कोट बांध में युवक ने लगाई छलांग, दोपहर में डूबा राजेश के शव को गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद निकाला बाहर, आज होगा पोस्टमार्टम
उदयपुरवाटी के नांगल कोट बांध में डूबने से व्यक्ति की दर्दनाक मौत, अजाड़ी कलां का था निवासी
उदयपुरवाटी : कस्बे के निकटवर्ती प्रसिद्ध कोट बांध में रविवार को एक बड़ा हादसा सामने आया, जहां पानी में डूबने से एक 46 वर्षीय व्यक्ति की असामयिक मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। पुलिस थाना प्रभारी रामपाल मीणा ने बताया कि रविवार दोपहर पुलिस को सूचना मिली थी कि कोट बांध के गहरे पानी में एक व्यक्ति डूब गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और स्थानीय स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बांध की गहराई को देखते हुए तुरंत गोताखोर रतनलाल गुर्जर को बुलाया गया। गोताखोर ने कड़े प्रयासों के बाद पानी से शव को बाहर निकाला।
पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मोर्चरी घर में रखवाया है। मृतक की पहचान राजेश (46) पुत्र देवकरण जाट, निवासी अजाड़ी कलां के रूप में की गई है। सीआई मीणा ने बताया कि सोमवार को शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सुपुर्द किया जाएगा। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत नांगल के कोट बांध जैसे पिकनिक स्पॉट्स और जलाशयों पर आए दिन होने वाले हादसों को रोकने के लिए प्रशासनिक सतर्कता और जन-जागरूकता दोनों का होना बेहद जरूरी है।जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने चाहिए। बांध के एंट्री पॉइंट्स और गहरे पानी वाले खतरनाक क्षेत्रों पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘चेतावनी बोर्ड’ लगाए जाएं। पानी के भीतर एक सुरक्षित सीमा तय की जाए, जिसके आगे जाना प्रतिबंधित हो।
सुरक्षा गार्ड और ‘लाइफ गार्ड’ की तैनाती
विशेषकर रविवार, त्योहारों या छुट्टियों के दिनों में जब भीड़ ज्यादा होती है, बांध पर होमगार्ड या प्रशिक्षित लाइफ गार्ड तैनात किए जाने चाहिए जो लोगों को गहरे पानी में जाने से रोक सके। साथ ही बांध के सबसे संवेदनशील और ढलान वाले स्थानों पर लोहे की जाली या मजबूत रेलिंग लगाई जानी चाहिए ताकि कोई अनजाने में पैर फिसलने से गहरे पानी में न गिर सके।
आपातकालीन स्थिति में बांध के आसपास स्थानीय दुकानदारों या सुरक्षाकर्मियों के पास लाइफ जैकेट, ट्यूब और लंबी रस्सियां हमेशा उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि किसी को डूबता देख तुरंत मदद की जा सके। इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर बांध के पास प्रमुख स्थानों पर पुलिस, एम्बुलेंस और स्थानीय गोताखोरों के मोबाइल नंबर बड़े अक्षरों में लिखे होने चाहिए ताकि दुर्घटना के समय बिना वक्त गंवाए सूचना दी जा सके।
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