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‘ट्रांसफर के नाम पर विधवा-दिव्यांग कर्मचारियों को दूर भेज रहे’:झुंझुनूं में RAKMA ने जताई आपत्ति, कलेक्टर को सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन


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‘ट्रांसफर के नाम पर विधवा-दिव्यांग कर्मचारियों को दूर भेज रहे’:झुंझुनूं में RAKMA ने जताई आपत्ति, कलेक्टर को सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

'ट्रांसफर के नाम पर विधवा-दिव्यांग कर्मचारियों को दूर भेज रहे':झुंझुनूं में RAKMA ने जताई आपत्ति, कलेक्टर को सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

झुंझुनूं : राजस्थान में हाल ही में जारी हुई स्थानांतरण सूचियों को लेकर राजस्थान अधिकारी कर्मचारी माइनॉरिटी एसोसिएशन (RAKMA) की झुंझुनूं इकाई ने राज्य सरकार से अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों को दूरस्थ स्थान पर स्थानांतरण करने के संबंध में संगठन ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

RAKMA के जिला अध्यक्ष डॉ. नदीम अख्तर के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश भर से मिल रहे फीडबैक और स्थानांतरण सूचियों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हो रहा है कि अल्पसंख्यक वर्ग के कार्मिकों को ‘प्रशासनिक आधार’ बताकर बिना किसी ठोस कारण या शिकायत के उनके वर्तमान पदस्थापन से काफी दूर भेज दिया गया है।

विधवा और परित्यक्ता महिला कर्मचारी: जिन्हें उनके सुरक्षित परिवेश से दूर भेज दिया गया है।

दिव्यांग कार्मिक: जिनके लिए दूरदराज के क्षेत्रों में सेवा देना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

पुरस्कृत अधिकारी: राज्य स्तर पर सम्मानित अधिकारियों को भी काफी दूर स्थानांतरित किया गया है।

पति-पत्नी नीति: राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी को एक ही स्थान पर रखने की नीति का भी उल्लंघन देखा गया है।

“प्रशासनिक फेरबदल के नाम पर विशेष वर्ग के प्रति यह रुख चिंताजनक है। इससे कर्मचारियों का मनोबल गिरता है, साथ ही राजकार्यों में बाधा भी होती है”

डॉ. नदीम अख्तर, जिला अध्यक्ष, RAKMA (झुंझुनूं)

संगठन की प्रमुख मांगें

जिन कार्मिकों का स्थानांतरण किया गया है, उनकी शिकायतों (परिवेदनाओं) पर गंभीरता से विचार किया जाए तथा किए गए स्थानांतरणों को तुरंत निरस्त या संशोधित किया जाए।

भविष्य में होने वाली पदोन्नतियों और पदस्थापनों में अल्पसंख्यक वर्ग के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।

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