मौत की रफ़्तार पर ‘प्रशासनिक’ चुप्पी..? क्या मासूमों की जान इतनी सस्ती है? आए दिन बढ़ रहे हैं स्कूली वाहनों के हादसे..
शेखावाटी स्कूल हेतमसर (मंडावा) की बाल वाहिनी में बाल बाल बचे मासूम पोल से टकराई बाल वाहिनी..स्कूली वाहन पर लिखे नंबर की इनकमिंग सर्विस बंद
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान
रामगढ़ शेखावाटी : जब एक मां अपने कलेजे के टुकड़े का बस्ता कंधे पर टांगकर उसे स्कूल वैन तक छोड़ती है, तो उसकी आंखों में एक सुनहरा भविष्य तैर रहा होता है। वह हाथ हिलाकर बच्चे को विदा करती है, यह सोचकर कि उसका बच्चा देश का भविष्य संवारने जा रहा है। पर अफ़सोस, उसे क्या पता कि जिस बाल वाहिनी गाड़ी में उसने अपना ‘सपना’ बैठाया है, वह गाड़ी नहीं, बल्कि सड़कों पर दौड़ता एक ‘चलता-फिरता ताबूत’ भी बन सकती हैं।
तिहावली का हादसा: साक्षात ट्रेलर
ताजा मामला सीकर जिला के रामगढ़ के तिहावली गांव का है, जहां मंडावा के हेतमसर गांव की शेखावाटी स्कूल की एक क्रूजर गाड़ी ने बिजली के खंभे को उखाड़ फेंका। गनीमत यह रही, शायद उन मासूमों के मां-बाप का पुण्य प्रताप था, कि उस वक्त गाड़ी में बच्चे नहीं थे। वरना आज हम खबर नहीं, बल्कि चीख-पुकार का मातम लिख रहे होते। प्रत्यदर्शियों के अनुसार स्कूली वाहन की स्पीड बहुत ज्यादा थी जिसे चालक कंट्रोल नही कर पाया
गाड़ी के दस्तावेज पहले ही ‘दम तोड़’ चुके हैं, PUC का अता-पता नहीं है, गाड़ी नीचे से टूट चुकी है, आए दिन स्कूली वाहन हादसों का शिकार हो रहे हैं। बहुत बार बिना कागजों के, बिना फिटनेस के, मौत का सफर करते स्कूली वाहन भी देखे गए हैं। बावजूद इसके प्रशासन मौन हैं।

अनुभवी चालको की कमी हादसों को देती दावत
जब हमारी टीम ने अलग अलग स्कूलो के अलग अलग चालको के बारे में जानकारी जुटाई तो पाया कि ज्यादातर स्कूलों में अनुभवी चालको की कमी हैं जिसके चलते आए दिन कभी स्कूली वाहन सड़क पर स्टंट करते नजर आते हैं तो कभी ओवरटेक की होड़ करते नजर आते हैं। जिसके चलते हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।
क्या प्रशासन को सिर्फ बड़े हादसों की हेडलाइन का इंतजार है?
क्या किसी मासूम की बलि चढ़ने के बाद ही कार्रवाई की फाइलें धूल झाड़कर बाहर निकलेंगी?
बिजली विभाग के सहायक अभियंता दिनेश मीणा ने बताया कि पोल टूटने के बाद हमारी टीम मौके पर पहुंच गई है। सप्लाई कटवा दी गई हैं। और कनिष्ट अभियंता को बिल दिया गया हैं कि या तो स्कूल प्रशासन पोल का डिमांड नोटिस जमा करवाए अन्यथा एफ आई सर दर्ज करवाई जाएगी
बड़ा सवाल कब जागेगा प्रशासन?
लगातार हो रहे इन हादसों के बावजूद कार्रवाई नदारद है। क्या एसपी साहब अब किसी विशेष अभियान के तहत इन ‘यमराज बनकर दौड़ रही बाल वाहिनियों के वाहनों’ पर नकेल कसेंगे? या फिर सिस्टम की यह चुप्पी किसी बड़ी अनहोनी को दावत देती रहेगी?
सोचिए! उन मासूमों का कसूर सिर्फ इतना है कि वे पढ़ना चाहते हैं? प्रशासन की यह चुप्पी उन मांओं की ममता का अपमान है जो हर सुबह अपने लाल को एक सुरक्षित कल की उम्मीद में विदा करती हैं। क्या हम वाकई किसी नन्हीं अर्थी के उठने का इंतज़ार कर रहे हैं? लगातार बढ़ते हादसे और बिना दस्तावेजों वाले दौड़ते स्कूली वाहन प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सर गाड़ी मेरी ही स्कूल की हैं बच्चे छोड़कर आ रही थी उस एरिया के बच्चे आते हैं। उस वक्त गाड़ी में बच्चे नहीं थे सामने से कोई वाहन आ गया था। खबर चलाओगे क्या सर देख लेते थोड़ा हमारे लायक कुछ हो तो बता दीजिए हम क्या कर सकते हैं।
भैरू लाल गुर्जर मैनेजिंग डायरेक्टर शेखावाटी स्कूल हेतमसर मंडावा
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19






Total views : 2130473

