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खिलाड़ियों के विरोध के आगे झुका प्रशासन, झुंझुनूं फुटबॉल संघ के चुनाव पर रोक


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झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

खिलाड़ियों के विरोध के आगे झुका प्रशासन, झुंझुनूं फुटबॉल संघ के चुनाव पर रोक

मतदाता सूची में फर्जीवाड़े के आरोप; जांच पूरी होने तक चुनाव स्थगित, तहसीलदार-सीआई के हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला

झुंझुनूं : झुंझुनूं जिला फुटबॉल संघ (डीएफए) के चुनावों को लेकर शनिवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। जिलेभर के फुटबॉल खिलाड़ियों, रेफरियों, क्लब संचालकों और खेल प्रेमियों ने ‘फुटबॉल बचाओ संघर्ष समिति’ के नेतृत्व में जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज बुलंद की। खिलाड़ियों के विरोध और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद फिलहाल चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।

प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर और जिला खेल अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर संघ के वर्तमान पदाधिकारियों पर नियमों की अनदेखी, चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगाए। उनका कहना था कि फुटबॉल संघ में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर मनमाने तरीके से चुनाव करवाने की तैयारी की जा रही थी।

मतदाता सूची पर उठे सवाल

संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया कि 24 मई 2026 को जारी चुनाव कार्यक्रम और मतदाता सूची के बाद विवाद शुरू हुआ। खिलाड़ियों का आरोप है कि जिले के पुराने और सक्रिय क्लब आरजे क्लब तथा डेलिशा फुटबॉल क्लब को बिना किसी नोटिस या सदस्यता समाप्ति आदेश के मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया।

वहीं दूसरी ओर कुछ नए क्लबों को सूची में शामिल किया गया, जिनका संबंध कथित रूप से वर्तमान सचिव के परिजनों और रिश्तेदारों से है। प्रदर्शनकारियों ने इसे चुनाव परिणाम प्रभावित करने की कोशिश बताया।

जांच के आदेश के बावजूद बढ़ाई गई चुनाव प्रक्रिया

खिलाड़ियों के अनुसार मामले की शिकायत उप-रजिस्ट्रार कार्यालय में की गई थी। शिकायत पर 10 जून 2026 को जिला खेल अधिकारी को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद जांच पूरी होने से पहले ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।

आरोप है कि वर्तमान सचिव ने एक शारीरिक शिक्षक को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त कर 14 जून को चुनाव कराने की तैयारी शुरू कर दी थी। इससे खिलाड़ियों और क्लब प्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ गई।

कलेक्ट्रेट पर गूंजे ‘फुटबॉल बचाओ’ के नारे

विवाद बढ़ने पर बड़ी संख्या में खिलाड़ी, रेफरी, छात्र और क्लब प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने “फुटबॉल बचाओ” के नारे लगाते हुए मांग की कि जांच पूरी होने तक चुनाव नहीं कराए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो जिलेभर में आंदोलन तेज किया जाएगा।

तहसीलदार और सीआई ने संभाला मोर्चा

स्थिति को देखते हुए तहसीलदार महेंद्र मूंड और कोतवाली थाना प्रभारी श्रवण कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।

तहसीलदार महेंद्र मूंड ने कहा कि मामले में विभिन्न पक्षों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। विवाद की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल चुनाव प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें

  • जांच पूरी होने तक सभी चुनावी गतिविधियां स्थगित की जाएं।
  • उप-रजिस्ट्रार के आदेशों की अवहेलना करने वालों पर कार्रवाई हो।
  • मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जिम्मेदार ठहराया जाए।
  • जिला फुटबॉल संघ में पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जाएं।

खेल जगत की निगाहें जांच रिपोर्ट पर

फुटबॉल संघ के चुनाव को लेकर पैदा हुआ यह विवाद अब जिले के खेल जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। खिलाड़ियों का कहना है कि संघ का संचालन निष्पक्ष और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए ताकि जिले में फुटबॉल का विकास प्रभावित न हो। फिलहाल सभी की निगाहें जिला खेल अधिकारी की जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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