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धरती फाड़कर निकली जमवाय माता की मूर्ति:झुंझुनूं के धमाणा जोहड़ में है प्रसिद्ध मंदिर, साल में दो बार लगता है मेला


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धरती फाड़कर निकली जमवाय माता की मूर्ति:झुंझुनूं के धमाणा जोहड़ में है प्रसिद्ध मंदिर, साल में दो बार लगता है मेला

धरती फाड़कर निकली जमवाय माता की मूर्ति:झुंझुनूं के धमाणा जोहड़ में है प्रसिद्ध मंदिर, साल में दो बार लगता है मेला

गुढ़ागौड़जी : झुंझुनूं जिले की गुढ़ागौड़जी तहसील के धमाणा जोहड़ की बीड़ में स्थित भगवती दुर्गेश्वरी जमवाय माता का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। लोकमान्यता है कि मंदिर की स्थापना के समय खुदाई के दौरान धरती से माता की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। इसी मान्यता के चलते माता को जमवाय माता के नाम से जाना जाता है। प्राकृतिक हरियाली से घिरा यह धाम श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है।

मंदिर गुढ़ागौड़जी-उदयपुरवाटी मार्ग पर पोसाना गांव से करीब दो किलोमीटर उत्तर तथा गुढ़ागौड़जी-नवलगढ़ मार्ग पर भोड़की गांव से करीब दो किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यहां सालभर श्रद्धालु दर्शन और मनौती मांगने पहुंचते हैं। चैत्र और आश्विन नवरात्र में दो बार विशाल मेले भरते हैं।

महाष्टमी की रात उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब

नवरात्र के नौ दिनों में मंदिर परिसर भक्तिमय रहता है। महाष्टमी की रात विशेष रौनक होती है। भिवानी, जाखल सहित दूर-दराज के गांवों से श्रद्धालु माता के निशान लेकर मंदिर पहुंचते हैं। ढफ और झालर की गूंज के बीच घुंघरुओं की छनकार पर भक्त नाचते-गाते हैं और रातभर जागरण कर माता की आराधना करते हैं।

पृथ्वीराज चौहान के काल से जुड़ी है लोककथा

जनश्रुतियों के अनुसार, मंदिर का इतिहास दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान के समय से जुड़ा हुआ है। उस दौर में दिल्ली में केतू और धामा नाम के दो तंवर राजपूत भाई रहते थे। लोककथा के मुताबिक, किसी अपराध के कारण उन्हें देश निकाला दिया गया। इसके बाद दोनों ने अपनी पहचान छिपाकर जाट समुदाय की गढ़वाल गोत्र परंपरा अपनाई और उदयपुरवाटी के पास धनावता गांव में बस गए। बताया जाता है कि उन्होंने वहां शिव मंदिर भी बनवाया था।

कथा के अनुसार, एक बार चोरी के प्रयास में पकड़े जाने पर दोनों भाइयों को बेड़ियों में जकड़कर जेल में डाल दिया गया। धामा मां दुर्गा का अनन्य भक्त था। उसने माता की आराधना करते हुए भविष्य में चोरी नहीं करने का संकल्प लिया। लोकमान्यता है कि माता की कृपा से जेल के ताले और बेड़ियां अपने आप खुल गए, जिसके बाद दोनों भाइयों को रिहा कर दिया गया।

इसके बाद दोनों भाई धनावता लौट आए। जनश्रुति के अनुसार, वहां की पहाड़ियों में तांबे की खान मिलने से वे समृद्ध हो गए। एक अन्य कथा में बताया जाता है कि तांबा बेचने दिल्ली जाते समय माता के स्मरण से वे सिपाहियों से बच निकले। लोककथा के अनुसार, उनके ऊंट बैल बन गए और तांबा कोयले में बदल गया। केतू की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी माली सती हो गईं, जिनकी स्मृति में आज भी माली सती की पूजा की जाती है।

घोड़ा जहां रुका, वहीं बना मंदिर

लोककथा के अनुसार, एक बार धामा से शिव मंदिर आए साधु का अनादर हो गया। साधु ने नाराज होकर तांबे की खान नष्ट होने का श्राप दे दिया। इससे दुखी धामा ने फिर मां दुर्गा की आराधना की। मान्यता है कि माता ने स्वप्न में दर्शन देकर उसे घोड़ा उत्तर दिशा में दौड़ाने और घोड़े के रुकने वाली जगह पर तालाब व मंदिर बनवाने का निर्देश दिया।

कथा के अनुसार, घोड़ा वर्तमान धमाणा जोहड़ के स्थान पर आकर रुक गया। आकाशवाणी हुई कि यहां तालाब और उससे 52 कदम दक्षिण में मंदिर बनाया जाए। निर्माण के लिए खुदाई शुरू हुई तो भूमि से मां दुर्गा की प्रतिमा प्रकट हुई। धरती से प्रकट होने की मान्यता के कारण माता का नाम जमवाय माता पड़ा। धामा ने यहां 560 बीघा जमीन ली, जिसे आज धमाणा वाली जमवाय माता की बीड़ के नाम से जाना जाता है।

जम्हाई लेकर दानवों का संहार करने की भी मान्यता

एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, सतयुग में एक दानव के रक्त की बूंदों से अनेक दानव पैदा हो रहे थे। तब मातेश्वरी ने जम्हाई लेकर उन दानवों का भक्षण कर लिया। इस मान्यता को भी जमवाय माता के नाम से जोड़कर देखा जाता है।

टीकू खाती को स्वप्न में दिए थे दर्शन

माता की महिमा के प्रचार-प्रसार से जुड़ी एक कथा भोड़की गांव के टीकू खाती की भी है। जनश्रुति के अनुसार, एक रात माता ने टीकू को स्वप्न में दर्शन देकर अपनी आरती और गाथा गाने का आदेश दिया। टीकू ने असमर्थता जताई तो माता ने वरदान दिया कि मुख खोलते ही गाथा स्वतः प्रवाहित होगी। इसके बाद टीकू माता की महिमा गाने लगा।

मान्यता है कि तभी से क्षेत्र में श्रद्धालु अपने घरों में जमवाय माता के नाम का दीपक जलाते हैं और टीकू की गाई गाथा के माध्यम से जागरण करते हैं। आज भी धमाणा जोहड़ स्थित यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं और लोकआस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

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