जैन धर्म जीवन जीने की कला, अहिंसा का संदेश पूरे विश्व के लिए प्रभावी – मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
लाडनूं में जैन विश्व भारती स्थित ‘सुधर्मा सभा’ का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
लाडनूं : जैन समुदाय के आचार्यश्री महाश्रमण के लाडनूं पदार्पण के अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लाडनूं नगर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जैन विश्व भारती स्थित प्रवचन पांडाल ‘सुधर्मा सभा’ का लोकार्पण किया तथा विशाल जैन समारोह को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि जैन धर्म जीवन जीने की कला है, जिसमें पांच महाव्रतों का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि अहिंसा का संदेश आज पूरे विश्व के लिए सबसे अधिक प्रभावी और प्रासंगिक है, जो मानव मात्र को सही दिशा प्रदान करता है। जैन धर्म प्रकृति के साथ समन्वय बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री ने आचार्यश्री महाश्रमण के लाडनूं आगमन को पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री समाज को दिशा देने वाले संत हैं, जो युवाओं को संस्कृति, संस्कार और जागरण का मार्ग दिखाते हैं। उनका पूरा जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने जैन धर्म की प्राचीन परंपराओं को आधुनिकता से जोड़कर समाज को नई दिशा दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय ने धर्म, शिक्षा और संस्कारों को व्यवहारिक रूप देने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। उन्होंने अपने पूर्व प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर है, जो हर व्यक्ति को नई प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री शर्मा ने राजस्थान को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विशेषताओं की भूमि बताते हुए कहा कि यहां की जनता धर्म के मार्ग पर चलकर जीवन को पवित्र बनाएगी। उन्होंने देश को विश्वगुरु बताते हुए कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि इस विचार को और मजबूत करें और दुनिया को मार्गदर्शन देने का कार्य करें।
आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार का लोकार्पण
जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय के नवीनीकरण के तहत नवनिर्मित विशाल एवं भव्य मुख्य प्रवेश द्वार का लोकार्पण आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में किया गया। आचार्यश्री ने धवल सेना के साथ प्रवेश द्वार से विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश कर शुभारंभ किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने फीता खोलकर द्वार को समर्पित किया। कार्यक्रम में प्रो. युवराज सिंह खंगारोत एवं प्रो. बी.एल. जैन भी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के विद्यार्थी एवं स्टाफ सदस्यों ने आचार्यश्री महाश्रमण का स्वागत किया।
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