नवीन जिलों के गठन से पदोन्नति पर संकट, शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग
वरिष्ठता निर्धारण को लेकर बढ़ी चिंता, डीपीसी में पात्रता प्रभावित होने की आशंका
सीकर : राज्य में नवगठित जिलों के कारण शिक्षा विभाग में वरिष्ठता एवं पदोन्नति को लेकर उत्पन्न विसंगतियों पर राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, शिक्षा मंत्री मदन लाल दिलावर तथा शिक्षा सचिव को पत्र प्रेषित कर शीघ्र समाधान की गुहार लगाई है।
संघ के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि नए जिलों के गठन से प्रशासनिक विकेंद्रीकरण तो हुआ है, लेकिन शिक्षा विभाग जैसे बड़े कैडर में हजारों शिक्षकों एवं कर्मचारियों की वरिष्ठता को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। बड़ी संख्या में कार्मिकों को पुराने जिलों से नवगठित जिलों में पदस्थापित किया जा रहा है, जिससे वरिष्ठता निर्धारण एवं विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) में पात्रता प्रभावित होने की आशंका है।
प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने कहा कि मंडल एवं जिला स्तर पर तैयार होने वाली वरिष्ठता सूचियों का सीधा असर पदोन्नति प्रक्रिया पर पड़ता है। यदि पूर्व सेवा अवधि को नजरअंदाज कर नई नियुक्ति के आधार पर वरिष्ठता तय की गई, तो वर्षों से कार्यरत शिक्षक पदोन्नति से वंचित हो सकते हैं।
संघ ने मांग की है कि शिक्षकों की वरिष्ठता उनके मूल नियुक्ति दिनांक के आधार पर यथावत रखी जाए तथा आगामी डीपीसी में पुराने कैडर के अनुसार ही पात्रता सुनिश्चित की जाए। साथ ही नवगठित जिलों में पदस्थापन के लिए पारदर्शी ‘ऑप्शन प्रक्रिया’ लागू करने की भी मांग की गई है।
प्रदेश सभाध्यक्ष संपत सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से शिक्षकों को राहत मिलेगी और किसी भी कार्मिक के साथ पदोन्नति के मामले में अन्याय नहीं होगा।
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