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पाटन के हसामपुर में नृसिंह महोत्सव संपन्न:हजारों भक्तों ने किए दर्शन, 24 अवतारों का मूकाभिनय; निकाली शोभायात्रा


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पाटन के हसामपुर में नृसिंह महोत्सव संपन्न:हजारों भक्तों ने किए दर्शन, 24 अवतारों का मूकाभिनय; निकाली शोभायात्रा

पाटन के हसामपुर में नृसिंह महोत्सव संपन्न:हजारों भक्तों ने किए दर्शन, 24 अवतारों का मूकाभिनय; निकाली शोभायात्रा

पाटन : पाटन के निकटवर्ती ग्राम हसामपुर में श्री नृसिंह भगवान का पंच दिवसीय महोत्सव संपन्न हो गया। पुजारी परिवार ने बताया कि इस बार पहले की अपेक्षा अधिक संख्या में भक्तों ने भगवान नृसिंह के दर्शन किए।

मूंडरू से आए रासधारियों ने किया मूकाभिनय

कार्यक्रम की श्रृंखला में मूंडरू और श्रीमाधोपुर से पधारे रासधारियों ने भगवान नृसिंह के अवतार सहित 24 अवतारों को मूकाभिनय द्वारा रात भर प्रस्तुत किया। इस दौरान विभिन्न प्रकार के भजनों की श्रृंखला भी रही। लगभग 400 वर्षों से मूंडरू का छितमका परिवार भगवान नृसिंह का चेहरा लेकर हसामपुर आता है।

हसामपुर में श्री नृसिंह भगवान का पंच दिवसीय महोत्सव संपन्न हो गया।
हसामपुर में श्री नृसिंह भगवान का पंच दिवसीय महोत्सव संपन्न हो गया।

पूरे गांव में निकली शोभायात्रा

नृसिंह चतुर्दशी के दिन भगवान नृसिंह की पूरे गांव में शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं कलश लेकर उपस्थित रहीं। विभिन्न प्रकार के बैंड बाजे और भगवान के भजनों का आनंद लेते हुए यह शोभायात्रा नृसिंह मंदिर पहुंची।

24 अवतारों का मूकाभिनय दिखाया

शाम 7 बजे भगवान नृसिंह का भाव भंगिमा युक्त अवतार हुआ। रात्रि 9 बजे ढोला यात्रा के बाद रासधारियों द्वारा 24 अवतारों का मूकाभिनय दिखाया गया। अगले दिन सुबह 4:30 बजे भगवान नृसिंह का प्राकट्य हुआ, जिसमें दूर-दूर से आए यात्रियों ने दर्शन लाभ प्राप्त कर भगवान को प्रणाम किया।

महिलाओं ने पूरे गांव में विशाल शोभायात्रा और कलश यात्रा निकाली।
महिलाओं ने पूरे गांव में विशाल शोभायात्रा और कलश यात्रा निकाली।

72 घंटे किया यज्ञ, 120 घंटे रामधुनी

इन पांच दिनों में भगवान के मंदिर में विभिन्न प्रकार की झांकियों के दर्शन कराए गए। 72 घंटे लगातार भगवान का यज्ञ किया गया और 120 घंटे भगवान की रामधुनी आयोजित की गई। चार दिन तक रामचरितमानस के नवाहन पारायण पाठ भी आयोजित किए गए। इन पांच दिनों में लगातार भगवान का भंडारा भी चलता रहा।

स्वामी परिवार के बुजुर्ग विशन दास महाराज को नृसिंह भगवान की यह मूर्ति 1458 ईस्वी में बाजनी सिला के नीचे से प्राप्त हुई थी। तभी से हसामपुर का स्वामी परिवार सालिगराम रूपी इस मूर्ति की सेवा पूजा करता आ रहा है।

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