[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

PM सूर्य में गड़बड़ी का आरोप,Non-DCR पैनल को DCR दर्शाया:सब्सिडी उठाई, बिजली विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
चूरूटॉप न्यूज़राजस्थानराज्यसादुलपुर

PM सूर्य में गड़बड़ी का आरोप,Non-DCR पैनल को DCR दर्शाया:सब्सिडी उठाई, बिजली विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

PM सूर्य में गड़बड़ी का आरोप,Non-DCR पैनल को DCR दर्शाया:सब्सिडी उठाई, बिजली विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

सादुलपुर : सादुलपुर में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ वेंडर उपभोक्ताओं की छतों पर नॉन-डीसीआर (Non-DCR) सोलर पैनल लगाकर उन्हें पोर्टल पर डीसीआर (DCR) पैनल दर्शा रहे हैं। इसी आधार पर सब्सिडी और ऋण का लाभ उठाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस मामले में बिजली विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। जानकारी के अनुसार, योजना के मानकों के विपरीत पैनल लगाए जा रहे हैं। यह भी आरोप है कि इन पैनलों का भौतिक सत्यापन किए बिना ही विभागीय स्तर पर उनका सत्यापन कर दिया जाता है, जिसके बाद वेंडर सब्सिडी के लिए पोर्टल पर आवेदन करते हैं।

उपभोक्ता के घर सोलर प्लांट का निरीक्षण

मामले की पड़ताल के दौरान वार्ड 18 स्थित एक उपभोक्ता के घर पर लगाए गए सोलर प्लांट का निरीक्षण किया गया। यहां भादरा हनुमानगढ़ की राजस्थान ग्रीन एंड एनर्जी सोलर पावर फर्म द्वारा प्लांट लगाया गया था। मौके पर 11 नॉन-डीसीआर 705 वॉट के पैनल पाए गए, जबकि पोर्टल पर 6 डीसीआर 540 वॉट के पैनल दर्ज थे। इतना ही नहीं, पैनलों का विभागीय सत्यापन दर्शाया गया था और सब्सिडी के लिए आवेदन भी पोर्टल पर प्रस्तुत मिला।

कम कीमत में सोलर प्लांट लगाने का लालच

सरकारी वेंडर विनोद पूनिया ने बताया- बाहरी फर्में क्षेत्र में आकर ग्राहकों को कम कीमत में सोलर प्लांट लगाने का लालच देती हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में प्लांट ठीक काम करता हुआ दिखाई देता है, लेकिन 2-3 साल बाद तकनीकी खराबी आने पर उपभोक्ता परेशान होते हैं और उस समय कोई जिम्मेदारी लेने वाला नहीं मिलता।

इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में योजना के तहत लगाए गए अन्य सोलर प्लांटों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठने लगी है। लोगों ने डीसीआर के नाम पर नॉन-डीसीआर पैनल लगाने वाली फर्मों के खिलाफ कार्रवाई और संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।

Related Articles