[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

रामलीला में विभीषण ने छोड़ा रावण का साथ, श्रीराम की शरण में पहुंचे


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
झुंझुनूंटॉप न्यूज़बिसाऊराजस्थानराज्य

रामलीला में विभीषण ने छोड़ा रावण का साथ, श्रीराम की शरण में पहुंचे

रावण के अहंकार पर भारी पड़ी विभीषण की नीति, अंगद का शांति प्रस्ताव भी ठुकराया; सेतु निर्माण के बाद लंका की ओर बढ़ी वानर सेना

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : लतीफ खान

बिसाऊ : बिसाऊ की विश्वविख्यात ऐतिहासिक मूक रामलीला में रविवार को धर्म-अधर्म, नीति और अहंकार के टकराव का भावपूर्ण मंचन किया गया। लीला में विभीषण का रावण का साथ छोड़कर भगवान श्रीराम की शरण में पहुंचना, समुद्र पर सेतु निर्माण, अंगद-रावण संवाद और राम-रावण की सेनाओं के बीच युद्ध की तैयारियों का सजीव चित्रण किया गया। कलाकारों ने बिना संवाद बोले अपनी भाव-भंगिमाओं और प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से जोड़ दिया।

विभीषण की सीख अनसुनी, रावण ने किया अपमान

रामलीला में रावण के दरबार का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जहां विभीषण ने अपने भाई को नीति और धर्म का मार्ग अपनाने की सलाह दी। उन्होंने माता सीता को सम्मानपूर्वक भगवान श्रीराम को लौटाने और उनसे शत्रुता समाप्त करने की बात कही। हालांकि, अहंकार में डूबे रावण ने विभीषण की सलाह को अनसुना कर दिया।

क्रोधित रावण ने विभीषण का अपमान कर उन्हें लात मारकर लंका से बाहर निकाल दिया। इसके बाद विभीषण ने अधर्म का साथ छोड़कर भगवान श्रीराम की शरण ग्रहण की। इस प्रसंग के माध्यम से संदेश दिया गया कि अहंकार में डूबा व्यक्ति जब सत्य और सद्बुद्धि की अनदेखी करता है, तो स्वयं अपने विनाश का मार्ग तैयार करता है।

समुद्र पर सेतु निर्माण, लंका की ओर कूच

इसके बाद समुद्र पार करने के लिए भगवान श्रीराम की प्रार्थना और समुद्र देव के प्रकट होने की लीला का मंचन हुआ। समुद्र देव ने नल-नील की सहायता से सेतु निर्माण का मार्ग बताया। वानर सेना ने सेतु निर्माण कर समुद्र पार करने की तैयारी की और भगवान श्रीराम के नेतृत्व में लंका की ओर कूच किया। सेतु निर्माण के दृश्य ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

अंगद की समझाइश भी बेअसर, युद्ध की तैयारी

युद्ध टालने के अंतिम प्रयास के तहत भगवान श्रीराम ने अंगद को दूत बनाकर रावण के दरबार में भेजा। अंगद ने रावण को माता सीता लौटाने और युद्ध से बचने की समझाइश दी, लेकिन रावण अपनी हठ पर अड़ा रहा। शांति प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद युद्ध का मार्ग प्रशस्त हो गया।

इसके बाद राम और रावण की सेनाओं के बीच युद्ध की तैयारियों का मंचन किया गया। वानर सेना और राक्षस सेना के बीच संघर्ष के दृश्यों ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। लीला के माध्यम से धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

पारंपरिक अभिनय से जीवंत हुए रामायण के प्रसंग

ऐतिहासिक मूक रामलीला में कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक रूप-सज्जा और भावपूर्ण अभिनय से रामायण के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत कर दिया। बिना संवाद के प्रस्तुत दृश्यों के माध्यम से कलाकारों ने दर्शकों को कथा से जोड़े रखा। लीला का निर्देशन आचार्य सुनील शास्त्री एवं पूर्व मंत्री श्याम सुंदर मीनारिया ने किया। मंच संचालन कपिलेश शर्मा और सुभाष खटिक ने किया। बिसाऊ की ऐतिहासिक मूक रामलीला अपनी विशिष्ट अभिनय शैली और समृद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा के माध्यम से आज भी दर्शकों को धर्म, सत्य और नीति का संदेश दे रही है।

Related Articles

Mantratoto luwakpoker aladin66 tupaiwin