UGC मामले में राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ खोला मोर्चा:वक्ता बोले- समाज को ‘खलनायक’ के रूप में किया पेश; सवर्ण अधिकार मंच का गठन
UGC मामले में राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ खोला मोर्चा:वक्ता बोले- समाज को ‘खलनायक’ के रूप में किया पेश; सवर्ण अधिकार मंच का गठन
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : नैना शेखावत
सीकर : सीकर में यूजीसी (UGC) से जुड़े मामले को लेकर सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर सवर्ण समाज के लोगों ने राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखी नाराजगी जताई है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि यूजीसी प्रकरण की आड़ में समाज को जानबूझकर ‘खलनायक’ के रूप में पेश किया गया है।
इसी के विरोध में सवर्ण अधिकार मंच के गठन का ऐलान किया गया, जिसके जरिए अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लड़ने की बात कही गई। UGC के नए नियमों के लागू होने पर किसी पॉलिटिकल पार्टी का समर्थन नहीं मिलने से सवर्ण समाज में रोष है। इसे लेकर सवर्ण समाज की ओर से UGC नोटिफिकेशन के खिलाफ सामूहिक आंदोलन का ऐलान भी किया गया है। ब्राह्मण, राजपूत, महाजन, कायस्थ और जैन समाज के डेलीगेट्स ने शनिवार को प्रेस वार्ता कर सवर्ण अधिकार मंच के गठन की घोषणा की।
सवर्ण समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए एक सशक्त मंच बनेगा
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि UGC के नए नोटिफिकेशन में सवर्ण समाज को एकतरफा रूप से ‘खलनायक’ के रूप में पेश किया गया है, जो संविधान में मिले समानता के अधिकार के खिलाफ है। इसी अन्याय के खिलाफ सवर्ण समाज की संगठित, सामूहिक और राष्ट्रीय स्तर की आवाज को मजबूती देने के लिए सवर्ण अधिकार मंच का गठन किया गया है, जो आने वाले समय में सवर्ण समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए एक सशक्त मंच बनेगा।
स्टूडेंट ही समझ सकते हैं यूनिवर्सिटी का असली वातावरण
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष और विप्र सेना राष्ट्रीय संगठन महामंत्री महेश शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से हमारी मांग है कि UGC की समिति से राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को हटाकर न्यायाधीशों, यूनिवर्सिटी और कॉलेज कैंपस में स्टूडेंट्स यूनियन के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। यूनिवर्सिटी में वास्तविक वातावरण और भेदभाव की स्थिति को वही समझ सकते हैं जो प्रत्यक्ष रूप से वहां पढ़ रहे हैं, वोट की राजनीति करने वाले राजनेता नहीं।
भेदभाव करने वालों को किया जाना चाहिए दंडित
सवर्ण अधिकार मंच के संरक्षक अशोक माथुर ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार देता है, फिर ऐसे अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण कानूनों की कोई जरूरत नहीं है। यदि कहीं भेदभाव होता है तो भेदभाव करने वालों को दंडित किया जाना चाहिए। किसी एक व्यक्ति की गलती से पूरे समाज को गलत साबित नहीं किया जा सकता।
सवर्ण समाज ने सदैव ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से किया त्याग-समर्पण
संरक्षक अरुण फागलवा ने कहा कि सवर्ण समाज ने सदैव ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से त्याग और समर्पण किया है, लेकिन इस प्रकार के अन्यायपूर्ण कानूनों के प्रति अब समाज को सजग, संगठित और सतर्क होने की जरूरत है।
सवर्ण समाज के बच्चों के साथ क्यों किया अन्याय ?
संरक्षक शशि दीवान ने कहा कि UGC जैसा कानून लागू करने की प्रक्रिया में जो सवर्ण समाज से जुड़े लोग शामिल हैं, उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ यह अन्याय क्यों होने दिया?
सवर्ण समाज ने हमेशा संविधान, कानून और राष्ट्रहित में रखा विश्वास
अधिकार मंच के संरक्षक सुरेश अग्रवाल और प्रवक्ता सुरजभान सिंह चैनपुरा ने कहा कि UGC का नया नोटिफिकेशन समाज को आपस में बांटने का काम करेगा। इससे शिक्षा का वातावरण सुधारने के बजाय भय और अविश्वास का माहौल बनेगा। सवर्ण समाज ने हमेशा संविधान, कानून और राष्ट्रहित में विश्वास रखा है, लेकिन जब कानून ही किसी एक वर्ग को पूर्वाग्रह के आधार पर दोषी ठहराने लगे तो उसके खिलाफ शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संगठित संघर्ष किया जाएगा।
सवर्ण समाज ने भाजपा को अपना हितैषी मानकर तन-मन-धन से किया सहयोग
लड्डूदास महाराज ने कहा कि सवर्ण समाज ने भाजपा को अपना हितैषी मानकर तन-मन-धन से सहयोग किया, लेकिन इस अन्यायपूर्ण निर्णय ने सवर्ण समाज को भविष्य में भाजपा को वोट देने से पहले सोचने पर मजबूर कर दिया है।
प्रेस वार्ता में पंडित लोकनाथ, सुदर्शन सिंह, राजनारायण माथुर, उमेश माथुर, गौरव दीक्षित, सुरेश पारीक, सुरेंद्र माथुर, रजनीश माथुर, उमेश माथुर, सुमिलदत्त शर्मा, नरेंद्र सिंह देवगढ़, चंदन सिंह शेखावत, सुशील माटोलिया, ओम पटवारी पिपराली समेत सवर्ण समाज के कई लोग मौजूद रहेे।
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