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जालोर में हथिनी के मौत के बाद हुआ विवाद:5 KM दूर करना पड़ा अंतिम संस्कार, कोर्ट में विचाराधीन है जमीन का मामला


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जालोर में हथिनी के मौत के बाद हुआ विवाद:5 KM दूर करना पड़ा अंतिम संस्कार, कोर्ट में विचाराधीन है जमीन का मामला

जालोर में हथिनी के मौत के बाद हुआ विवाद:5 KM दूर करना पड़ा अंतिम संस्कार, कोर्ट में विचाराधीन है जमीन का मामला

जालोर : जालोर में बुधवार सुबह मोनू नाम की हथिनी की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हो गया। पोस्टमॉर्टम के दौरान करीब 4 घंटे चलते विवाद के बाद हथिनी के शव को सिरेमंदिर वन विभाग के क्षेत्र में ले जाया गया और अंतिम संस्कार किया गया।

दरअसल, हथिनी के मरने की सूचना पर गुरुवार को डीएफओ जयदेव सियाग टीम सहित मौके पर पहुंचे और मौत के कारणों की जांच के लिए पशु चिकित्सा टीम से पोस्टमॉर्टम करवाने की प्रक्रिया शुरू करवाई। इससे पहले हथिनी के सेवक और उसके परिवार की ओर से अंतिम संस्कार को लेकर गुलाल व पुष्प मालाओं से शृंगार किया गया।

सेवक और परिवार ने भावुक होकर हथिनी के आखिरी दर्शन किए।
सेवक और परिवार ने भावुक होकर हथिनी के आखिरी दर्शन किए।

सेवक का परिवार हुआ भावुक

इस दौरान सेवक का पूरा परिवार भावुक हो गया और हथिनी के आखिरी दर्शन किए। उसके बाद वन विभाग ने पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू करवाई। इसी दौरान जमीनी विवाद को लेकर दूसरा पक्ष मौके पर पहुंचा। विवाद की स्थिति को देखते हुए तहसीलदार रणवीरसिंह और नगर परिषद के कार्मिक मौके पर पहुंचे। यहां दोनों पक्षों के दस्तावेज देखे गए और मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण हथिनी को वन विभाग की जमीन पर गाड़ने का निर्णय किया गया।

हाइड्रा क्रेन की सहायता से हथिनी के शव को उठाकर डंपर में डाला गया।
हाइड्रा क्रेन की सहायता से हथिनी के शव को उठाकर डंपर में डाला गया।

जमीनी विवाद: पोस्टमॉर्टम के बाद शव हटाना पड़ा

हथिनी के सेवक का परिवार शनिधाम मंदिर के पास की जमीन पर अस्थाई निवास कर रहा था और उसी जगह पर उसकी मौत हुई। ऐसे में उसके अंतिम संस्कार के लिए शनिधाम के पास पड़े खाली प्लॉट को चिह्नित किया। इसको लेकर प्लॉट मालिक ने भी सहमति दी। जब इसकी जानकारी आस-पास के प्लॉट मालिकों को मिली तो वे इस कार्य को रुकवाने मौके पर पहुंच गए और तहसीलदार को जमीन विवाद की स्थिति और मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के दस्तावेज पेश किए। हालांकि इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों से समझाइश की कोशिश भी की और बताया कि हथिनी के पोस्टमॉर्टम के लिए उसके शव के चीरा लगाया गया है और ऐसी स्थिति में दूसरी जगह ले जाना सही नहीं रहेगा और शव बिखर जाएगा, लेकिन दूसरा पक्ष इसके लिए नहीं माना।

शनिधान के पास खाली प्लॉट पर हथिनी के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हुआ तो रेंजर भागीरथ सिंह और प्रशासनिक अधिकारियों ने समझाइश की कोशिश भी भी, लेकिन दूसरा पक्ष नहीं माना।
शनिधान के पास खाली प्लॉट पर हथिनी के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हुआ तो रेंजर भागीरथ सिंह और प्रशासनिक अधिकारियों ने समझाइश की कोशिश भी भी, लेकिन दूसरा पक्ष नहीं माना।

सिरेमंदिर फोरेस्ट एरिया में किया अंतिम संस्कार

विवाद नहीं सुलझने पर शाम 6 बजे वन विभाग ने शीतला माता मेला स्थल के पास वन विभाग की जमीन पर अंतिम संस्कार का निर्णय किया। इसको लेकर मौके पर हाइड्रा क्रेन की सहायता से हथिनी के शव को उठाकर डंपर में डाला गया। वहीं पोस्टमॉर्टम के लिए लगाए गए चीरे के कारण शव क्षत-विक्षत स्थिति में आ गया। यहां से करीब 5 किलोमीटर दूर सिरेमंदिर फोरेस्ट एरिया में ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।

हाथी की मौत के बाद पोस्टमार्टम के लिए आवश्यक करवाई करते वन विभाग के रेंजर भागीरथ सिंह
हाथी की मौत के बाद पोस्टमार्टम के लिए आवश्यक करवाई करते वन विभाग के रेंजर भागीरथ सिंह

वन विभाग की जमीन पर अंतिम संस्कार

जालोर के क्षेत्रीय वन अधिकारी भागीरथ सिंह ने बताया कि पालतू हाथी के मौत की सूचना मिली थी। वन्य जीव होने के कारण उसका विधिवत पोस्टमॉर्टम किया गया है। यहां विवाद की स्थिति को देखते हुए शव को वन विभाग की जमीन पर ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया है।

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