शेखावाटी की ‘जीवनरेखा’ फिर उलझी दावों में:2021 की DPR और 2026 बजट, 32 हजार करोड़ की परियोजना अटकी
शेखावाटी की ‘जीवनरेखा’ फिर उलझी दावों में:2021 की DPR और 2026 बजट, 32 हजार करोड़ की परियोजना अटकी
झुंझुनूं : शेखावाटी क्षेत्र को यमुना जल पहुंचाने की बहुप्रतीक्षित योजना एक बार फिर घोषणाओं और दावों के बीच उलझती नजर आ रही है। यमुना जल संघर्ष समिति के संयोजक यशवर्धन सिंह ने कहा कि 2026 के बजट में की गई घोषणा नई नहीं बल्कि पुरानी फाइलों का नया आवरण है और लाखों लोगों के भविष्य को लेकर स्पष्ट रोडमैप अब तक सामने नहीं आया है।

पांच साल पुराने आंकड़ों पर सवाल
समिति के अनुसार लगभग 32 हजार करोड़ रुपए की जिस परियोजना को नई पहल बताया जा रहा है, उसकी प्रक्रिया 12 जनवरी 2021 को ही शुरू हो चुकी थी, जब तत्कालीन सरकार ने केंद्रीय जल आयोग को डीपीआर भेजी थी। उस डीपीआर में ताजेवाला (हथनीकुंड) हेडवर्क्स से राजगढ़-झुंझुनूं तक पाइपलाइन की अनुमानित लागत 31,366.86 करोड़ रुपए बताई गई थी। 2026 के बजट में फिर लगभग वही लागत घोषित होने से समिति का आरोप है कि पांच साल में जमीन पर कोई ठोस तकनीकी या वित्तीय प्रगति नहीं हुई।
फाइलों में अटकी रही योजना
यशवर्धन सिंह ने सवाल उठाया कि यदि 2021 में तकनीकी मूल्यांकन हो चुका था तो फाइलें दो साल तक क्यों अटकी रहीं। क्या तकनीकी कमी थी या फिर सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक गणित के कारण शेखावाटी की जनता को इंतजार कराया गया। समिति का कहना है कि पारदर्शिता के अभाव में लोगों को केवल तारीखें मिल रही हैं, काम नहीं।
MOU के बाद भी नहीं आई नई DPR
परियोजना के इतिहास में 17 फरवरी 2024 को राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए समझौते को अहम माना गया था। तय हुआ था कि चार महीने में यानी 17 जून 2024 तक नई डीपीआर तैयार हो जाएगी, लेकिन फरवरी 2026 तक भी इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। समिति ने पूछा कि डीपीआर बनी है तो जारी क्यों नहीं की गई और यदि नहीं बनी तो देरी के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
सरकार से मांगा श्वेतपत्र और डेडलाइन
संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि 2021 की मूल डीपीआर और केंद्रीय जल आयोग की टिप्पणियां सार्वजनिक की जाएं, 2024 के समझौते के बाद हुई प्रगति पर श्वेतपत्र जारी किया जाए और परियोजना शुरू होने व पानी राजगढ़-झुंझुनूं पहुंचने की स्पष्ट समयसीमा घोषित की जाए।
यशवर्धन सिंह ने कहा कि यह किसी दल की राजनीति नहीं बल्कि शेखावाटी के अस्तित्व का प्रश्न है। लोगों को श्रेय की लड़ाई नहीं बल्कि पानी चाहिए और जब तक ठोस योजना सामने नहीं आती, संघर्ष जारी रहेगा।
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