पार्किंग व्यवस्था की गई है। बस से आने वाले श्रद्धालुओं को 52 बीघा पार्किंग तक ले जाया जाएगा। यहां से मंदिर में दर्शन करने के लिए श्रद्धालु पैदल ही जाएंगे।
चार बड़े पार्किंग स्थल, अलग-अलग रंग में होंगे : चार बड़े पार्किंग स्थल विकसित किए गए हैं। इन सभी पार्किंग स्थलों के लिए QR कोड और रंगीन पहचान चिह्न लगाए गए हैं। 52 बीघा (पीला), सांवलपुरा (हरा), लामिया रोड (नीला), दातारामगढ़ (गुलाबी)।
मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इंतजाम
22 सेक्टर और 350 सब-सेक्टर में सुरक्षा कवच : मेले को 22 मुख्य सेक्टर और 350 सब-सेक्टर में बांटा गया है। करीब 5 हजार से ज्यादा पुलिस अधिकारी और जवान तैनात हैं। प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग, अस्थायी चौकियां और अतिरिक्त बल की व्यवस्था की गई है। पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों से कंट्रोल रूम के माध्यम से रीयल-टाइम निगरानी होगी।
44 एलईडी स्क्रीन और QR कोड सुविधा : मंदिर परिसर और प्रवेश द्वारों पर 44 डिजिटल एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। इन पर दर्शन की प्रतीक्षा अवधि, पार्किंग स्थिति, सुरक्षा निर्देश, मौसम अलर्ट और आपात नंबर प्रदर्शित होंगे। QR कोड आधारित मार्गदर्शन प्रणाली से श्रद्धालुओं को आसान नेविगेशन मिलेगा। मेला परिसर में 12 पुलिस सहायता बूथ स्थापित किए गए हैं, जो लैंडलाइन और वायरलेस सुविधा से जुड़े रहेंगे। यहां गुमशुदा व्यक्ति या सामान से संबंधित जानकारी और जल्द सहायता मिलेगी।
ज्यादा भीड़ हुई तो? यदि मेले के दौरान भीड़ का दबाव बढ़ता है तो इसे कम करने के लिए अतिरिक्त जिगजैग मार्ग, फुट ब्रिज और 40 बीघा का नया होल्डिंग एरिया विकसित किया गया है, जहां जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित रोका जाएगा।
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