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सात साल बाद सुशीला सीगड़ा की कांग्रेस में घर वापसी, वार्ड-6 में भाजपा की अनामिका को देंगी चुनौती


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सात साल बाद सुशीला सीगड़ा की कांग्रेस में घर वापसी, वार्ड-6 में भाजपा की अनामिका को देंगी चुनौती

नामांकन के आखिरी दिन बदले झुंझुनूं के सियासी समीकरण, टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर छोड़ी भाजपा; पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार की कार्यशैली और परिवारवाद पर उठाए सवाल

झुंझुनूं : जिला परिषद चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन शुक्रवार को जिले की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया। झुंझुनूं पंचायत समिति की तीन बार प्रधान रह चुकीं और भाजपा के टिकट पर मंडावा विधानसभा चुनाव लड़ चुकीं सुशीला सीगड़ा ने करीब सात साल बाद कांग्रेस में घर वापसी कर ली। कांग्रेस ने उन्हें जिला परिषद के वार्ड नंबर-6 से प्रत्याशी बनाया है। इसी वार्ड से पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार की पुत्रवधू अनामिका भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में दोनों के आमने-सामने होने से वार्ड-6 का चुनावी मुकाबला चर्चा में आ गया है।

नामांकन की समय सीमा से करीब दो घंटे पहले हुए इस घटनाक्रम ने भाजपा के टिकट वितरण और पुराने कार्यकर्ताओं को अवसर देने के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया। सुशीला सीगड़ा मंडावा विधायक एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष रीटा चौधरी के विद्यार्थी भवन स्थित कार्यालय पहुंचीं। यहां रीटा चौधरी ने कांग्रेस का दुपट्टा पहनाकर और माला पहनाकर उनका पार्टी में स्वागत किया। कांग्रेस में शामिल होने के बाद सुशीला ने वार्ड-6 से नामांकन दाखिल किया।

इसके बाद वे अरड़ावता स्थित स्वर्गीय शीशराम ओला की समाधि स्थल पहुंचीं और पुष्पांजलि अर्पित की। यहां से वे सांसद बृजेंद्र सिंह ओला से मिलीं और आगामी चुनाव की रणनीति पर चर्चा की। उनकी कांग्रेस में वापसी में सांसद ओला और रीटा चौधरी की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है।

टिकट नहीं मिलने से नाराजगी, भाजपा छोड़ने का फैसला

सुशीला सीगड़ा भाजपा से जिला परिषद के वार्ड-6 का टिकट मांग रही थीं। इसी वार्ड से पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार की पुत्रवधू अनामिका को भाजपा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद उनकी नाराजगी सामने आई। इसके बाद उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय किया।

सुशीला का भाजपा छोड़ना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय तक पार्टी में सक्रिय रहने के साथ पंचायत राज की राजनीति में अपनी पहचान बना चुकी हैं। भाजपा के टिकट पर मंडावा विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद अब कांग्रेस के टिकट पर जिला परिषद चुनाव में उतरने से स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।

नरेंद्र कुमार की कार्यशैली पर सवाल, परिवारवाद का लगाया आरोप

कांग्रेस में शामिल होने के बाद सुशीला सीगड़ा ने पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार की कार्यशैली और टिकट वितरण के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है और टिकट वितरण में सीमित दायरे के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।

सुशीला ने कहा, “पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार के राशन कार्ड में जितने नाम हैं, पूर्व सांसद साहब उनको ही टिकट देते हैं। वे बाहर देखते नहीं हैं कि कोई और कार्यकर्ता भी चुनाव लड़ने वाले हैं।”

उनके इस बयान के बाद परिवारवाद और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक अवसर देने का मुद्दा चर्चा में आ गया है। सुशीला का आरोप है कि लंबे समय तक पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल रहे हैं। हालांकि, ये आरोप उनके अपने बयान हैं। इस संबंध में पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार का पक्ष सामने आने पर स्थिति के दूसरे पहलू को भी समझा जा सकेगा।

वर्ष 2000 से पंचायत राज की राजनीति में सक्रिय

सुशीला सीगड़ा की राजनीतिक पहचान लंबे चुनावी अनुभव और पंचायत राज में सक्रियता से बनी है। वर्ष 2000 में पहली बार चुनाव जीतकर प्रधान बनने के बाद उन्होंने झुंझुनूं पंचायत समिति की राजनीति में अपनी पकड़ बनाई। वे तीन बार प्रधान रह चुकी हैं। आरक्षण के कारण एक कार्यकाल में अपनी करीबी एवं पारिवारिक सदस्य मंजू सीगड़ा को प्रधान की जिम्मेदारी दिलाने में भी उनकी भूमिका रही।

करीब दो दशक तक पंचायत समिति के नेतृत्व से जुड़ी रहने के कारण उन्हें क्षेत्र की अनुभवी महिला नेताओं में गिना जाता है। उनके ससुर स्वर्गीय बृजलाल सीगड़ा भी झुंझुनूं पंचायत समिति में सात वर्ष तक प्रधान रहे थे और करीब 25 वर्ष तक सरपंच के रूप में कार्य कर चुके थे। इस तरह सीगड़ा परिवार की क्षेत्रीय राजनीति में लंबे समय से मौजूदगी रही है।

सुशीला सीगड़ा का दावा है कि पंचायत राज के चुनावों में उन्हें अब तक हार का सामना नहीं करना पड़ा है। अब वे कांग्रेस के टिकट पर जिला परिषद चुनाव में अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं।

वार्ड-6 में राजनीतिक अनुभव और विरासत की चर्चा

वार्ड-6 में भाजपा की अनामिका और कांग्रेस की सुशीला सीगड़ा के बीच मुकाबला होगा। एक ओर पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार की पुत्रवधू अनामिका हैं, तो दूसरी ओर पंचायत समिति की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रही सुशीला सीगड़ा हैं, जो भाजपा के टिकट पर मंडावा विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी हैं।

इस मुकाबले में प्रत्याशियों का राजनीतिक अनुभव, स्थानीय संपर्क, कार्यकर्ताओं का समर्थन और दोनों परिवारों की क्षेत्रीय राजनीतिक मौजूदगी चर्चा के प्रमुख विषय रहेंगे। सुशीला की भाजपा से कांग्रेस में वापसी ने चुनाव को नया राजनीतिक संदर्भ दिया है। वहीं, उनके टिकट वितरण संबंधी आरोपों ने पुराने कार्यकर्ताओं की भूमिका पर बहस छेड़ दी है।

नामांकन के अंतिम दिन हुए इस घटनाक्रम के बाद अब वार्ड-6 के चुनाव पर सबकी निगाहें रहेंगी। हालांकि, राजनीतिक अनुभव और दल बदल अपने आप में चुनाव परिणाम तय नहीं करते। मतदाताओं का रुख और दोनों प्रत्याशियों का चुनाव अभियान ही मुकाबले की दिशा तय करेगा।

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