स्वच्छता के कार्यों को शहर में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का लक्ष्य लेकर कार्य करना होगा : के के गुप्ता
स्वच्छता प्रदेश ब्रांड एंबेसडर गुप्ता ने नगर निगम उदयपुर में ली बैठक, महत्वपूर्ण निर्देश प्रदान दिए, हर व्यक्ति की जुबान पर स्वच्छता के चर्चे हो, "वाह कितना साफ शहर है !"
उदयपुर : स्वच्छ भारत मिशन (शहर) राजस्थान सरकार के स्टेट ब्रांड एंबेसडर के के गुप्ता द्वारा मंगलवार प्रातः नगर निगम उदयपुर के सभागार में स्वच्छता संबंधित विषय पर आवश्यक बैठक लेते हुए दिशा निर्देश जारी किए गए। बैठक के प्रारंभ में स्थानीय निकाय विभाग (क्षेत्रीय) उप निदेशक विनोद कुमार द्वारा ब्रांड एंबेसडर गुप्ता का स्वागत अभिनंदन किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए गुप्ता ने कहा कि राजस्थान सरकार के यशस्वी मुख्यमंत्री ने मुझे तीसरी बार स्वच्छ राजस्थान बनाने की कमान सौपी है, बिना आपके समर्पण के, सहयोग के स्वच्छ नहीं बन सकता तथा जब तक स्वच्छ नहीं बनेगा राजस्थान समृद्ध एवं सशक्त राजस्थान नहीं बन सकता। स्वच्छता को समझने की आवश्यकता है। इससे न केवल स्वस्थ्य रहते है अपितू हमारी उम्र भी बढती है तथा यह इंसानों के साथ-साथ देवी देवताओं का भी प्रिय है।
गुप्ता ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन केवल निकायों के सर्वेक्षण तक के लिए नहीं है, बल्कि यह 365 दिन चलने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है, जिसका संकल्प देश के यशस्वी प्रधानमंत्री महोदय ने वर्ष 2014 में लिया था और इस अभियान से जुड़े हुए प्रत्येक अधिकारी तथा कर्मचारी सहित आम जनता का दायित्व है कि इसे धरातल पर लागू करने के लिए अपनी भूमिका अदा करें।
गुप्ता ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री महोदय का यह भी विजन है कि आजादी की 100वीं वर्षगांठ अर्थात वर्ष 2047 तक हमारा भारत देश विकसित और विश्व गुरु देश बनेगा, लेकिन इसके लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि पूरा देश स्वच्छ होना चाहिए, स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है जिसे लोगों ने समझा और महसूस किया है।
गुप्ता ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन शहर और ग्रामीण में राजस्थान प्रदेश को उत्कृष्ट स्थान पर देखने के लिए प्रदेश के ओजस्वी मुख्यमंत्री महोदय भी दृढ़ संकल्पित है। मुख्यमंत्री महोदय के स्पष्ट निर्देश है कि स्वच्छता के कार्यों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और लापरवाही करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध भी त्वरित कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री महोदय द्वारा स्वयं निगरानी रखी जा रही है वहीं विभाग के उच्च अधिकारी स्तर तक भी मॉनिटरिंग रखते हुए प्रत्येक छोटे-बड़े निकाय के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़े हुए हैं, इनके द्वारा प्रतिदिन कार्यों की समीक्षा की जा रही है।
स्वच्छता को धरातल पर उतारने के लिए बताएं महत्वपूर्ण सूत्र
स्वच्छता मिडिया में छपने एवं भाषणों में बोलने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए स्वच्छता वह है- जिसमें गन्दगी आंखों से नजर नहीं आये, प्लास्टिक की थैलियां खुल्ले में नजर नहीं आये, सडकों पर गाय घुमती नजर नहीं आये, कचरा यार्डो में आग न लगे, बगीचे साफ सूथरे हो, बच्चो के लिए झुल्ले एवं लाइट की प्रर्याप्त व्यवस्था हो तथा कुत्ते बगीचों में घुमते नजर न आऐ, सार्वजनिक शौचालय एवं मूत्रालय बिलकुल साफ हो तथा हर व्यक्ति की जुबान पर स्वच्छता के चर्चे हो, “वाह कितना साफ शहर है।”
स्वच्छता पर जीरो टोलरेंस नीति पर कार्य होगा
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री एवं यशस्वी मुख्यमंत्री का संकल्प है शहर एवं गाँव के अंतिम छोर तक स्वच्छता पहुंचानी है जिम्मेदार अधिकारी एवं कर्मचारी इस पर गंभीरता से कार्य करे पहली बार मुख्यमंत्री की “जीरो टोलरेन्स” की नीति पर स्वच्छता पर कार्य करना होगा किसी भी सूरत में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्वच्छता पर दी जाएगी रैंकिंग
सभी निकायों को स्वच्छता पर चल रहे कार्यो के आधार पर चार भागो में बाँटा गया है जो निम्न प्रकार है-
ए केटेगरी के निकायो में अभी स्वच्छता के प्रति श्रेष्ठ कार्य चल रहा है। बी केटेगरी के निकायो में स्वच्छता के प्रति संतोषजनक कार्य किये जा रहे है। सी केटेगरी के निकायो में स्वच्छता के कार्यो के प्रति गंभीरता नहीं है सुधार के लिए चेतावनी दी जानी आवश्यक है। डी केटेगरी के निकायों के अधिकारियों के परिवर्तन की आवश्यकता है और ये अधिकारी स्वच्छता के प्रति गंभीर नहीं होने के साथ-साथ कार्यो में बिल्कुल रूचि नहीं ले रहे है। निकायो में की स्वच्छता की धरातल की रिपोर्ट से सरकार को अवगत करवाया जाएगा जो भी निकाये स्वच्छता के प्रति गंभीर नहीं होगी उन पर कार्रवाई होगी।
मुख्य सूत्र
डोर टू डोर कचरा संग्रहण – नियमित 365 दिन , समय बद्धता, गीला एवं सूखा अलग-अलग प्रातः 10 बजे से पहले कचरा संग्रहण तथा एक गाड़ी से 400 घरों तक का कचरा संग्रहण कार्य किया जावे। प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिबन्ध – जहां तक निगाहे जाए प्लास्टिक थैलियां दिखनी नहीं चाहिए तथा नियमित प्लास्टिक की थैलियों की धरपकड़ की जावे। सामुदायिक शौचालय एवं मूत्रालय की सफाई -सामुदायिक शौचालय एवं मूत्रालयों की सफाई दिन में तीन बार होनी चाहिए। रंग रोंगन तथा पानी की व्यवस्था सूचारू होनी चाहिए। रात्रिकालीन सफाई -काॅमर्शियल एरियें में रात्रीकालीन सफाई नियमित होनी चाहिए। एक व्यक्ति को 400 मीटर से ज्यादा की सफाई नहीं दी जावे। रेडियम की जैकेट कर्मचारी पहने हुए होने चाहिए। खाली प्लोटो की सफाई – अखबार में विज्ञप्ति जारी कर सभी खाली प्लोटों को साफ करने हेतु सूचना जारी करे तथा 3 दिन में सफाई न करने पर निकाय अपने स्तर पर सफाई करवाए तथा 10 गुणा तक जुर्माना वसूल करे अन्यथा प्लाट को सीज करने तक की कार्यवाही करे। बाग बगीचों की सफाई-बगीचों में सफाई व्यवस्था, बच्चों के झूल्ले, रंग रोंगन, फव्वारे चालू हो, अच्छी घास एवं पेड़ हो मरम्मत कार्य व्यवस्थित हो तथा बगीचों में कुत्ते घूमतें हुए नजर न आये।
अन्य महत्वपूर्ण कार्य
सड़को पर गाये घूमती नजर न आये। डीवायडरों पर रंग रोंगन तथा बीच में अच्छे पेड़ हो। इलेक्ट्रीक पोलो पर लाईट बन्द न हो। सड़के एवं नालियां टूटी-फूटी नहीं हो। फव्वारे सभी चालु रहे। दूकानदारों के यहां कचरा पात्र हो। टूरिस्ट पोईंटो पर विशेष सफाई व्यवस्था हो। अवैध मीट मांस की दूकाने संचालित न हो। 90 ए की कार्यवाही से पूर्व भूमि डवलपमेंट की जानी चाहिए। झील एवं तालाबों में सीवरेज तथा गंदा पानी नहीं जाना चाहिए तथा गंदगी मुक्त हो। सीवरेज के कार्य के अन्तर्गत सड़क मेंटनेस का कार्य तथा शिकायत का तुरन्त निस्तारण हो। सड़को एवं खुल्लें में कचरा डालने वालो पर दण्डनात्मक कार्यवाही की जावे।
बैठक में नगर निगम उदयपुर के आयुक्त, नगर पालिकाओं के अधिशासी अधिकारी सहित रुडीप प्रोजेक्ट, जेजेएम प्रोजेक्ट, पीडब्ल्यूडी विभाग, रोडवेज विभाग, देवस्थान विभाग सहित समस्त जिला व ब्लॉक स्वच्छता कोऑर्डिनेटर उपस्थित रहे।
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