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निकाय चुनाव से पहले मूल ओबीसी समाज ने ठोकी राजनीतिक प्रतिनिधित्व की ताल, टिकट नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनी


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निकाय चुनाव से पहले मूल ओबीसी समाज ने ठोकी राजनीतिक प्रतिनिधित्व की ताल, टिकट नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनी

सीकर में 1500 से अधिक लोगों के जुटने का दावा, जनसंख्या के अनुपात में टिकट और 27 प्रतिशत आरक्षण की उठी मांग

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : नैना शेखावत

सीकर : निकाय चुनाव 2026 से पहले सीकर में मूल ओबीसी समाज ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर दी है। रविवार को लोहिया रिसॉर्ट में मूल ओबीसी न्याय एवं उत्थान संस्थान राजस्थान की प्रदेश एवं जिला कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में समाज के लोग जुटे। कार्यक्रम में निकाय, पंचायत और आगामी विधानसभा चुनावों में जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और टिकट देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

संस्थान के राधेश्याम काम्या ने बताया कि कार्यक्रम में खाती, कुम्हार, माली, यादव, छीपा, मणियार, गुर्जर, नाई, लोहार सहित करीब 30-40 मूल ओबीसी समाजों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण का वर्गीकरण करने, आरक्षण को मौजूदा 21 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने तथा जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक दलों से टिकट देने की मांग की जा रही है।

टिकट नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी

काम्या ने कहा कि निकाय चुनाव के साथ पंचायत और विधानसभा चुनावों में भी मूल ओबीसी समाज को उसकी संख्या के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राजनीतिक दलों ने समाज की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल समाज की मांगों को सुनेगा और न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व देगा, समाज उसी के पक्ष में मतदान करने पर विचार करेगा।

1500 से ज्यादा लोगों के पहुंचने का दावा

संस्थान से जुड़े भंवरलाल जांगिड़ ने दावा किया कि कार्यक्रम में करीब 1500 महिला-पुरुष पहुंचे। उन्होंने कहा कि मूल ओबीसी समाज की छोटी-छोटी जातियों को अभी भी राजनीति में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। राजनीतिक दलों को इन समाजों की समस्याओं को समझते हुए चुनावी टिकट और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देनी चाहिए।

जांगिड़ ने मूल ओबीसी समाज की आबादी करीब 55 प्रतिशत होने का दावा करते हुए कहा कि संख्या के अनुपात में गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों को राजनीति में अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने आने वाले समय में करीब दो लाख लोगों को एकजुट करने का लक्ष्य भी बताया।

भाजपा-कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो क्या होगा?

कार्यक्रम में रतनलाल सैनी से जब पूछा गया कि यदि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही मूल ओबीसी समाज को पर्याप्त टिकट नहीं देती हैं तो क्या निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतारे जाएंगे। इस पर उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय समाज की करीब 38-40 जातियों के अध्यक्षों और प्रतिनिधियों की सामूहिक बैठक में लिया जाएगा और जो निर्णय होगा, उसे सभी स्वीकार करेंगे।

सैनी ने स्पष्ट किया कि समाज की लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। उद्देश्य छोटी संख्या वाली मूल ओबीसी जातियों को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे लाना है। उन्होंने गाड़िया लोहार, बंजारा, योगी सहित छोटी आबादी वाले समाजों को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई।

गरीब विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की मांग

सैनी ने सीकर में आर्थिक रूप से कमजोर मूल ओबीसी विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क या रियायती छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने तथा इसके लिए भूमि देने की मांग भी सरकार के सामने रखी। उन्होंने कहा कि सीकर शिक्षा का बड़ा केंद्र है। ऐसे में गरीब परिवारों के विद्यार्थियों को छात्रावास की सुविधा मिलने से उन्हें बेहतर शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी।

दोनों प्रमुख दलों में अपनी बात रखने का दावा

रतनलाल सैनी ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक मंच है। भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न विचारधाराओं से जुड़े लोग समाज की मांगों को अपने-अपने राजनीतिक मंच पर उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समाज अपने संबंधित राजनीतिक दलों के उचित मंच पर प्रतिनिधित्व और अन्य मांगें रखेगा। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि राजनीतिक दल मूल ओबीसी समाज की मांगों को गंभीरता से लेते हुए समाधान की दिशा में कदम उठाएंगे।

निकाय चुनाव से पहले सीकर में मूल ओबीसी समाज की इस लामबंदी ने राजनीतिक दलों के सामने प्रतिनिधित्व का मुद्दा जोरदार तरीके से रख दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनावी टिकट वितरण के दौरान राजनीतिक दल समाज की इन मांगों को कितना महत्व देते हैं।

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