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चिड़ावा में पानी की पाइपलाइन पर दो वार्डों में विवाद:जलदाय विभाग से कार्रवाई की मांग, विभाग ने जांच कर सुलझाने का आश्वासन दिया


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चिड़ावा में पानी की पाइपलाइन पर दो वार्डों में विवाद:जलदाय विभाग से कार्रवाई की मांग, विभाग ने जांच कर सुलझाने का आश्वासन दिया

चिड़ावा में पानी की पाइपलाइन पर दो वार्डों में विवाद:जलदाय विभाग से कार्रवाई की मांग, विभाग ने जांच कर सुलझाने का आश्वासन दिया

चिड़ावा : चिड़ावा में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी को लेकर समस्या गहराने लगी है। ताजा मामला वार्ड नंबर 38 और 40 के बीच सामने आया है, जहां एक सार्वजनिक कुएं से पाइपलाइन जोड़ने को लेकर दोनों वार्डों के निवासी आमने-सामने आ गए हैं। यह विवाद अब प्रशासन तक पहुंच गया है।

वार्ड नंबर 38 के निवासियों का कहना है कि उनके वार्ड के बड़ चौक स्थित जलदाय विभाग के कुएं से पहले ही वार्ड 38 की जलापूर्ति मुश्किल से हो पा रही है। निवासी मोतीसिंह ने बताया कि यदि वार्ड 40 के लिए यहां से अवैध पाइपलाइन जोड़ी जाती है, तो उनके वार्ड में पानी का भारी संकट खड़ा हो जाएगा।

मोतीसिंह ने मांग की कि विभाग वार्ड 40 के बंद पड़े कुएं को ठीक कराए या उनके लिए कोई नया विकल्प ढूंढे, बजाय इसके कि वार्ड 38 के कुएं से लाइन जोड़ी जाए।

दूसरी ओर, वार्ड नंबर 40 के निवासी धन सिंह सुनिया ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि वार्ड 40 का अपना कुआं बंद हो जाने के कारण वहां के लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं।

धन सिंह सुनिया के अनुसार, पानी पर हर नागरिक का समान अधिकार है। उन्होंने कहा कि वार्ड 40 के सभी निवासी इस समस्या के त्वरित समाधान के लिए एकजुट हैं और प्रशासन के सहयोग से शांतिपूर्ण हल चाहते हैं।

जलदाय विभाग ने इस मामले पर संज्ञान लिया है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वे मौके का मुआयना करेंगे और दोनों वार्डों के बीच के इस विवाद को सुलझाने का प्रयास करेंगे।

​विवाद तब शुरू हुआ जब वार्ड 40 की जलापूर्ति के लिए वार्ड 38 के कुएं से पाइपलाइन जोड़ने की कवायद शुरू की गई। वार्ड 38 के लोगों ने इसे ‘अवैध’ बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों और वार्डवासियों की भीड़ अब सहायक अभियंता कार्यालय के बाहर जमा हो गई है।

​फिलहाल, जलदाय विभाग के अधिकारी दोनों पक्षों को समझाने और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि एक वार्ड की प्यास बुझाने के चक्कर में दूसरे वार्ड में जल संकट न पैदा हो जाए।

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