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उदयपुरवाटी में वन विभाग ने विवादित जमीन से अतिक्रमण हटाया:दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे, नीमकाजोहड़ा गांव का मामला


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उदयपुरवाटी में वन विभाग ने विवादित जमीन से अतिक्रमण हटाया:दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे, नीमकाजोहड़ा गांव का मामला

उदयपुरवाटी में वन विभाग ने विवादित जमीन से अतिक्रमण हटाया:दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे, नीमकाजोहड़ा गांव का मामला

उदयपुरवाटी : उदयपुरवाटी के नीमकाथाना स्टेट हाइवे के पास राजस्व गांव नीमकाजोहड़ा में वन विभाग ने एक विवादित जमीन से अतिक्रमण हटाया है। इस कार्रवाई के बाद वन विभाग के अधिकारी और मंदिर के पुजारी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

प्रोटेस्ट श्रेणी की वन भूमि

जानकारी के अनुसार, रेंजर धर्मवीर मील के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने नीमकाजोहड़ा स्थित विवादित जमीन से तारबंदी तोड़कर अतिक्रमण हटाया। वन विभाग का दावा है कि यह जमीन खसरा नंबर 115 पर स्थित है, जो प्रोटेस्ट श्रेणी की वन भूमि है।

पेड़ काटने का आरोप, मामला दर्ज

वन अधिकारियों के मुताबिक, इस जमीन पर अतिक्रमण के लिए पेड़ काटे गए और वन भूमि को खुर्द-बुर्द कर समतलीकरण किया गया। इस मामले में रामजीदास पुत्र भगवान दास के खिलाफ राजस्थान वन अधिनियम 1953 की धारा 30, 32 और 33 के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई है। रेंजर ने बताया कि मंदिर के पुजारी रामजीदास ने तीन दिन के भीतर हरे पेड़ काटकर वन भूमि पर तारबंदी कर अतिक्रमण किया था।

वन अधिकारियों पर भी नुकसान करने के आरोप

दूसरी ओर, पुजारी रामजीदास का कहना है कि जिस जमीन पर वन विभाग ने कार्रवाई की है उस पर न्यायालय का स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) चल रहा है। उन्होंने बताया कि यह जमीन फिलहाल राजस्व अधिकारियों की रिसीवरी में है और एक साल के लिए पालाराम सैनी को कृषि के लिए दी गई है। पुजारी ने आरोप लगाया कि वन अधिकारियों ने न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद राजनीति से प्रेरित होकर किसान का नुकसान किया है।

रेंजर धर्मवीर मील ने बताया, “नीमकाजोहड़ा में तीन दिन से वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण हो रहा था। सूचना मिलने पर विभाग की टीम बनाकर मौके पर पुजारी रामजीदास के खिलाफ कार्रवाई की गई। अतिक्रमण हटाकर करोड़ों रुपए मूल्य की सरकारी जमीन को बचाया गया है।”

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