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सलाम ‘क्रांतिवीर’ बेटी को: महलों का ठाठ छोड़ माटी का कर्ज चुकाने में लगी सरपंच जरीना


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सलाम ‘क्रांतिवीर’ बेटी को: महलों का ठाठ छोड़ माटी का कर्ज चुकाने में लगी सरपंच जरीना

बेसवा में बनेगी राजस्थान की सबसे आधुनिक ग्रामीण लाइब्रेरी, सरपंच जरीना खान का ऐतिहासिक कदम! आईपीएस की पत्नी और पूर्व आईएएस की बेटी जरीना खान ने सरपंच बन बदल डाला इतिहास!

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर

फतेहपुर : विरासत में मिली थी साख, हाथों में था रसूखदार परिवारों का साथ… पिता सीनियर आईएएस रहे और पति देश की सुरक्षा के अग्रिम मोर्चे पर सीनियर आईपीएस! जो चाहती तो सात समंदर पार या देश के किसी भी आलीशान बंगले में बैठकर ऐशो-आराम की जिंदगी काट सकती थी। लेकिन, मिट्टी का कर्ज और अपनी सरजमीं के बच्चों की तकदीर बदलने का एक ऐसा ‘जुनून’ उसके सिर पर सवार हुआ कि उसने महलों के ठाठ छोड़कर गांवों की पगडंडियों को चुन लिया।

​हम बात कर रहे हैं फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र की सब से बड़ी ग्राम पंचायत बेसवा की महिला सरपंच जरीना खान की। जिन्होंने रविवार को एक ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया, जिसने पूरे राजस्थान के शिक्षा जगत में तहलका मचा दिया है।

​अब बेसवा में बनेगी बेहतरीन लाइब्रेरी ग्रामीण परिवेश में प्रदेश की सबसे बड़ी ‘ज्ञान की लाइब्रेरी’
​कोई सोच भी नहीं सकता था कि एक गांव में कोई ऐसी लाइब्रेरी खड़ी कर सकता है जो जयपुर, दिल्ली और कोटा के बड़े-बड़े कोचिंग हब को मात दे दे। सरपंच जरीना खान ने रविवार को प्रदेश की अनोखी और आधुनिक और सबसे बड़ी ग्रामीण लाइब्रेरी की नींव रख दी है।

​यह सिर्फ ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि बेसवा के उन नौजवानों और बेटियों के सपनों का ‘लॉन्चिंग पैड’ है, जो पैसों की तंगी या सुविधाओं के अभाव में बड़े शहरों में नहीं जा पाते थे। यह पूरी लाइब्रेरी:

  • ​पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड वातानुकूलित (AC) होगी।
  • ​डिजिटल सुख-सुविधाओं से लैस और पूरी तरह शांत वातावरण वाली होगी।
  • ​यहाँ बैठकर गांव के किसान और मजदूर के बच्चे भी आईएएस, आईपीएस और आरएएस बनने का सपना सच कर सकेंगे।

​सरपंच पद मेरा शौक नहीं, मेरे गांव का कर्ज था!
रिपोर्टर आबिद खान दाडून्दा ने ​जब ग्राउंड पर खुद सरपंच जरीना खान से बात की, तो उनकी आंखों में अपनी माटी के लिए एक अजीब सा संतोष और आक्रामकता थी। उन्होंने भावुक होते हुए दिल छू लेने वाली बात कही:

​”मेरे पिताजी आईएएस थे, पति सीनियर आईपीएस हैं…अल्लाह का दिया सब कुछ है, मैं पूरी तरह वेल-सेटल परिवार से हूँ। लेकिन मेरे दिल में एक तड़प थी कि मैं अपनी इस भावी पीढ़ी के लिए, अपनी बेटे बेटियों के लिए बेसवा के लिए कुछ ऐसा कर जाऊं जो इतिहास बन जाए। इसके लिए मुझे एक ‘बैनर’ (पहचान) की जरूरत थी, और मेरे बेसवा के युवाओं बुजरुगो ने मुझे लगातार दूसरी बार सरपंच का वो बैनर दिया। आज मैं जो कुछ भी कर पा रही हूँ, वह मेरे अपनों, मेरे शुभचिंतकों की बदौलत है। बाकी सब ऊपर वाले के हाथ में है।” में तो एक माध्यम हूं।

​वो तीन ऐतिहासिक तमगे, जिन्होंने बेसवा को बनाया राजस्थान का ‘ताज’
​जरीना खान कोई आम जनप्रतिनिधि नहीं हैं, उन्होंने अपने पिछले 10 सालों के कार्यकाल में बेसवा को विकास के उस शिखर पर पहुँचाया है जहाँ तक पहुँचने में बड़े-बड़े शहरों के पसीने छूट जाते हैं। जरीना खान के नेतृत्व में इस पंचायत ने वो कर दिखाया जो मिसाल है: ​

First ODF Panchayat: स्वच्छता के मामले में पूरे क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त कराकर नजीर पेश की। ​जिसकी चर्चा पूरे राजस्थान में रही हैं।

पर्यावरण संरक्षण स्टेट अवार्ड: प्रकृति को बचाने और हरियाली की ऐसी अलख जगाई कि सीधे राज्य सरकार ने इन्हें सर्वोच्च सम्मान से नवाजा। ​

आदर्श ग्राम पंचायत का दर्जा: विकास कार्यों की बदौलत बेसवा को राजस्थान की सबसे मॉडल और आदर्श पंचायत होने का गौरव हासिल हुआ।

​जब अज्ञानता के अंधेरे को चीरकर खड़ी हुई जरीना खान
​एक दौर था जब ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को घूंघट और चारदीवारी में कैद कर दिया जाता था, लड़कियों को स्कूल भेजने से समाज कतराया करता था। लेकिन खुद पोस्ट ग्रेजुएट जरीना खान ने उस रूढ़िवादी सोच की छाती पर पैर रखकर यह साबित कर दिया है कि जब एक पढ़ी-लिखी महिला गांव की कमान संभालती है, तो पूरी पंचायत की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल जाती है।

​करोड़ों के विकास कार्य करवाने के बाद अब इस ‘आधुनिक लाइब्रेरी’ की नींव रखकर जरीना खान ने शिक्षा के क्षेत्र में जो ‘परिवर्तन का शंखनाद’ किया है, उसकी गूंज पूरे राजस्थान में ही नही देश भर में चर्चा का विषय बनी हैं। बेसवा की यह धरा और सलाम है ऐसी सरपंच के जज्बे को!

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