चूरू बाजार में अतिक्रमण पर चला पीला पंजा, अब लाल निशानों पर कार्रवाई का इंतजार
सुभाष चौक से गढ़ तक हटाए चबूतरे और सीढ़ियां, सवाल—क्या सड़क चौड़ीकरण की अधूरी मुहिम भी आगे बढ़ेगी?
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : शहर के बाजार में अतिक्रमण हटाने के लिए नगरपरिषद ने अभियान चलाया। सुभाष चौक से गढ़ तक आयुक्त की मौजूदगी में बुलडोजर से दुकानों के आगे बने चबूतरे और सीढ़ियां हटाई गईं। कार्रवाई के दौरान कई दुकानदार बाहर रखा सामान समेटते नजर आए। नगरपरिषद ने टूटे चबूतरों और सीढ़ियों का मलबा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर हटाया।
कार्रवाई से बाजार में अतिक्रमण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सवाल यह है कि क्या अभियान दुकानों के आगे बने चबूतरों और सीढ़ियों तक ही सीमित रहेगा या वर्षों से अधूरे पड़े सड़क चौड़ीकरण के प्रयासों को भी आगे बढ़ाया जाएगा?
वर्षों पुराने लाल निशान, कार्रवाई का इंतजार
चूरू बाजार में सड़क चौड़ीकरण को लेकर पहले भी अभियान चलाया गया था। उस दौरान सुभाष चौक से सफेद घंटाघर तक कई दुकानों पर लाल निशान लगाए गए थे। इनमें से कई निशान आज भी दिखाई देते हैं, लेकिन उनके आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई। अब सवाल उठ रहा है कि जब निशान वर्षों पहले लगा दिए गए थे, तो सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ी?
चर्चा रही है कि उस समय राजनीतिक प्रभाव के चलते कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। ऐसे में अब नगरपरिषद की कार्रवाई पर लोगों की नजर है कि क्या पुराने लाल निशानों तक भी बुलडोजर पहुंचेगा।
बाजार में आवागमन की समस्या
बाजार में ग्राहकों की भीड़ और दुकानों के बाहर तक फैले सामान के कारण रास्ता संकरा हो जाता है। इससे आम लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। ऐसे में अतिक्रमण हटाने के साथ सड़क चौड़ीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाना भी जरूरी है। कार्रवाई तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब नियम सभी पर समान रूप से लागू हों और रास्ते पर दोबारा अतिक्रमण न हो।
नगरपरिषद को दुकानों के बाहर सामान रखकर रास्ता घेरने वालों पर भी नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही पहले लगाए गए लाल निशानों की स्थिति की समीक्षा कर सड़क चौड़ीकरण से जुड़ी बाधाओं को दूर करने की जरूरत है।
भाजपा आई, बुलडोजर आया; अब आगे क्या?
अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाना अच्छी पहल है, लेकिन इसकी सफलता केवल चबूतरे और सीढ़ियां तोड़ने से नहीं, बल्कि स्थायी बदलाव से तय होगी। यदि कुछ दिनों बाद फिर उसी जगह अतिक्रमण हो जाता है, तो अभियान का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या नगरपरिषद की कार्रवाई छोटे अतिक्रमणों तक सीमित रहेगी या सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रहे पुराने अतिक्रमणों पर भी कदम उठाए जाएंगे? शहरवासियों को ऐसी कार्रवाई की उम्मीद है, जिससे बाजार का रास्ता चौड़ा हो, आवागमन सुगम बने और नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से सुनिश्चित हो।
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