[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

1965 के शहीद की वीरांगना बोली-पति को सम्मान कब मिलेगा?:प्रतिमा लगाने से रोक रहा प्रशासन; कलेक्टर को सौंपा पत्र


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

1965 के शहीद की वीरांगना बोली-पति को सम्मान कब मिलेगा?:प्रतिमा लगाने से रोक रहा प्रशासन; कलेक्टर को सौंपा पत्र

1965 के शहीद की वीरांगना बोली-पति को सम्मान कब मिलेगा?:प्रतिमा लगाने से रोक रहा प्रशासन; कलेक्टर को सौंपा पत्र

झुंझुनूं : 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश के लिए वीरगति को प्राप्त हुए शहीद फेज मोहम्मद की वीरांगना जेतुन बानो को अब उनकी प्रतिमा लगवाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा हैं। वीरांगना का कहना है कि ससुर की खरीदी हुई जमीन पर पति की प्रतिमा लगवाना चाहती हूं, लेकिन ग्राम विकास अधिकारी और प्रशासक ने ऐसा करने से मना कर दिया है।

वीरांगना शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंची और कलेक्टर ऑफिस में प्रार्थना पत्र सौंपा, जिसमें गुहार लगाई कि पति की प्रतिमा को लगाने की अनुमति दी जाए। मामला ग्राम पंचायत बामणवास (सूरजगढ़) का है। वीरांगना का आरोप है कि पंचायत प्रशासन द्वारा न केवल उन्हें रोका गया, बल्कि वीरांगना को बेदखली की धमकी भी दी गई है।

‘अपनी जमीन पर शहीद की प्रतिमा लगवाना चाहती हूं’

वीरांगना जेतुन बानो का कहना है- जिस जमीन के भूखंड पर वे अपने शहीद पति की प्रतिमा लगवाना चाहती हैं, वह उनके ससुर गौस मोहम्मद ने 30 जनवरी 1947 को खरीदा था। इस जमीन के पुख्ता दस्तावेज, उप-पंजीयक की सील लगे विक्रय पत्र और ग्राम पंचायत अरड़ावता के तत्कालीन सरपंच द्वारा तस्दीक किया हुआ नक्शा भी उनके पास मौजूद है। इसके बावजूद ग्राम पंचायत बामणवास के प्रशासन ने इसे अवैध बताते हुए निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए हैं।

वीरांगना ने जिला कलेक्टर को सौंपे पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र के अनुसार- जब उन्होंने अपने निजी स्वामित्व वाली जमीन पर प्रतिमा के लिए पत्थर डलवाए, तो ग्राम विकास अधिकारी और प्रशासक ने उन्हें नोटिस (क्रमांक 152/2025 और 156/2025-26) थमा दिए। आरोप है कि स्थानीय राजनीतिज्ञों के दबाव और व्यक्तिगत रंजिश के चलते प्रशासन उन्हें अपनी ही जमीन से बलपूर्वक बेदखल करने की धमकी दे रहा है।

पति देश के लिए शहीद हुए, फिर भी सुनवाई नहीं

वीरांगना जेतुन बानो का कहना है कि उनकी उम्र करीब 80 साल से ज्यादा है। पति जंग में लड़ते हुए देश के लिए शहीद हुए, इसके बाद भी प्रशासन उनकी सुनवाई नहीं कर रहा है। मेरे पति ने 1965 में देश के लिए जान दी। आज मैं अपनी ही जमीन पर उनकी याद में एक स्मारक बनाना चाहती हूं, जिससे आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा ले सकें। लेकिन प्रशासन मुझे अपराधी की तरह देख रहा है। क्या एक शहीद की पत्नी को अपने पति के सम्मान के लिए भी सरकारी दफ्तरों की ठोकरें खानी पड़ेंगी।

पत्र पर कलेक्टर ने संज्ञान लिया, जांच के निर्देश

मामले में जिला कलेक्टर ने प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लिया है। संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर जांच करने और नियमानुसार प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वीरांगना के पक्ष को पूरा मौका दिया जाए और सुनवाई की जाए।

Related Articles

Mantratoto luwakpoker aladin66 tupaiwin rupiah89 kios77 TOKO22 situs raffi ahmad