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बुद्ध विहार धम्म स्थली जय पहाड़ी में सघन वृक्षारोपण अभियान के तहत ट्रस्ट ने लगाए पेड़


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बुद्ध विहार धम्म स्थली जय पहाड़ी में सघन वृक्षारोपण अभियान के तहत ट्रस्ट ने लगाए पेड़

ट्रस्ट द्वारा लगाए गए पेड़ पौधों की देखभाल के लिए ग्राम पंचायत का भी रहेगा पूर्ण सहयोग... सरपंच सुमन कंवर

बगड़ : क्षेत्र के बुद्ध विहार धम्म स्थली जय पहाड़ी में रविवार को केआर बुद्ध प्रबोधन विहार ट्रस्ट जय पहाड़ी द्वारा भंते विनय पाल के सानिध्य में सघन वृक्षारोपण अभियान पेड़ लगाओ मानवता बचाओ के अंतर्गत बगड़ आउटर बाईपास से जयपहाड़ी तक बौद्ध विहार पथ के दोनों तरफ वृक्षारोपण कर उनकी देखभाल का जिम्मा लिया। ट्रस्ट द्वारा पीपल, बरगद, अर्जुन छाल, शीशम सहित कई प्रकार के छायादार वृक्ष लगाए गए। वहीं पेड़ों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड भी लगाए गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयपहाड़ी सरपंच सुमन कंवर रही। जबकि विशिष्ट अतिथि ट्रस्टी एवं पीएचईडी विभाग राजस्थान के पूर्व मुख्य अभियंता इंजीनियर मालीराम, मेघवाल समाज संघ के झुंझुनूं जिलाध्यक्ष सुभाष मेघवाल, पशुपालन विभाग राजस्थान के पूर्व अतिरिक्त निदेशक जगदीश बरवड़ रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार विरोधी जिला संघर्ष समिति झुंझुनूं के जिलाध्यक्ष रामानंद आर्य द्वारा की गई। वृक्षारोपण के दौरान ट्रस्टी एवं सचिव बलवीर सिंह काला तथा रामानंद आर्य ने कहा कि पर्यावरण संतुलन और प्राणी मात्र के जीवन के लिए पेड़ बहुत ही उपयोगी है। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को पेड़ ही नियंत्रित कर सकते हैं।

सरपंच सुमन कंवर और समाजसेवी यशपाल सिंह शेखावत ने ट्रस्ट द्वारा किए गए वृक्षारोपण कार्य की सराहना करते हुए पेड़ों की देखभाल के लिए ग्राम पंचायत की ओर से पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। प्रोफेसर ओंकारमल ने वृक्षारोपण का समस्त खर्च उठाया। वक्ताओं ने कहा कि गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई. पूर्व प्रकृति की गोद में लुंबिनी वन में हुआ था। उनको 35 वर्ष की आयु में निरंजना नदी के तट पर बोध गया में पीपल वृक्ष के नीचे बोधि प्राप्त हुई। सारनाथ में पंचवर्गीय भिक्षुओं को प्रथम धम्म उपदेश बरगद के वृक्ष के नीचे प्रकृति की गोद में बुद्ध धम्म की स्थापना धम्म चक्र प्रवर्तन कर दिया। उन्होंने 45 वर्षों तक मानवता के कल्याण के लिए बुद्ध धर्म का प्रचार प्रसार पैदल चलकर धम्म चारिका करके किया। उन्होंने आवागमन के लिए अपने जीवन में बैलगाड़ी तक का उपयोग भी नहीं किया और गौतम बुद्ध रात्रि विश्राम भी प्रकृति की गोद में पेड़ों के नीचे ही करते थे। उनका महापरिनिर्वाण 483 ई. पूर्व कुशीनगर में प्रकृति की गोद में 80 वर्ष की आयु में हुआ था। तथागत बुद्ध प्रकृति के महान संरक्षक और पोषक थे। संसार के इतिहास में तथागत बुद्ध के त्यागमय जीवन की तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती। तथागत बुद्ध ने कहा था कि मानव और प्राणी मात्र का जीवन प्रकृति पर निर्भर है।

इस दौरान ट्रस्टी बीएल बौद्ध, दुर्गावती, दुर्गा प्रसाद बोयल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सत्यवीर बरवड़, अजाक जिलाध्यक्ष संपत बारूपाल, भीम आर्मी जिलाध्यक्ष विकास आल्हा, समता सैनिक दल के धर्मपाल बौद्ध भोभिया, दिलीप डिग्रवाल, संघ के कोषाध्यक्ष डॉ अशोक गर्वा, महासचिव अजय काला, प्राचार्य किशोर बरवड़, पवन सुरेला, रोहितास कुमार बोयल, राजकुमार बोयल, मदनलाल, शिवपाल सिंह निर्मल, करणी राम बरवड़, सुरेश कुमार गोठवाल, भागीरथ माहिच, ओम प्रकाश माहिच, नवीन माहिच, रघुवीर सिंह, सत्यवीर सिंह सहित कई लोगों ने वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया।

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