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माहे रमजान इबादत का बेहतरीन महीना है और इंसानियत का पैगाम देता है


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माहे रमजान इबादत का बेहतरीन महीना है और इंसानियत का पैगाम देता है

माहे रमजान की दि मुबारकबाद *शहर इमाम सैयद मोहम्मद अनवार नदीम -उल - कादरी

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : जिला मुख्यालय से शहर इमाम सैयद मोहम्मद अनवार नदीम-उल-कादरी ने माहे रमजान की मुबारकबाद देते हुए कहा कि रमजान रहमतों और बरकतों का महीना है। रोजा एक ऐसी इबादत है, जो इंसान को अच्छे अखलाक, सब्र, तक़वा और हमदर्दी की तालीम देती है।

उन्होंने कहा कि रोजेदार को दूसरों की भूख-प्यास का एहसास होता है और वह जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे बढ़ता है। रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। नफ्ल का सवाब फर्ज के बराबर और एक फर्ज का सवाब 70 फर्ज के बराबर मिलता है। यह महीना ईमान और अखलाक को मजबूत करने का जरिया है तथा भाईचारे और सद्भाव का संदेश देता है।

शहर इमाम ने कहा कि शरीअत-ए-इस्लाम नमाज की पाबंदी के साथ नेक अमल और नेक इंसान बनने की हिदायत देती है। जकात हर मालिक-ए-निसाब पर फर्ज है और यह गरीबों का हक है। कुरान-ए-करीम में ईमान के बाद नमाज और जकात का जिक्र साथ-साथ आया है। जकात माली इबादत है, जो दिल और रूह को पाक करती है और समाज से गुरबत मिटाने का मजबूत जरिया है। उन्होंने अपील की कि सभी साहिब-ए-निसाब लोग जकात अदा करें।

इफ्तार में खजूर की अहमियत बताते हुए उन्होंने कहा कि रोजा खोलते समय 2 से 3 खजूर से शुरुआत करना सुन्नत है। दिनभर के उपवास के बाद सीधे भारी भोजन करने से पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है, जबकि खजूर पाचन तंत्र को सक्रिय कर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है। इसमें विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि मधुमेह (शुगर) के मरीजों को खजूर का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। चिकित्सकों के अनुसार शुगर मरीज एक खजूर तक ही सेवन करें और डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

अंत में उन्होंने कहा कि रमजान का महीना इबादत, आत्मशुद्धि और इंसानियत की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। यह महीना हमें सब्र, सेवा और भाईचारे का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि रमजान भाईचारे, सद्भाव और इंसानियत का पैगाम देता है। यह महीना हमें नमाज की पाबंदी, नेक अमल और जरूरतमंदों की सहायता के लिए प्रेरित करता है।

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