झुंझुनूं नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस-भाजपा के बीच कांटे का मुकाबला
कांग्रेस 25-28, भाजपा 15-20 सीटों तक सिमटने का अनुमान; निर्दलीय बन सकते हैं बोर्ड गठन की चाबी
झुंझुनूं : नगर परिषद चुनाव में इस बार मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के साथ-साथ बागियों व निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच भी है। 60 वार्डों में 96,555 मतदाताओं और 262 उम्मीदवारों के बीच हो रहे चुनाव में परिसीमन और बदले सामाजिक समीकरणों ने बोर्ड गठन का गणित उलझा दिया है। राजनीतिक विश्लेषक अनीश खान के आकलन के अनुसार किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना कम है और निर्दलीय निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
वर्ष 2019 में कांग्रेस ने 34 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया था, जबकि भाजपा को 10 और निर्दलीयों को 16 सीटें मिली थीं। इस बार नए परिसीमन से कई वार्डों के सामाजिक समीकरण बदले हैं। अल्पसंख्यक प्रभाव वाले वार्डों के पुनर्गठन से अल्पसंख्यक पार्षदों की संख्या करीब 25 से घटकर 18 के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि नगर परिषद सीमा में गांवों के शामिल होने से जाट समाज के प्रतिनिधित्व में बढ़ोतरी का अनुमान जताया जा रहा है।
बगावत से दोनों दल परेशान:
टिकट वितरण के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों में बगावत सामने आई है। कांग्रेस के 10 से अधिक वार्डों में अधिकृत प्रत्याशियों के सामने पार्टी से जुड़े बागी मैदान में हैं। भाजपा में भी कई वार्डों में असंतुष्ट नेता चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस को 25 से 28 और भाजपा को 15 से 20 सीटें मिलने का राजनीतिक आकलन किया जा रहा है।
निर्दलीय तय कर सकते हैं बोर्ड:
वर्ष 2014 में निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा ने बोर्ड बनाया था। इस बार भी बड़ी संख्या में प्रभावशाली निर्दलीय मैदान में हैं। यदि किसी दल को बहुमत नहीं मिला तो बोर्ड गठन में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। सभापति पद के लिए भी चुनाव परिणाम के बाद बनने वाले सामाजिक और राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण रहेंगे। कुल मिलाकर इस बार 2019 जैसा स्पष्ट जनादेश मिलना मुश्किल माना जा रहा है और कई वार्डों में करीबी मुकाबले के आसार हैं।
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