गहलोत बोले-रिफाइनरी के इतिहास की सीएम को जानकारी नहीं है:मदन राठौड़ का पलटवार, कहा- ‘रिफाइनरी पर गुमराह करना बंद करें गहलोत’
गहलोत बोले-रिफाइनरी के इतिहास की सीएम को जानकारी नहीं है:मदन राठौड़ का पलटवार, कहा- 'रिफाइनरी पर गुमराह करना बंद करें गहलोत'
जयपुर : रिफाइनरी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच सियासी वार पलटवार का दौर शुरू हो गया है। सीएम भजनलाल शर्मा के बयान पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा- ‘सीएम को रिफाइनरी के इतिहास की बुनियादी जानकारी तक नहीं है।’गहलोत ने एक्स पर कांग्रेस राज के दौरान रिफाइनरी शिलान्यास की तस्वीरें भी शेयर की हैं। इस पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा- ‘गहलोत साहब, पचपदरा रिफाइनरी को लेकर जनता को गुमराह करना बंद करें।’
गहलोत और राठौड़ दोनों ने अपने एक्स पर वार पलटवार किए।
देखिए, गहलोत की शेयर की गई ये 2 PHOTOS


गहलोत बोले- रिफाइनरी को लेकर सीएम को गलत जानकारी
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सीएम पर पलटवार करते हुए एक्स पर लिखा- मुख्यमंत्री पूर्व में रिफाइनरी में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी को लेकर गलत बयान दे चुके हैं। मुख्यमंत्री को यदि इतिहास की जानकारी नहीं है, तो वे सार्वजनिक रूप से गलत बयानबाजी करने के बजाय अपने अधिकारियों से सही आंकड़े और दस्तावेज मंगवाकर पढ़ लें।
गहलोत ने लिखा- मुख्यमंत्री को शायद यह ज्ञात ही नहीं है कि पचपदरा रिफाइनरी का वास्तविक शिलान्यास साल 2013 में ही यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली द्वारा किया जा चुका था। ये तस्वीरें उसी मौके की है।
इसके विपरीत, केंद्र सरकार और राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पांच साल तक ठंडे बस्ते में डालकर अटकाए रखा, जिससे इसकी लागत 37,000 करोड़ रुपए से दोगुनी बढ़कर लगभग 80,000 करोड़ रुपए हो गई।
रिफाइनरी के लिए एचपीसीएल को राजी करना चुनौतीपूर्ण काम था
गहलोत ने लिखा- राजस्थान में रिफाइनरी की स्थापना के लिए ‘हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (एचपीसीएल) को राजी करना भी एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। सामान्यत: रिफाइनरी परियोजनाओं में राज्य सरकार की कोई हिस्सेदारी नहीं होती है, लेकिन एचपीसीएल को सहमत करने के लिए राजस्थान सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए रिफाइनरी में 26% की हिस्सेदारी ली। इसी के परिणामस्वरूप यह ‘एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड’ (एचआरआरएल) नामक संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) बना, जिसने इस रिफाइनरी का निर्माण किया है।
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष का गहलोत के बयान पर पलटवार
मदन राठौड़ बोले- गहलोत साहब,रिफाइनरी पर गुमराह करना बंद करें
मदन राठौड़ ने एक्स पर लिखा- ‘कागजी शिलान्यास बनाम धरातल का विकास।’ गहलोत साहब, पचपदरा रिफाइनरी को लेकर जनता को गुमराह करना बंद करें। राजस्थान की जनता भ्रामक बयानों और चुनावी स्टंट का अंतर अच्छी तरह जानती है। 2013 में चुनाव से ठीक दो महीने पहले बिना बजट, बिना जमीन और बिना पर्यावरण मंजूरी के केवल वोट बैंक के लिए पत्थर लगाना विकास नहीं, राजनीतिक छलावा था।

कांग्रेस राज में एचपीसीएल से एमओयू पर प्रदेश पर बोझ था
मदन राठौड़ ने लिखा- पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के हितों को ताक पर रखकर एचपीसीएस से जो एमओयू किया था, वह राजस्थान पर भारी वित्तीय बोझ था। 2014 में भाजपा सरकार ने कड़ा मोलभाव कर राज्य के हजारों करोड़ रुपए बचाए और जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसका वास्तविक ‘कार्यारंभ’ कराया।
काम की कछुआ चाल के जिम्मेदार आज खुद को दूरदर्शी बता रहे हैं
राठौड़ ने लिखा- लागत बढ़ने का रोना रोने वाले याद रखें कि 2018 से 2023 के बीच अपनी आंतरिक गुटबाजी और प्रशासनिक अकर्मण्यता के कारण इस प्रोजेक्ट को अटकाने, लटकाने और भटकाने का काम किसने किया? काम की कछुआ चाल के असली जिम्मेदार आज खुद को दूरदर्शी बता रहे हैं।
हमारी डबल इंजन सरकार कागजी पत्थरों पर नहीं, धरातल पर काम करने में विश्वास रखती है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पचपदरा रिफाइनरी का काम अब पूरी पारदर्शिता और तीव्र गति से पूरा होकर जल्द राजस्थान की प्रगति का नया आधार बनेगा।
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