हनुमान ने जलाई सोने की लंका, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा मैदान
राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध और लंका दहन की लीला का मंचन; हजारों श्रद्धालु बने साक्षी
खेतड़ी नगर : केसीसी के रामलीला मैदान में सनातन धर्म समिति की ओर से आयोजित दस दिवसीय रामलीला महोत्सव के छठे दिन शुक्रवार को राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध और लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। हनुमानजी द्वारा सोने की लंका जलाने का दृश्य देखकर दर्शक जय श्रीराम के जयकारे लगाने लगे। पूरा मैदान भक्तिमय हो गया।
लीला में बाली वध के बाद सुग्रीव को किष्किंधा का राजा और अंगद को युवराज बनाया गया। इसके बाद सुग्रीव ने वानर सेना के साथ माता सीता की खोज शुरू की। हनुमानजी समुद्र पार कर लंका पहुंचे और अशोक वाटिका में माता सीता का पता लगाया। शुरुआत में माता सीता हनुमानजी को देखकर आशंकित हुईं, लेकिन भगवान श्रीराम की अंगूठी देखकर उन्हें विश्वास हो गया कि वे प्रभु राम के दूत हैं। माता सीता ने अपनी व्यथा बताकर हनुमानजी से जल्द श्रीराम के पहुंचने का संदेश देने को कहा।
इसके बाद हनुमानजी ने अशोक वाटिका उजाड़ दी। राक्षसों ने उन्हें पकड़कर रावण के सामने पेश किया। रावण के आदेश पर हनुमानजी की पूंछ में आग लगा दी गई। हनुमानजी ने इसी जलती पूंछ से सोने की लंका में आग लगा दी। लंका दहन के इस दृश्य ने दर्शकों में उत्साह भर दिया और रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अजय सिंह शेखावत थे। विशिष्ट अतिथि हरपाल यादव, धर्मपाल कुमावत, बिशनाराम झाझड़िया और दीक्षा बंबोरिया मौजूद रहे। अध्यक्षता समिति अध्यक्ष सवाई सिंह सिराधना ने की। इस दौरान रामलीला समिति की ओर से भामाशाहों का सम्मान भी किया गया।
राम की भूमिका संजय जिंदड़, सीता की राजेश नारवाल, लक्ष्मण की गिरजा शंकर, हनुमान की सवाई सिंह और रावण की चुन्नीलाल ने निभाई। विभीषण की भूमिका नेमीचंद, मेघनाथ की तिपेश जांगिड़, सुग्रीव की मनोहरलाल, बाली की सुनील फाइटर और अंगद की हरिश शर्मा ने निभाई।
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